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MLC चुनाव में OPS ने सत्ताधारी गठबंधन को किया फेल! शिंदे सरकार पर दबाव, कर सकती है पुरानी पेंशन पर पुनर्विचार

Maharashtra News: कई बीजेपी नेता भी महाराष्ट्र के MLC चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए OPS को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में पार्टी को 3 पर हार का मुंह देखना पड़ा था.

OPS In Maharashtra: महाराष्ट्र में विधान परिषद के चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद अब एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी पुरानी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने पर गंभीरता से पुनर्विचार कर सकती है. विधान परिषद की 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में पार्टी 3 सीटें हार गई थी. बीजेपी के कई नेताओं ने स्वीकार किया है कि नागपुर और औरंगाबाद में शिक्षकों के निर्वाचन क्षेत्रों में हार के लिए ओपीएस ने महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

फणडवीस की घोषणा ने बिगाड़ा गणित
एचटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि विधानसभा में फडणवीस की घोषणा की थी कि वह ओपीएस लागू करने में असमर्थ हैं. इसने सब बिगाड़ दिया. हालांकि, शिंदे और फडणवीस को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने इस पर पुनर्विचार करने की घोषणा कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी कपिल पाटिल ने भी इससे सहमति जताई कि ओपीएस उन कारकों में से एक था, जिसने चुनाव के नतीजे तय किए. उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के दिल के बहुत करीब का मुद्दा है.

सरकार का तर्क
महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना को 2005 में बंद कर दिया गया था. सरकारी कर्मचारी और शिक्षक इसे बहाल करने की मांग कर रहे हैं. राज्य सरकार के कर्मचारियों ने 27 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले इस मुद्दे को लेकर पूरे महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है.

दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि लगभग 6 लाख पेंशनभोगियों को कवर करने के लिए राज्य के खजाने पर 55,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ओपीएस लागू होने से राज्य का खर्च कम से कम 35% तक बढ़ जाएगा, जिससे विकास कार्यों के लिए शायद ही कुछ धन बचे.

ओपीएस से राजस्व पर बोझ
इस रिपोर्ट के मुताबिक, बिना नाम छापे एक अधिकारी के हवाले से लिखा, ''1 नवंबर, 2005 को ओपीएस बंद होने के बाद से नई पेंशन योजना पर सालाना 41,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है. ओपीएस को वापस लाने से सरकारी खजाने पर 55,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा, जिसका असर विकास कार्यों पर पड़ेगा.'' अधिकारी ने बताया कि राजस्व का 30 प्रतिशत से ज्यादा विकास कार्य पर किया जाता है लेकिन ओपीएस लागू होने से उस मद में कोई पैसा नहीं बचेगा. 

कर्मचारी संगठन क्या कहते हैं?
हालांकि, राज्य सरकारी कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन के महासचिव विश्वास कटकर राज्य के आंकड़ों को झूठा बताते हैं. उन्होंने कहा, ''फणडवीस कहते हैं कि ओपीएस वापस आने से हर साल राज्य को 1.10 लाख करोड़ खर्च करना होगा, लेकिन ये एक बढ़ा हुआ आंकड़ा है. यह खर्च अगले 10 साल में होगा.'' उन्होंने कहा कि राज्य के खजाने पर शायद ही कुछ बोझ होगा, क्योंकि अर्थव्यवस्था हर साल 12% बढ़ रही है.

कटकर ने आगे कहा कि कक्षा तीन के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में लगभग 22,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि वर्तमान में यह 10,000 रुपये है. सरकार को एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करना चाहिए जिसके तहत ओपीएस लागू करने के बाद उसे कोई वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़े.

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