Delhi AQI: दिल्ली में दमघोंटू हवा बरकरार, कई इलाकों में AQI 700 पार! मौसम और प्रदूषण ने मिलकर बढ़ाया संकट
Delhi Air Pollution News: दिल्ली में प्रदूषण ने खतरनाक स्तर पार कर लिया है. AQI 700 के ऊपर पहुंचने से कई इलाकों में हालात खराब हैं. स्मॉग की मोटी परत से सांस लेना भी मुश्किल हो गया है.

राजधानी दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में मंगलवार (20 जनवरी) सुबह घनी स्मॉग की परत देखने को मिली. पांडव नगर स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के आसपास का इलाका धुंध में डूबा रहा. सड़कों पर दृश्यता कम रही और लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें सामने आईं.
हवा की हालत बेहद खराब रही. लाइव आंकड़ों के मुताबिक कई इलाकों में AQI 700 के पार पहुंच गया, जो ‘Hazardous’ यानी खतरनाक श्रेणी में आता है. PM10 और PM2.5 दोनों ही कण सामान्य सीमा से कई गुना ऊपर दर्ज किए गए.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार कुछ इलाकों में AQI 445 तक रहा, जिसे ‘गंभीर’ माना जाता है. राजधानी के 37 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 32 पर प्रदूषण गंभीर स्तर पर दर्ज हुआ और 19 जगह हालात मेडिकल इमरजेंसी जैसे रहे.
किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर
पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार में AQI 631 तक पहुंच गया. अशोक विहार में 763, बवाना में 701, रोहिणी में 613, मुंडका में 483, वजीरपुर में 743 और चांदनी चौक में 620 दर्ज किया गया.
पटपड़गंज 469 और सोनिया विहार 621 पर रहा. आईटीओ, आरके पुरम जैसे इलाकों में भी हवा सांस लेने लायक नहीं रही. सबसे कम AQI अयानगर में 356 दर्ज हुआ, लेकिन यह भी सुरक्षित स्तर से काफी ऊपर है.
रात में दिखा प्रदूषण का सबसे डरावना रूप
प्रदूषण का सबसे खतरनाक चेहरा रात के समय सामने आया. आनंद विहार में रात करीब एक बजे PM2.5 का स्तर 890 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया.
यह राष्ट्रीय मानक से लगभग 15 गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 59 गुना ज्यादा है. नेहरू नगर में भी शनिवार रात PM2.5 952 माइक्रोग्राम तक रिकॉर्ड किया गया, जिसने हालात की गंभीरता और बढ़ा दी.
आखिर क्यों बिगड़ी दिल्ली की हवा
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर के भीतर से निकलने वाला धुआं और मौसम की मार मिलकर हालात बिगाड़ रही है. हवा लगभग ठहरी हुई है, इसलिए प्रदूषण दूर नहीं जा पा रहा और आसमान के नीचे ही जमा होता जा रहा है.
हवा तेज नहीं होने से प्रदूषण घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक टिका रहता है. ऊपर से सर्दियों में बनने वाली तापमान की परतें इस जहरीली हवा को नीचे ही दबाकर रखती हैं, जिससे हालात और दमघोंटू हो जाते हैं.
बच्चों-बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों और सांस व दिल के मरीजों के लिए खास तौर पर खतरनाक होती है. आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस फूलना आम लक्षण हैं. विशेषज्ञ अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह दे रहे हैं.
मौसम में बदलाव और हवा की रफ्तार बढ़ने पर ही राहत की उम्मीद है. तब तक राजधानी की हवा लोगों की सेहत पर भारी पड़ती रहेगी और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है.
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