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Ganesh Chaturthi 2026: मिट्टी की बताकर POP की गणपति मूर्ति तो नहीं दे रहा दुकानदार? पूछें ये 4 सवाल

Ganesh Chaturthi 2026: गणपति की मूर्ति मिट्टी की है या POP की, केवल वजन से पहचानना मुश्किल है. खरीदते समय सामग्री, रंग, विसर्जन और रसीद से जुड़े ये 4 सवाल पूछें.

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी से पहले बाजारों में बप्पा की छोटी-बड़ी मूर्तियां सज चुकी हैं. कोई मूर्ति शुद्ध मिट्टी की बताई जा रही है, कोई शाडू माटी की और किसी पर ‘इको-फ्रेंडली’ का टैग लगा है. परेशानी यह है कि केवल रंग और बनावट देखकर यह तय करना आसान नहीं कि मूर्ति वास्तव में मिट्टी की है या Plaster of Paris यानी POP से बनी है.

कई POP मूर्तियों पर मिट्टी जैसा रंग कर दिया जाता है. वहीं कुछ मिट्टी की मूर्तियां इतनी चिकनी और सुंदर होती हैं कि लोग उन्हें POP समझ लेते हैं. इसलिए मूर्ति खरीदते समय केवल दुकानदार के एक जवाब पर भरोसा करने के बजाय उससे चार सीधे सवाल पूछिए.

पहला सवाल: मूर्ति पूरी तरह मिट्टी की है या उसमें POP मिलाया गया है?

सिर्फ यह पूछना काफी नहीं कि मूर्ति इको-फ्रेंडली है या नहीं. दुकानदार से साफ पूछें कि इसे प्राकृतिक मिट्टी, शाडू माटी या किसी मिश्रण से बनाया गया है. अगर मिश्रण है तो उसमें क्या-क्या मिलाया गया है?

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कई लोग वजन से इसकी पहचान करने की कोशिश करते हैं. माना जाता है कि मिट्टी की मूर्ति भारी और POP की मूर्ति हल्की होती है, लेकिन छोटे आकार, खोखली बनावट और नमी के कारण वजन बदल सकता है. इसलिए वजन अकेला पक्का प्रमाण नहीं है.

संभव हो तो बिल पर मूर्ति की सामग्री लिखवाएं. बड़े विक्रेता या पंजीकृत मूर्तिकार से खरीद रहे हैं तो सामग्री से जुड़ा प्रमाण या घोषणा भी मांग सकते हैं.

दूसरा सवाल: मूर्ति पर कौन-सा रंग इस्तेमाल हुआ है?

मूर्ति मिट्टी की हो, लेकिन उस पर केमिकल, ऑयल या चमकीला मेटैलिक पेंट लगा हो तो विसर्जन के बाद रंग पानी में मिल सकता है. इसलिए पूछें कि मूर्ति पर प्राकृतिक, पानी में घुलने वाला या वॉटर-बेस्ड रंग लगाया गया है या नहीं.

मूर्ति पर लगी प्लास्टिक की आंखें, ग्लिटर, थर्माकोल, प्लास्टिक के मोती और तार भी देखें. ये चीजें पानी में नहीं घुलतीं. घर पर विसर्जन करने की योजना है तो कम सजावट और प्राकृतिक रंग वाली मूर्ति ज्यादा सुविधाजनक रहेगी.

प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी गाइडलाइंस में प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल रंगों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती रही है. कई स्थानों पर POP और केमिकल पेंट वाली मूर्तियों के प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन पर रोक या अलग नियम हैं.

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तीसरा सवाल: यह मूर्ति पानी में कितनी देर में घुलेगी?

दुकानदार से पूछें कि मूर्ति का पहले विसर्जन परीक्षण किया गया है या नहीं और सामान्य पानी में इसे गलने में कितना समय लगता है. “दो मिनट में घुल जाएगी” जैसे दावे पर तुरंत विश्वास न करें. मूर्ति का आकार, मिट्टी की मोटाई, पकाने का तरीका और पानी की मात्रा इसके घुलने की रफ्तार बदल सकते हैं.

यह भी पूछें कि क्या इस मूर्ति का घर में बाल्टी, टब या कृत्रिम कुंड में विसर्जन किया जा सकता है. अगर विक्रेता मूर्ति को प्राकृतिक मिट्टी का बता रहा है, लेकिन कृत्रिम विसर्जन के बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा, तो दूसरी दुकान पर सामग्री की तुलना करना बेहतर होगा.

POP की मूर्ति खरीद चुके हैं तो उसे नदी, तालाब या समुद्र में ले जाने से पहले अपने नगर निगम के नियम जरूर देखें. कई शहरों में ऐसी मूर्तियों के लिए कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाए जाते हैं. स्थानीय नियम हर शहर में एक जैसे नहीं हो सकते.

चौथा सवाल: मूर्ति किसने बनाई और कोई रसीद मिलेगी?

इको-फ्रेंडली शब्द अपने आप में सामग्री का प्रमाण नहीं है. दुकानदार से मूर्तिकार या निर्माता का नाम, निर्माण का स्थान और रसीद मांगें. इससे गलत सामग्री निकलने या मूर्ति में टूट-फूट होने पर विक्रेता से बात करना आसान होता है.

अगर दुकान पर प्राकृतिक मिट्टी और POP दोनों प्रकार की मूर्तियां हैं, तो दोनों को अलग-अलग दिखाने के लिए कहें. उनकी सतह, पीछे का हिस्सा और नीचे का आधार देखें. मूर्ति के नीचे कच्ची मिट्टी जैसी परत दिखाई दे सकती है, लेकिन पेंट या कोटिंग होने पर यह तरीका भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं रहता.

क्या मिट्टी की मूर्ति ही धार्मिक रूप से जरूरी है?

हिंदू परंपरा में मिट्टी से पार्थिव प्रतिमा बनाकर पूजा करने की पुरानी परंपरा रही है. मिट्टी से बनी प्रतिमा पंचतत्व और प्रकृति में वापस मिलने के भाव को भी दिखाती है. लेकिन केवल मूर्ति की सामग्री के आधार पर किसी भक्त की श्रद्धा या पूजा को सही-गलत कहना उचित नहीं है.

मूर्ति खरीदते समय सबसे पहले गणपति के स्वरूप की मर्यादा देखें. सूंड, हाथ, पैर और आसन सही बने हों. मूर्ति टूटी या चटकी न हो और उसका आकार घर में उपलब्ध स्थान तथा विसर्जन की व्यवस्था के अनुसार हो.

सबसे सस्ती या सबसे चमकदार मूर्ति चुनने के बजाय ऐसी प्रतिमा लें जिसके बारे में विक्रेता सामग्री, रंग और विसर्जन से जुड़े सवालों का साफ जवाब दे सके. बप्पा को घर लाना केवल खरीदारी नहीं, जिम्मेदारी भी है. श्रद्धा से की गई पूजा तभी और सुंदर बनेगी, जब उत्सव के बाद पानी और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे.

FAQ

क्या वजन से मिट्टी और POP की मूर्ति पहचान सकते हैं?
नहीं. मूर्ति का आकार, नमी और खोखली बनावट वजन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए वजन अकेला पक्का प्रमाण नहीं है.

शाडू माटी की गणपति मूर्ति क्या होती है?
शाडू माटी महीन प्राकृतिक चिकनी मिट्टी होती है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक मूर्तियां बनाने में किया जाता है.

क्या POP की गणपति मूर्ति घर में विसर्जित कर सकते हैं?
POP पानी में आसानी से नहीं घुलता. ऐसी मूर्ति के विसर्जन के लिए नगर निगम के कृत्रिम कुंड और स्थानीय नियमों का पालन करना चाहिए.

इको-फ्रेंडली गणपति खरीदते समय क्या देखें?
मूर्ति की सामग्री, इस्तेमाल किए गए रंग, प्लास्टिक या थर्माकोल की सजावट और विक्रेता की रसीद या घोषणा देखें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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