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हार्ट अटैक से कितना अलग होता है कार्डियक अरेस्ट, वेदांता चीफ के बेटे की इसी से हुई मौत 

कार्डियक अरेस्ट में एक इलेक्ट्रिकल फेल्योर होता है जो कि दिल में नेचुरल पेसमेकर होता है जो कि बिजली के सिग्नल भेजता है, जब ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल अचानक बिगड़ जाते हैं या पूरी तरह रुक जाते हैं.

वेदांता ग्रुप के चीफ अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की अमेरिका में मौत हो गई है. 49 साल की उम्र में अग्निवेश अग्रवाल की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई. रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे के बाद अग्निवेश अग्रवाल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था.  वहीं इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा था, लेकिन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जान ले ली.

इस घटना के बाद एक बार फिर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की चर्चा तेज हो गई है. आमतौर पर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन असल में मेडिकल सेक्टर में ये दोनों बिल्कुल अलग कंडीशन होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से कितना अलग होता है. 

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट दिल से जुड़ा एक इलेक्ट्रिकल फेल्योर होता है, जो कि दिल में नेचुरल पेसमेकर होता है जो कि बिजली के सिग्नल भेजता है, जब ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल अचानक बिगड़ जाते हैं या पूरी तरह रुक जाते हैं, तो दिल धड़कना बंद कर देता है. ऐसे में व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है और सांस भी रुक सकती है. इसी वजह से इसे सडन कार्डियक भी अरेस्ट कहा जाता है.

हार्ट अटैक से कैसे अलग है कार्डियक अरेस्ट?

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हार्ट अटैक में दिल तक पहुंचने वाले खून के रास्ते में रुकावट आ जाती है. यानी दिल को पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं मिलती, लेकिन दिल धड़कता रहता है और मरीज अक्सर होश में रहता है. वहीं कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन चलाने वाले इलेक्ट्रिकल इम्पल्स ही बंद हो जाते हैं, जिससे दिल पूरी तरह रुक जाता है. इसमें मरीज कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है और तुरंत इलाज न मिलने पर जान का खतरा बहुत ज्यादा होता है.

कार्डियक अरेस्ट क्यों आता है?

डॉक्टरों के अनुसार कार्डियक अरेस्ट हमेशा पहले से दिल की बीमारी होने की वजह से नहीं आता. यह अचानक भी हो सकता है. कई बार कार्डियक अरेस्ट दिल की धड़कन का असामान्य हो जाने की वजह से भी आ सकता है, जिसे एरिथमिया कहते हैं. वहीं वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, जिसमें दिल का निचला हिस्सा खून पंप करने की बजाय कांपने लगता है इससे भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी के चलते भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. इनके अलावा दिल की नसों में रुकावट या लंबे समय से चल रही कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. 

रिकवरी में क्यों बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा?

किसी बड़े हादसे या सर्जरी के बाद शरीर पहले से कमजोर होता है. ऐसे में खून की कमी, ऑक्सीजन लेवल गिरना, छाती पर चोट या ज्यादा तनाव दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है. यही वजह होती है कि कई बार हॉस्पिटल में इलाज के दौरान भी कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है. वहीं कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों में अचानक चक्कर आना या बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन बहुत तेज या अनियमित होना, सीने में दर्द और कमजोरी  जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. 

ये भी पढ़ें-Cardiac Health: ECG की नॉर्मल रिपोर्ट के भरोसे बैठे हैं तो हो जाएं सावधान, ध्यान नहीं दिया तो कभी भी आ सकती है मौत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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