भारत का ही आईलैंड और भारतीयों के जाने पर सख्त पाबंदी, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड जो कि अंडमान एंड निकोबार आइलैंड का हिस्सा यहां भारतीयों के जाने पर पाबंदी है. दरअसल बंगाल की खाड़ी में स्थित यह द्वीप भारत के सबसे प्रतिबंधित इलाकों में गिना जाता है.

भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां के नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में आने जाने की आजादी है. लोग नौकरी, बिजनेस या घूमने के पर्पस से देशभर में सफर करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही एक ऐसी जगह है, जहां भारतीयों समेत किसी भी व्यक्ति के जाने पर सख्त प्रतिबंध है. इस जगह पर जाने की कोशिश न सिर्फ गैर कानूनी है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि भारत का ही आइलैंड और भारतीयों के जाने पर सख्त पाबंदी कहां है?
किस आईलैंड पर भारतीयों को जानने पर है प्रतिबंध?
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड जो कि अंडमान एंड निकोबार आइलैंड का हिस्सा यहां भारतीयों के जाने पर पाबंदी है. दरअसल बंगाल की खाड़ी में स्थित यह द्वीप भारत के सबसे प्रतिबंधित इलाकों में गिना जाता है. यहां किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक है. सरकार ने अंडमान और निकोबार अधिनियम 1956 के तहत इस इलाके को संरक्षित घोषित किया है. इस अधिनियम के तहत इस द्वीप और इसके आसपास करीब 5 से 9 किलोमीटर के दायरे में किसी भी बाहरी व्यक्ति का जाना प्रतिबंधित है. इस क्षेत्र की निगरानी भारतीय नौसेना और तटरक्षक बलों की ओर से की जाती है. वहीं नियम तोड़ने पर गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.
क्यों लगाया गया है प्रतिबंध?
इस आईलैंड पर सेंटिनली जनजाति के लोग रहते हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे अलग-थलग और संवेदनशील जनजातियों में गिना जाता है. माना जाता है कि यह समुदाय हजारों वर्षों से बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ है. वहीं बताया जाता है कि जब भी किसी बाहरी व्यक्ति ने इस आईलैंड के करीब जाने की कोशिश की उस पर तीर-भालों से हमला किया गया. साल 2006 में दो मछुआरे गलती से आईलैंड के पास पहुंच गए, जिनकी हत्या कर दी गई थी. वहीं 2008 में एक अमेरिकी नागरिक की भी यहां जान चली गई थी, जब उसने जनजाति से काॅन्टेक्ट करने की कोशिश की थी. इसके अलावा हाल ही में एक 24 वर्षीय अमेरिकी नागरिक को आईलैंड के पास जाने पर गिरफ्तार किया गया. वह नागरिक पोर्ट ब्लेयर पहुंचा था और इसके बाद कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की.
सुरक्षा और जनजातीय संरक्षण का मामला
इस आईलैंड पर पाबंदी केवल बाहरी लोगों की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि सेंटिनली जनजाति के संरक्षण के लिए भी लगाई गई है. एक्सपर्ट्स के अनुसार इस समुदाय में आधुनिक बीमारियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम है. वहीं बाहरी संपर्क के साधारण संक्रमण भी उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है. इसके अलावा आसमान से देखने पर यह आईलैंड हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता से भरा नजर आता है, लेकिन इसके अंदर रह रही जनजाति बाहरी हस्तक्षेप को बिल्कुल स्वीकार नहीं करती है. यही वजह है कि सरकार ने इस क्षेत्र को पूरी तरह सील कर रखा है.
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