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कम पानी और नाममात्र खर्च में होगी बंपर सिंचाई, सिंचाई की इस तकनीक पर सरकार दे रही भारी सब्सिडी

Irrigation Subsidy From Government: पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले स्प्रिंकलर और ड्रिप तकनीक से कम पानी में दोगुनी सिंचाई है. सरकार भी इसके लिए देती है सब्सिडी. जान लें पूरी खबर.

Irrigation Subsidy From Government: आज के समय में खेती-किसानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी की कमी और सिंचाई पर होने वाला भारी खर्च है. पारंपरिक तरीके से सिंचाई करने पर न सिर्फ पानी की बर्बादी होती है, बल्कि डीजल और बिजली का बिल भी जेब खाली कर देता है. इसी समस्या का परमानेंट इलाज है स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई तकनीक. आधुनिक खेती के ये दो ऐसे नायाब तरीके हैं, जो कम से कम पानी में भी फसलों की शानदार और बंपर सिंचाई कर देते हैं. 

सबसे अच्छी बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को भारी सब्सिडी दे रही हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि आपका शुरुआती खर्च बेहद नाममात्र का रह जाता है और लंबे समय के लिए सिंचाई की टेंशन पूरी तरह खत्म हो जाती है. इस तकनीक को अपनाकर किसान न सिर्फ पानी की बचत कर रहे हैं, बल्कि अपनी फसलों की क्वालिटी और पैदावार को भी कई गुना बढ़ा रहे हैं.

क्या है ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक?

आधुनिक खेती में सिंचाई के इन दोनों तरीकों को सबसे बेस्ट माना जाता है. ड्रिप इरिगेशन तकनीक में पाइपों का एक नेटवर्क सीधे पौधों की जड़ों तक बिछाया जाता है. इन पाइपों में छोटे-छोटे ड्रिपर्स लगे होते हैं, जिनसे बूंद-बूंद करके पानी सीधा पौधों की जड़ों में गिरता है. इससे पानी का एक कतरा भी बर्बाद नहीं होता. दूसरी तरफ स्प्रिंकलर यानी फुहारा सिंचाई तकनीक में पाइपों के ऊपर नोजल लगाए जाते हैं.

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ऐसे काम करती है यह तकनीक

जो पानी को हवा में बिल्कुल प्राकृतिक बारिश की तरह छिड़कते हैं. ड्रिप सिस्टम उन फसलों के लिए बेस्ट है जो कतारों में उगाई जाती हैं. जैसे सब्जियां और बागवानी वहीं स्प्रिंकलर सिस्टम गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों के लिए वरदान साबित हो रहा है. ये दोनों ही तरीके उबड़-खाबड़ जमीनों पर भी समान रूप से बेहतरीन सिंचाई करने में पूरी तरह सक्षम हैं.

सरकारी सब्सिडी का फायदा 

सरकार चाहती है कि देश का हर किसान इस मॉडर्न टेक्नोलॉजी से जुड़े इसलिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम लगाने पर भारी सब्सिडी दी जा रही है. अलग-अलग राज्यों और किसानों की कैटेगरी के हिसाब से यह सब्सिडी 50% से लेकर 90% तक हो सकती है. इसका लाभ लेने के लिए किसान भाई अपने जिले के कृषि विभाग या उद्यान विभाग के ऑफिस में जाकर या उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. 

दी जाती है ट्रेनिंग

इसके साथ ही किसानों को इस सिस्टम को सही तरीके से ऑपरेट करने और इसकी देखरेख के लिए सरकार की तरफ से फ्री ट्रेनिंग भी दी जाती है. इस ट्रेनिंग में एक्सपर्ट्स सिखाते हैं कि किस फसल को कब और कितना पानी देना है. जिससे आप कम लागत में सबसे बेहतरीन मुनाफा कमा सकें.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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