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Extinct Birds: आसमान में अब क्यों नहीं नजर आती चिड़ियां, जानें कौन-कौन से पक्षी हो चुके हैं विलुप्त?

Extinct Birds: दुनिया में पक्षी धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • आधुनिक इमारतों में घोंसले के लिए जगह की कमी हो रही है।

Extinct Birds: शहरों, गांवों और जंगलों से पक्षियों का धीरे-धीरे लुप्त होना विश्व भर में एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बनता जा रहा है. वैज्ञानिक और वन्य जीव विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि शहरीकरण, जंगलों की कटाई, प्रदूषण, बदलती जीवन शैली और रसायनों के काफी ज्यादा इस्तेमाल से पक्षियों की आबादी पर खतरनाक रूप से असर पड़ रहा है. कई प्रजातियां जो कभी आसमान में काफी ज्यादा संख्या में उड़ती हुई नजर आती थी अब या तो दुर्लभ हो चुकी हैं या फिर हमेशा के लिए विलुप्त हो गई हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक मानव इतिहास में अब तक 1400 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं.

शहरीकरण प्राकृतिक आवासों को नष्ट कर रहा 

पक्षियों की घटती आबादी की वजह आवासों का विनाश है. जैसे-जैसे शहर फैल‌ रहे हैं और सड़कों, इमारतों और उद्योगों के लिए जंगलों को साफ किया जा रहा है पक्षी अपने घोंसले बनाने और आश्रय पाने के लिए पेड़ों और प्राकृतिक स्थान को खोते जा रहे हैं. कंक्रीट की संरचनाएं धीरे-धीरे उन हरे-भरे जंगलों की जगह ले रही हैं जो कभी पक्षियों के जीवन का आधार थे.

मोबाइल टावर और रेडिएशन से खतरा 

ऐसा भी माना जाता है कि मोबाइल टावर से निकलने वाला विद्युत चुंबकीय विकिरण पक्षियों, खासतौर से गौरैया जैसी छोटी प्रजातियों को काफी प्रभावित कर सकता है. वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि पक्षी प्राकृतिक दिशा निर्देश प्रणाली पर काफी ज्यादा निर्भर करते हैं. काफी ज्यादा रेडिएशन उनकी रफ्तार, दिशा निर्धारण और संचार के तरीकों में बाधा डाल सकता है. हालांकि इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर शोध अभी भी जारी है. 

कीटनाशक उनके भोजन स्रोतों को कम कर रहे 

कीटनाशकों के भारी इस्तेमाल वाली आधुनिक कृषि भी पक्षियों की आबादी को नुकसान पहुंचा रही है. फसलों पर छिड़के जाने वाले रसायन उन कीड़ों और केंचुओं को मार देते हैं जो पक्षियों और उनके बच्चों के लिए जरूरी भोजन स्रोत होते हैं. कीड़ों की आबादी घटने के साथ कई पक्षी प्रजातियों को जिंदा रहने और प्रजनन करने में कठिनाई हो रही है.

घोसलों के लिए जगह नहीं 

पुराने घरों में अक्सर खुली जगह, वेंटीलेशन, छतें और छोटे-छोटे छेद होते थे. यहां पक्षी आसानी से घोंसला बना सकते थे. आधुनिक कांच की इमारतें और सीलबंद अपार्टमेंट संरचनाएं घोसला बनाने के लिए काफी कम जगह देती हैं. इस वजह से पक्षियों के लिए शहरी वातावरण में रहना काफी मुश्किल हो जाता है. 

कई प्रजातियां पहले ही विलुप्त हो चुकी हैं 

विलुप्त हो चुके सबसे मशहूर पक्षियों में से एक डोडो है. यह मनुष्य द्वारा किए गए काफी ज्यादा शिकार की वजह से 17वीं शताब्दी में ही विलुप्त हो गया था. इसी के साथ पैसेंजर पिजन कभी उत्तरी अमेरिका में अरबों की संख्या में मौजूद थे. लेकिन उनका इतना ज्यादा शिकार किया गया कि 1914 तक यह प्रजाति पूरी तरह से विलुप्त हो गई.  ग्रेट ऑक का भी उसके पंखों और अंडों के लिए बड़े पैमाने पर शिकार किया गया. इस वजह से वह 19वीं शताब्दी के दौरान हमेशा के लिए विलुप्त हो गया. 

काउई अकियालोआ अपने पर्यावास के विनाश और एवियन पॉक्स जैसी बीमारियों की वजह से विलुप्त हो गया. इसी तरह जंगलों की कटाई और बिल्लियों व चूहों जैसे बाहरी शिकारी जीवों के आने के बाद लाफिंग आउल भी विलुप्त हो गया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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