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पुरानी इमारतों से क्यों आती हैं डरावनी आवाजें, भूत-प्रेत या विज्ञान; आखिर क्या है इसका रहस्य?
पुरानी और वीरान इमारतों में महसूस होने वाले भूतिया अनुभवों के पीछे असल में कोई भूत नहीं होता. ये अदृश्य ध्वनि तरंगें इंसानी शरीर में अचानक भारी तनाव, घबराहट और डरावना भ्रम पैदा कर देती हैं.
अक्सर फिल्मों या कहानियों में दिखाया जाता है कि किसी पुरानी हवेली, बंद पड़े महल या वीरान खंडहर में कदम रखते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. हवा में एक अजीब सी सरसराहट, अचानक दिल की धड़कन बढ़ जाना और किसी अनदेखी परछाई के आसपास होने का अहसास लोगों को डरा देता है. सदियों से लोग इन अनुभवों को भूत-प्रेत, आत्माओं या अलौकिक शक्तियों का प्रकोप मानते आए हैं. लेकिन आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिकों की हालिया रिसर्च ने इस सदियों पुराने डरावने रहस्य से पर्दा उठा दिया है. विज्ञान के मुताबिक, इन भुतहा अनुभवों के पीछे कोई रूह नहीं, बल्कि एक खास तरह की अदृश्य आवाज जिम्मेदार होती है.
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वैज्ञानिकों ने डरावनी और वीरान जगहों पर जाकर गहन अध्ययन किया और पाया कि पुराने भवनों में मौजूद इन्फ्रासाउंड ही लोगों को डराता है. इन्फ्रासाउंड असल में बेहद कम आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) वाली ध्वनि तरंगें होती हैं, जो लगभग 20 हर्ट्ज से भी नीचे के स्तर पर काम करती हैं.
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इंसानी कान इतनी कम फ्रीक्वेंसी की आवाजों को सीधे तौर पर सुनने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि भले ही हमारा कान इन्हें सुन न पाए, लेकिन हमारा शरीर और दिमाग इन तरंगों के असर को बहुत गहराई से महसूस करता है.
Published at : 03 Jun 2026 08:36 AM (IST)
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