सुब्रत रॉय तो रहे नहीं अब कौन लौटा रहा जनता का पैसा, कैसे मिल रहा सहारा का रिफंड?
सुब्रत रॉय के निधन के बाद सहकारिता मंत्रालय ने सहारा-सेबी फंड से 42 लाख से अधिक निवेशकों को 9,267 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में रिफंड किए हैं. CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल से मिल रहा रिफंड.

सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय के निधन के बाद करोड़ों निवेशकों के मन में यह सबसे बड़ा सवाल घूम रहा है कि अब उनका डूबा हुआ पैसा कौन लौटा रहा है. जब तक सुब्रत रॉय जीवित थे, सहारा समूह की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, लेकिन उनके जाने के बाद कंपनी का ढांचा पूरी तरह बदल चुका है. ऐसे में आम जनता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस समय सहारा का रिफंड कौन सी संस्था दे रही है और पैसों की वापसी का कानूनी कंट्रोल किसके हाथ में है.
सुब्रत रॉय के बाद सहारा की कमान किसके पास?
सुब्रत रॉय के निधन के बाद उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय और दोनों बेटे सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय ही सहारा इंडिया परिवार का कामकाज संभाल रहे हैं. कंपनी की तरफ से यह भी कहा गया था कि संगठन सुब्रत रॉय की सोच और विरासत को आगे बढ़ाता रहेगा. हालांकि निवेशकों को पैसा लौटाने का मामला सिर्फ सहारा परिवार के हाथ में नहीं है, क्योंकि यह मामला सालों पहले ही अदालत और सरकार के हाथों में जा चुका था.
अब रिफंड की जिम्मेदारी किसके पास है?
निवेशकों का पैसा लौटाने की असली जिम्मेदारी अब सहकारिता मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम कर रही एजेंसियों के पास है. जुलाई 2023 में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत की थी. सीआरसीएस यानी सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज, सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाली वही संस्था है, जो सहारा समूह की चार सहकारी समितियों की निगरानी करती है. यही संस्था अब निवेशकों के दावों की जांच करके उन्हें सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में पैसा भेजने का काम कर रही है.
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सुप्रीम कोर्ट और सेबी की भूमिका
इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट खुद कर रहा है. कोर्ट के आदेश पर ही सेबी के पास मौजूद सहारा-सेबी रिफंड खाते से पैसा निकालकर सीआरसीएस को ट्रांसफर किया गया, ताकि यह रकम आम निवेशकों तक पहुंचाई जा सके. शुरुआत में कोर्ट ने 5,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. यानी अब सहारा समूह या सुब्रत रॉय के परिवार का इस पैसे पर सीधा नियंत्रण नहीं है, बल्कि यह पूरी रकम कोर्ट, सेबी और सरकार के संयुक्त निगरानी तंत्र के जरिए ही निवेशकों तक पहुंचाई जा रही है.
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