Uniform Civil Code 2026: कितनी पीढ़ी के रिश्तेदारों तक माना जाता है ब्लड रिलेशन, यह कैसे होता है तय
Uniform Civil Code 2026: मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 में ब्लड रिलेशन में शादी को प्रतिबंध कर दिया गया है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

- मध्य प्रदेश UCC ड्राफ्ट ब्लड रिलेशन शादी पर रोक लगाता है।
- भारतीय कानून सपिंड संबंध के आधार पर ऐसी शादी प्रतिबंधित करता है।
- वैज्ञानिक रूप से, साझा DNA सातवीं पीढ़ी तक काफी कम हो जाता है।
Uniform Civil Code 2026: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 के ड्राफ्ट ने शादी में ब्लड रिलेशनशिप के कॉन्सेप्ट पर फिर से चर्चा को शुरू कर दिया है. यह ड्राफ्ट उन लोगों के बीच शादी पर रोक लगाता है जो निषिद्ध रिश्तों की श्रेणी में आते हैं. इसमें माता-पिता, दादा दादी, नाना नानी और परिवार के दूसरे करीबी सदस्य जैसे करीबी खून के रिश्ते शामिल हैं.
भारतीय कानून में ब्लड रिलेशनशिप की परिभाषा
भारतीय कानून और पारंपरिक हिंदू न्याय शास्त्र में ब्लड रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट सपिंड संबंध के विचार पर आधारित है. यह हिंदू विवाह अधिनियम में भी दिखता है. इन पाबंदियों का मकसद ऐसे लोगों के बीच शादी को रोकना है जिनकी पूर्वजों की वंशावली एक ही है.
इस ढांचे के तहत परिवार के पिता और माता दोनों पक्षों से ब्लड रिलेशनशिप का पता अलग-अलग तरीके से लगाया जाता है. पिता की तरफ रिश्ता आमतौर पर पांच पीढ़ियों तक माना जाता है और मां की तरफ यह तीन पीढ़ियों तक का होता है. जो लोग इन तय सीमाओं के दायरे में आते हैं उन्हें शादी के लिए निषिद्ध रिश्ता माना जाता है. जब तक कि कोई लागू रीति-रिवाज इसकी इजाजत न दे.
ब्लड रिलेशनशिप का वैज्ञानिक आधार
जेनेटिक नजरिया से ब्लड रिलेशनशिप का पता दो लोगों के बीच साझा डीएनए की मात्रा से चलता है. हर पीढ़ी के साथ साझा जेनेटिक मटेरियल का प्रतिशत लगभग आधा हो जाता है. माता-पिता और बच्चों के जीन लगभग 50% समान होते हैं. दादा-दादी, नाना-नानी और पोते-पोती, नाती-नातिन के बीच जेनेटिक समानता लगभग 25% की होती है. इसी के साथ परदादा-परदादी, परनाना-परनानी और परपोते-परपोतियां, परनातिन-परनातिनों के बीच यह लगभग 12.5% होती है.
जैसे-जैसे परिवार का दायरा बढ़ता है जेनेटिक कनेक्शन कम होता जाता है. चौथी, पांचवी, छठी और सातवीं पीढ़ी तक साझा डीएनए का अनुपात लगातार कम होता रहता है और सातवीं पीढ़ी तक आते-आते यह लगभग 1.56% रह जाता है.
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सातवीं पीढ़ी के बाद क्या होता है?
वैज्ञानिक आमतौर पर सातवीं पीढ़ी के बाद जेनेटिक समानता को काफी कम मानते हैं. आठवीं पीढ़ी तक साझा डीएनए एक प्रतिशत से भी कम हो जाता है जिस वजह से जेनेटिक नजरिए से बायोलॉजिकल रिश्ता ना के बराबर रह जाता है.
पीढ़ियों की गिनती कैसे होती है?
पीढ़ियों की गिनती किसी एक व्यक्ति को शुरुआती बिंदु मानकर की जाती है. फैमिली ट्री में ऊपर की तरफ बढ़ने पर माता-पिता को एक पीढ़ी ऊपर दादा-दादी/नाना-नानी को दूसरी पीढ़ी और परदादा-परदादी/ परनाना-परनानी को तीसरी पीढ़ी माना जाता है. यही नियम नीचे की तरफ भी लागू होता है.
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