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Monsoon Session 2026: डीलिमिटेशन बिल के सपोर्ट में कौन-कौन सी पार्टियां, कौन विरोध में... किसने नहीं खोले पत्ते?

Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस सत्र में सरकार फिर से डीलिमिटेशन बिल ला सकती है. चलिए जानें कि इसके पक्ष-विपक्ष में कौन-कौन है.

Monsoon Session 2026: आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है. लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के जोरदार हंगाने के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है. इस बार सत्र का केंद्र बिंदु डीलिमिटेशन बिल बना हुआ है. दरअसल बजट सत्र में 54 वोटों से पिछड़ने के बाद केंद्र सरकार दोबारा से इस विधेयक को संसद में पेश कर सकती है. यह विधेयक देश के सभी राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए सिरे से पुनर्गठन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. आइए जानें कि इसके सपोर्ट में कौन सी पार्टियां हैं, कौन विरोध में हैं और किसने अभी तक इस बारे में कोई बात साफ तौर पर नहीं कही है.

क्या है परिसीमन कानून?

परिसीमन बिल यानी डीलिमिटेशन बिल एक ऐसा महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रस्ताव है, जिसका सीधा मकसद देश में चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा से तय करना है. इस कानून के लागू होने के बाद लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 550 से बढ़ाकर 850 तक पहुंच जाएगी. यह पूरा पुनर्गठन साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर किया जा रहा है. इसके साथ ही इस बिल को 33% महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि नई सीमाएं तय होने के बाद संसद में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.

डीलिमिटेशन बिल के समर्थन में कौन सी पार्टियां?

इस बिल को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार पूरी ताकत लगा रही है. भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए में शामिल सभी सहयोगी पार्टियां पूरी तरह से इस बिल के समर्थन में खड़ी हैं. सत्ता पक्ष का तर्क है कि बढ़ती हुआ आबादी के हिसाब से चुनावी क्षेत्रों का पुनर्गठन बेहद जरूरी है, ताकि हर नागरिक को सही लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मिल सके. सरकार का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ने से बड़े राज्यों के दूर-दराज के इलाकों का तेजी से विकास होगा और चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व मजबूत बनेगी.

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डीलिमिटेशन बिल के विपक्ष में कौन-कौन?

दूसरी ओर विपक्षी खेमे ने इस विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है. दक्षिण भारतीय राज्यों का मानना है कि उन्होंने अपने राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण को बेहद ईमानदारी से लागू किया है. अब केवल आबादी को आधार बनाकर सीटें बढ़ाने से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों का राजनीतिक प्रभाव केंद्र में घट जाएगा. विपक्ष इसे राज्यों के साथ बड़ा अन्याय बता रहा है.

किन पार्टियों ने अब तक नहीं खोले पत्ते?

सदन में कई ऐसी क्षेत्रीय पार्टियां भी हैं, जिन्होंने अब तक इस संवेदनशील मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. शरद पवार की एनसीपी, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और जम्मू कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेस जैसी पार्टियों ने अपना अंतिम रुख साफ नहीं किया है.

डीलिमिटेशन बिल पास कराने के लिए सरकार को कितने बहुमत की जरूरत?

डीलिमिटेशन बिल को पास कराने के लिए सरकार को संसद में दो तिहाई बहुमत की जरूरत है, क्योंकि इसके लिए संविधान में बड़ा संशोधन करना पड़ेगा अगर यह बिल पास हो जाता है तो देश का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह से बदल जाएगा. बड़े राज्यों की सीटों में भारी इजाफा होगा और महिला प्रतिनिधियों की संख्या भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचेगी.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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