एक्सप्लोरर

Bullet Train Track Technology: आकार लेने लगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, क्यों अलग होती है इनकी पटरियां

भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, पत्थरों वाली पटरियों के बजाय जापानी स्लैब ट्रैक सिस्टम का हो रहा है इस्तेमाल, जानिए तेज रफ्तार और सुरक्षा के लिए कैसे तैयार हो रहा है यह ट्रैक.

Bullet Train Track Technology: भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना अब धरातल पर तेजी से आकार लेने लगी है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे इस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम 62 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है और ट्रैक बिछाने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. इस बड़ी प्रगति के बीच अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब देश में पहले से ही लाखों किलोमीटर पटरियों का जाल बिछा है, तो बुलेट ट्रेन के लिए अलग से ट्रैक क्यों तैयार किए जा रहे हैं. आखिर सामान्य रेलवे ट्रैक और बुलेट ट्रेन के ट्रैक में क्या अंतर होता है. 

पटरियों के नीचे नहीं होंगे पत्थर 

भारतीय रेलवे के सामान्य ट्रैकों पर आपने हमेशा पटरियों के बीच और नीचे ढेर सारे छोटे-छोटे नुकीले पत्थर बिखरे देखे होंगे, जिन्हें इजीनियरिंग की भाषा में बैलास्ट कहा जाता है. सामान्य ट्रेन जब 100 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, तो ये पत्थर ट्रेन का वजन झेलते हैं और स्थिरता बनाए रखते हैं. 

लेकिन बुलेट ट्रेन के मामले में ऐसा नहीं होता. जब बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती है, तो पटरियों और ट्रेन के निचले हिस्से के बीच हवा का भयंकर दबाव बनता है. इतनी तेज हवा में अगर नीचे पत्थर होंगे, तो वे किसी बंदूक की गोली की तरह उड़कर ट्रेन के निचले हिस्से और संवेदनशील इलेक्ट्रोनिक उपकरणों से टकरा सकते हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है. यही वजह है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए बैलास्टलैस ट्रैक तैयार किया जा रहा है.

जापानी तकनीक से बना जै-स्लैब सिस्टम

भारत में पहली बात जापान की विश्वप्रसिद्ध शिनकानसेन बुलेट ट्रेन तकनीक के आधार पर जे-स्लैब ट्रैक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह ट्रैक मुख्य रूप से चार परतों से मिलकर बना है. इसमें सबसे नीचे आरसी ट्रैक बेड होता है, जिसके ऊपर सीमेंट डामर मोर्टार की एक विशेष परत चढ़ाई जाती है.

इसके ऊपर कंक्रीट से बने प्री-कास्ट ट्रैक स्लैब रखे जाते हैं और फिर बेहद मजबूत फास्टनिंग डिवाइस की मदद से पटरियों को कस दिया जाता है. यह ठोस ढांचा ट्रेन को 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर भी जबरदस्त स्थिरता और सुरक्षा देता है. 

यह भी पढ़ें: Delhi Business Figures: दिल्ली में रोज कितने करोड़ का कारोबार होता है, विपक्ष की रैली के बीच जानें जवाब

पटरियों के बीच नहीं होता कोई गैप 

आपने अक्सर सामान्य ट्रेनों में सफर करते समय पटरियों से आने वाली ठक-ठक की आवाज सुनी होगी. दरअसल, लोहे की पटरियों के बीच थोड़ा सा गैप छोड़ा जाता है ताकि गर्मियों में तापमान बढ़ने पर जब लोहा फैले, तो पटरियां टेढ़ी न हों. लेकिन बुलेट ट्रेन के ट्रैक में पटरियों के टुकड़ों को एडवांस वेल्डिंग मशीन के जरिए आपस में इस तरह जोड़ दिया जाता है कि पूरे ट्रैक पर कहीं कोई गैप नहीं बचता. गैप न होने से ट्रेन बिना किसी कंपन या आवाज के मक्खन की तरह बेहद सुरक्षित गति से दौड़ पाती है.

यह भी पढ़ें: INDIA Bloc Rally: दिल्ली के रामलीला मैदान पर अब तक कौन-कौन से आंदोलन हुए, क्या है इतिहास?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Flight Luggage Weight Limit: क्या ज्यादा सामान रखने से जहाज को उड़ने में दिक्कत होती है, क्यों तय है वजन की सीमा?
क्या ज्यादा सामान रखने से जहाज को उड़ने में दिक्कत होती है, क्यों तय है वजन की सीमा?
Fireworks Shapes Science: कैसे पटाखों से आसमान में बनती हैं आकृतियां, कौन सी तकनीक का होता है इस्तेमाल?
कैसे पटाखों से आसमान में बनती हैं आकृतियां, कौन सी तकनीक का होता है इस्तेमाल?
Ramlila Maidan Booking: क्या आम आदमी भी बुक कर सकता है रामलीला ग्राउंड, इसके लिए कितना खर्चा?
क्या आम आदमी भी बुक कर सकता है रामलीला ग्राउंड, इसके लिए कितना खर्चा?
Right To Protest: भारत में प्रदर्शन करने का अधिकार किस मौलिक अधिकार से मिलता है, जानें संविधान?
भारत में प्रदर्शन करने का अधिकार किस मौलिक अधिकार से मिलता है, जानें संविधान?
Advertisement

वीडियोज

ABP News: REEL का जुनून... मौत को चैलेंज ! | Sansani
Jan Mahabhiyog Programme: अभी-अभी 'जन महाभियोग'पर आई बड़ी खबर! | Rahul Gandhi | Congress | ABP
Jan Mahabhiyog Programme: जन महाभियोग में क्या-क्या हुआ? पूरी कहानी | Rahul Gandhi | BJP | Gyanesh
Jan Mahabhiyog Programme: जन-महाभियोग-रैली..खतरे में ज्ञानेश की कुर्सी? | Rahul Gandhi | Congress
Sandeep Chaudhary: 'ज्ञानेश हटाओ'...लोकतंत्र बचाओ या राजनीति चमकाओ? | Jan Mahabhiyog | Congress
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
रामलीला मैदान में रैली के बाद क्या है विपक्ष का प्लान? मिले संकेत
रामलीला मैदान में रैली के बाद क्या है विपक्ष का प्लान? मिले संकेत
देश का नंबर-1 मुख्यमंत्री कौन? सर्वे में इस CM का आया नाम
देश का नंबर-1 मुख्यमंत्री कौन? सर्वे में इस CM का आया नाम
1984 के सिख नरसंहार पर शशि थरूर का बयान, 'गहरा अफसोस है लेकिन अब...'
1984 के सिख नरसंहार पर शशि थरूर का बयान, 'गहरा अफसोस है लेकिन अब...'
'शिकारी बनें, शिकार नहीं', भारत के खिलाफ 341 रन बनाने के बाद ग्लेन फिलिप्स का बयान वायरल
'शिकारी बनें, शिकार नहीं', भारत के खिलाफ 341 रन बनाने के बाद ग्लेन फिलिप्स का बयान वायरल
'रामायणम्' की कमाई 36 करोड़ के पार, बनी रणबीर कपूर की दूसरी हाईएस्ट ओपनर
'रामायणम्' की कमाई 36 करोड़ के पार, बनी रणबीर कपूर की दूसरी हाईएस्ट ओपनर
ट्राइसाइकिल के लिए पति को पीठ पर टांग कलेक्टोरेट पहुंची महिला, वीडियो वायरल
ट्राइसाइकिल के लिए पति को पीठ पर टांग कलेक्टोरेट पहुंची महिला, वीडियो वायरल
'ये हिंदुस्तान आपके अब्बूजान का नहीं', राहुल गांधी पर BJP का पलटवार, रैली को बताया फ्लॉप शो
'ये हिंदुस्तान आपके अब्बूजान का नहीं', राहुल गांधी पर BJP का पलटवार, रैली को बताया फ्लॉप शो
कैसे काम करता है ड्रम ब्रेक और डिस्क ब्रेक, समझें दोनों का मैकेनिज्म
कैसे काम करता है ड्रम ब्रेक और डिस्क ब्रेक, समझें दोनों का मैकेनिज्म
Embed widget