Right To Protest: भारत में प्रदर्शन करने का अधिकार किस मौलिक अधिकार से मिलता है, जानें संविधान?
Right To Protest: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध और सभा करने का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए पुलिस से पहले एनओसी लेना और कानून व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है.

Right To Protest: देश की राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान आज विपक्ष के बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का गवाह बना है. चुनाव आयोग की नीतियों, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए INDIA गठबंधन के तमाम बड़े नेता मैदान में एकजुट हुए हैं. राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी समेत कई शीर्ष नेता एक ही बस में सवार होकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी बढ़ गई है. इस विशाल जमावड़े के बीच देश भर में यह बहस तेज हो गई है कि आखिर भारतीय नागरिकों को सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहने या विरोध दर्ज कराने की ताकत देश का कानून और संविधान किस तरह प्रदान करता है.
संविधान से मिला प्रदर्शन का मौलिक हक
भारत का संविधान अपने देशवासियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने विचारों को व्यक्त करने की पूरी आजादी देता है. यह अधिकार नागरिकों को संविधान के भाग 3 में शामिल मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 19 के माध्यम से प्राप्त होता है. इसी धारा के तहत देश के हर नागरिक को सरकार की नीतियों पर अपनी असहमति जताने, रैलियां निकालने और जनसभाएं आयोजित करने का सीधा संवैधानिक संरक्षण मिला हुआ है.
अनुच्छेद 19 के प्रमुख तीन कानूनी स्तंभ
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को विरोध दर्ज कराने के लिए मुख्य रूप से तीन हिस्सों में मजबूत अधिकार प्रदान करता है:
1. वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत हर नागरिक को अपनी बात बोलने, लिखने या माध्यमों के जरिए विचारों को प्रकट करने की छूट मिलती है.
2. शांतिपूर्ण सभा का अधिकार: अनुच्छेद 19(1)(ख) लोगों को बिना किसी हथियार के सार्वजनिक स्थानों पर शांतिपूर्वक तरीके से इकट्ठा होने और सभा करने की गारंटी देता है.
3. संगठन बनाने की आजादी: अनुच्छेद 19(1)(ग) के अंतर्गत नागरिकों को अपनी मांगें उठाने के लिए कोई भी संघ, संगठन या यूनियन गठित करने की कानूनी स्वतंत्रता दी गई है.
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संवैधानिक अधिकार पर वाजिब सीमाएं
हालांकि विरोध-प्रदर्शन की यह आजादी पूरी तरह से असीमित या निरंकुश नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह देश की अखंडता, संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के हित में इन अधिकारों पर उचित बंदिशें लगा सकती है. इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 51ए में दर्ज मौलिक कर्तव्य के अनुसार हर नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रदर्शन के दौरान सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाए और हिंसा से दूर रहे.
अनुमति के लिए पुलिस प्रशासन की प्रक्रिया
देश में कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य पुलिस का प्राथमिक दायित्व होता है. इसलिए किसी भी स्थान पर रैली या जनसभा करने से पहले स्थानीय पुलिस स्टेशन या डीसीपी कार्यालय से लिखित एनओसी लेना अनिवार्य होता है. यदि प्रदर्शन का दायरा एक से अधिक थाना क्षेत्रों में फैला हो तो इसके लिए पुलिस कमिश्नर स्तर से पूर्व स्वीकृति हासिल करनी पड़ती है. प्रशासन मुख्य रूप से आम लोगों की सुविधा, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजामों को परखने के बाद ही अनुमति पत्र जारी करता है.

एनओसी आवेदन के जरूरी दस्तावेज और नियम
पुलिस प्रशासन से औपचारिक मंजूरी लेने के लिए आयोजकों को एक विस्तृत आवेदन जमा कराना पड़ता है. इस पत्र में आयोजकों का पूरा नाम, पता, संपर्क नंबर और प्रदर्शन का उद्देश्य साफ शब्दों में लिखा होना जरूरी है. इसके साथ ही संभावित भीड़ की संख्या, कार्यक्रम का समय, लाउडस्पीकर का उपयोग, टेंट व्यवस्था और यदि कोई मार्च निकाला जा रहा हो तो उसका पूरा रूट मैप पुलिस को सौंपना पड़ता है. आयोजकों को पहचान पत्र के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण, पेयजल व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं का पूरा हलफनामा भी देना होता है.
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