Fireworks Shapes Science: कैसे पटाखों से आसमान में बनती हैं आकृतियां, कौन सी तकनीक का होता है इस्तेमाल?
Fireworks Shapes Science: पटाखों के भीतर स्टार्स को एक निश्चित सांचे में सजाकर और बीच में बारूद रखकर आसमान में आकृतियां बनाई जाती हैं. इसमें विभिन्न रासायनिक तत्वों और सही एंगल का विशेष योगदान होता है.

Fireworks Shapes Science: दीपावली और अन्य बड़े उत्सवों पर आसमान में बिखरने वाली रंग-बिरंगी आतिशबाजी हर किसी का मन मोह लेती है. जब अंधेरे आसमान में अचानक दिल, स्माइली या चमकीले फूल जैसे आकार उभरते हैं, तो बच्चों से लेकर बड़े तक हैरान रह जाते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन से छोड़े जाने वाले ये साधारण दिखने वाले पटाखे आसमान में जाकर इतनी सटीक और सुंदर आकृतियां कैसे बना लेते हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान, बारूद और आधुनिक तकनीक का एक अद्भुत मेल काम करता है, जिसके जरिए गत्ते के गोले आसमान में कलाकृति बन जाते हैं.
हवाई गोले या शेल की बनावट
आसमान में शानदार डिजाइन तैयार करने के लिए विशेष प्रकार के हवाई गोलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें तकनीकी भाषा में एरियल शेल (Aerial Shell) कहा जाता है. यह मुख्य रूप से मोटे गत्ते या कड़े कागज से तैयार किया गया एक बेलनाकार या गोलाकार कंटेनर होता है. इस शेल के भीतर कई तरह की सामग्रियां बेहद व्यवस्थित तरीके से सेट की जाती हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण एक टाइमर फ्यूज या बत्ती होती है, जो यह तय करती है कि पटाखा जमीन से छूटने के बाद कितनी ऊंचाई पर जाकर फटेगा और अपना रंग दिखाएगा.
स्टार्स और सांचों का खेल
इन पटाखों के अंदर रोशनी और रंग बिखेरने वाले छोटे-छोटे रासायनिक टुकड़ों को स्टार्स कहा जाता है, जो धातु के लवण और रसायनों से बनी ठोस गोलियां होती हैं. जब आसमान में कोई खास आकृति जैसे दिल, चक्र या स्माइली बनानी होती है, तो आतिशबाजी कारीगर इन स्टार्स को बहुत ही करीने से सजाते हैं. वे गत्ते के सांचे के अंदर इन स्टार्स को बिल्कुल उसी पैटर्न में चिपकाते या व्यवस्थित करते हैं, जैसी आकृति उन्हें ऊपर आसमान में देखनी होती है. यही वजह है कि जमीन से ऊपर जाने पर यह बारूद एक निश्चित और सुंदर आकार ले लेता है.
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विस्फोट और फैलाव कैसे होता है?
शेल के बिल्कुल बीचों-बीच बर्स्टिंग चार्ज नामक काला बारूद का एक छोटा गोला रखा जाता है. जब यह शेल अपनी तय ऊंचाई पर पहुंचता है, तो फ्यूज के जरिए इस केंद्रीय बारूद में जोरदार धमाका होता है. इस विस्फोट की जबरदस्त ताकत से शेल का बाहरी गत्ता टूट जाता है और अंदर सांचे में सजे हुए स्टार्स एक झटके में चारों तरफ बाहर की तरफ फैल जाते हैं. जिस क्रम या पैटर्न में वे सांचे के अंदर रखे गए थे, वही पैटर्न हवा में बिखरकर नीचे खड़े दर्शकों को एक स्पष्ट और जीवंत आकृति के रूप में दिखाई देता है.
पटाखों से कैसे निकलते हैं अलग अलग रंग?
आसमान में खिलने वाले इन चमकीले रंगों के पीछे विभिन्न धातुओं और रसायनों का रासायनिक विज्ञान काम करता है. अलग-अलग धातु के लवण जलने पर अलग रंग पैदा करते हैं, जैसे लाल रंग स्ट्रोंटियम के कारण, हरा रंग बेरियम से, पीला रंग सोडियम के उपयोग से और नीला रंग तांबे के यौगिकों से बनता है. जब बारूद के धमाके से भयंकर गर्मी पैदा होती है, तो इन धातुओं के इलेक्ट्रॉन ऊर्जा पाकर चमकने लगते हैं और नीचे गिरते वक्त आसमान में अलग-अलग मनमोहक रंग बिखेर देते हैं.

एंगल और मल्टीपल शेल की चुनौती
यह आकृतियां टू-डी (2D) रूप में फैलती हैं, इसलिए इनका दिखना इस बात पर निर्भर करता है कि शेल किस दिशा और कोण में फटा है. यदि पटाखा थोड़ा सा भी तिरछा फट जाता है, तो दर्शकों को आकृति की जगह केवल एक सामान्य रेखा या बिखरा हुआ प्रकाश दिखाई दे सकता है. इस तकनीकी खामी से बचने के लिए विशेषज्ञ एक ही समय में कई मिलते-जुलते शेल्स आसमान में छोड़ते हैं, ताकि हर एंगल से सही और स्पष्ट आकृति दर्शकों को आसानी से दिखाई दे सके.
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