Flight Luggage Weight Limit: क्या ज्यादा सामान रखने से जहाज को उड़ने में दिक्कत होती है, क्यों तय है वजन की सीमा?
हवाई जहाज में लिमिट से ज्यादा वजन होने पर टेक-ऑफ, लैंडिंग और ईंधन की खपत पर पड़ता है सीधा असर, जानिए मैक्सिमम टेक-ऑफ वेट का विज्ञान और क्यों सुरक्षा के लिए जरूरी है हर एक किलो का हिसाब

Flight Luggage Weight Limit: जब भी हम हवाई यात्रा की तैयारी करते हैं, तो सबसे ज्यादा ध्यान अपने बैग्स के वजन पर देते हैं. एयरपोर्ट के चेक-इन काउंटर पर अगर हमारे बैग का वजन तय सीमा से एक-दो किलो भी ज्यादा निकल जाए, तो एयरलाइन स्टाफ तुरंत अतिरिक्त शुल्क वसूलने लगता है. कई बार यात्रियों को यह नियम सिर्फ जेब ढीली करने का एक जरिया लगता है, और उनके मन में यह सवाल आता है कि क्या वाकई एक छोटे से बैग के ज्यादा वजन से इतने बड़े हवाई जहाज के उड़ने पर कोई फर्क पड़ता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे शुद्ध विज्ञान और विमान की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण गणित काम करता है.
हवाई जहाज के उड़ने का क्या है विज्ञान?
किसी भी विमान को आसमान में उड़ाने के लिए मुख्य रूप से चार ताकतें काम करती हैं- थ्रस्ट, ड्रैग, लिफ्ट और वेट. जब हवाई जहाज रनवे पर दौड़ता है, तो उसके पंख हवा के दबाव से लिफ्ट यानी ऊपर उठने की ताकत पैदा करते हैं. विमान को सुरक्षित रूप से हवा में तैरने के लिए इस लिफ्ट की ताकत का उसके कुल वजन से ज्यादा होना जरूरी है.
यदि हवाई जहाज का कुल वजन एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो पंखों के लिए पर्याप्त लिफ्ट पैदा करना मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में विमान को रनवे पर सामान्य से बहुत ज्यादा दूरी तक दौड़ना पड़ेगा और हो सकता है कि रनवे खत्म होने तक वह हवा में उठ ही न पाए, जो एक बड़े हादसे को दावत दे सकता है.
मैक्सिमम टेकऑफ वेट का गणित
हर हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी उसकी एक अधिकतम वजन क्षमता तय करती है, जिसे एविएशन की भाषा में मैक्सिमम टेकऑफ वेट कहा जाता है. इस कुल वजन में हवाई जहाज का अपना ढांचा, यात्रियों का वजन, केबिन क्रू, ईंधन और सभी यात्रियों का सामान शामिल होता है.
एयरलाइंस को हर उड़ान से पहले यह गणना करनी होती है कि विमान का कुल वजन इस MTOW से कम ही रहे. अगर यात्री अपनी मर्जी से असीमित सामान ले जाने लगेंगे, तो विमान का कुल वजन सीमा पार कर जाएगा. वजन बढ़ने से विमान के इंजनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और वे ज्यादा ईंधन की खपत करने लगते हैं. इससे विमान की माइलेज और रेंज दोनों घट जाती हैं.
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वजन के साथ-साथ संतुलन भी है बेहद जरूरी
विमान की सुरक्षा सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसमें कितना वजन है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह वजन कहां रखा गया है. इसे वेट एंड बैलेंस का नियम कहते हैं. हर विमान का एक सेंटर ऑफ ग्रेविटी होता है.
यदि विमान के पिछले हिस्से में ज्यादा भारी सामान रख दिया जाए, तो उड़ान भरते समय उसका अगला हिस्सा अचानक ऊपर की तरफ उठ सकता है, जिससे विमान हवा में अनियंत्रित होकर स्टॉल हो सकता है. वहीं अगर आगे वजन ज्यादा हो जाए, तो पायलट को प्लेन का संतुलन बनाए रखने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है. यही वजह है कि एयरलाइंस सामान के वजन को पहले से ही तय रखती हैं ताकि उसे विमान के निचले हिस्से में समान रूप से वितरित करके संतुलन बनाया जा सके.
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