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बैठे-बैठाए चांद से लेकर सभी ग्रहों का मालिक बना यह शख्स, स्पेस में प्लॉट काटकर कमा रहा करोड़ों

यह कहानी अमेरिकी नागरिक डेनिस होप की है, जिन्होंने कानून की एक बारीकी को पकड़कर पूरे चांद और सौर मंडल के अन्य ग्रहों का मालिक होने का दावा कर दिया. इसके जरिए यह आदमी करोड़ों रुपये कमा चुका है.

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  • डेनिस होप ने चांद पर मालिकाना हक जताकर करोड़ों कमाए.
  • उन्होंने 1967 की 'आउटर स्पेस ट्रीटी' की खामी का फायदा उठाया.
  • संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी को मंजूरी मानकर 'लूनर एम्बेसी' शुरू की.
  • हॉलीवुड सितारों से लेकर राष्ट्रपतियों तक ने चांद पर प्लॉट खरीदे.

क्या आपने कभी सोचा है कि रात में चमकने वाला चांद किसी की निजी जागीर भी हो सकता है? एक ऐसा शख्स जिसने न केवल चांद पर अपना मालिकाना हक जताया, बल्कि उसे टुकड़ों में बेचकर करोड़ों रुपये भी कमा लिए. यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि डेनिस होप नाम के व्यक्ति की हकीकत है. उन्होंने एक ऐसी कानूनी चूक को हथियार बनाया, जिस पर दुनिया के बड़े-बड़े देशों की नजर नहीं गई और देखते ही देखते वह 'चांद के जमींदार' बन गए.

खाली जेब और एक चमकता विचार

जिंदगी में कई बार तंगी इंसान को ऐसे रास्ते दिखाती है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता. डेनिस होप के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. साल 1980 के आसपास वह संपत्ति के जरिए कमाई करने का रास्ता खोज रहे थे. खिड़की के बाहर चांद को देखते हुए उनके मन में एक अजीब सा विचार आया कि क्यों न इसे ही अपना बना लिया जाए. यह विचार सुनने में जितना बचकाना था, डेनिस ने उसे उतनी ही गंभीरता से लिया.

लाइब्रेरी से मिली कामयाबी की चाबी

अपने इस अनोखे आइडिया को हकीकत में बदलने के लिए डेनिस होप ने कानूनी किताबों का सहारा लिया. वह लाइब्रेरी पहुंचे और वहां 1967 की 'आउटर स्पेस ट्रीटी' (बाह्य अंतरिक्ष संधि) को गहराई से पढ़ा. यह संयुक्त राष्ट्र का एक ऐसा दस्तावेज है जो अंतरिक्ष के इस्तेमाल और उस पर कब्जे को लेकर नियम तय करता है. इसी दस्तावेज के भीतर उन्हें वह रास्ता मिला जिसने उनकी किस्मत के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए.

कानून की वो छोटी सी खामी आई काम

संयुक्त राष्ट्र की इस संधि में लिखा था कि दुनिया का कोई भी देश अंतरिक्ष या चांद के किसी भी हिस्से पर अपनी संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता है. यानी कोई भी देश यह नहीं कह सकता कि चांद उसका है. डेनिस ने इसी बात को पकड़ लिया. उन्होंने तर्क दिया कि संधि देशों को रोकती है, लेकिन किसी एक अकेले व्यक्ति (इंडिविजुअल) के बारे में इसमें कुछ नहीं लिखा. उन्होंने मान लिया कि अगर यह किसी देश का नहीं है, तो एक साधारण नागरिक इस पर दावा कर सकता है.

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संयुक्त राष्ट्र को भेजा गया नोटिस और आठ ग्रहों पर ठोका दावा

सिर्फ सोचने भर से काम नहीं चलने वाला था, इसलिए डेनिस ने इसे आधिकारिक रूप देने की कोशिश की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को एक औपचारिक नोटिस भेजा. इस नोटिस में उन्होंने चांद के साथ-साथ सौर मंडल के आठ ग्रहों और उनके उपग्रहों पर अपने मालिकाना हक का दावा ठोक दिया. उन्होंने साफ लिखा कि वह इस संपत्ति को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचना चाहते हैं. उन्होंने चुनौती दी कि अगर किसी को कानूनी आपत्ति है, तो उन्हें बताया जाए.

खामोशी बनी मंजूरी का आधार

हैरानी की बात यह रही कि संयुक्त राष्ट्र या किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने डेनिस होप के उस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया. डेनिस ने इसी चुप्पी को अपनी जीत मान लिया. उनका तर्क था कि चूंकि किसी ने उनके दावे को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी, इसलिए अब वह कानूनी तौर पर इन ग्रहों के मालिक बन चुके हैं. यहीं से लूनर एम्बेसी नाम की उनकी कंपनी की नींव पड़ी और चांद की जमीन का व्यापार शुरू हुआ.

कैसे तय होता है चांद पर कौन सा प्लॉट किसका?

लोग अक्सर सोचते हैं कि चांद पर जमीन की लोकेशन कैसे तय होती होगी. इसके लिए डेनिस होप ने एक बहुत ही सरल और मजेदार तरीका अपनाया है. वह अपनी मेज पर चांद का एक बड़ा सा नक्शा फैलाते हैं, अपनी आंखें बंद करते हैं और अपनी उंगली नक्शे पर कहीं भी रख देते हैं. जिस जगह उंगली रुकती है, वहीं ग्राहक का प्लॉट मान लिया जाता है. हालांकि यह तरीका वैज्ञानिक नहीं है, लेकिन उनके ग्राहकों के लिए यह काफी रोमांचक है.

हॉलीवुड सितारों से लेकर राष्ट्रपतियों तक ने खरीदा चांद पर प्लॉट

चांद पर जमीन खरीदने वालों की लिस्ट छोटी नहीं है. डेनिस होप के ग्राहकों में हॉलीवुड के दिग्गज कलाकार और दुनिया के रईस शामिल हैं. इतना ही नहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन, जिमी कार्टर और जॉर्ज डब्ल्यू बुश जैसे बड़े नाम भी इस फेहरिस्त में बताए जाते हैं. इसके अलावा हिल्टन और मैरियट जैसी बड़ी होटल श्रृंखलाओं ने भी भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए चांद पर जमीन के बड़े हिस्से बुक कराए हैं.

एक एकड़ से लेकर महाद्वीप तक का होता है सौदा

डेनिस होप के इस बाजार में हर बजट के लिए कुछ न कुछ मौजूद है. यहां कम से कम एक एकड़ जमीन खरीदी जा सकती है. वहीं, अगर कोई बहुत बड़ा निवेश करना चाहता है, तो वह महाद्वीप के आकार की जमीन भी खरीद सकता है. ऐसी एक बड़ी जमीन की कीमत 133 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा है. हालांकि अब तक इतना बड़ा प्लॉट किसी ने नहीं खरीदा है, लेकिन 2,000 एकड़ तक के प्लॉट कई बड़ी कंपनियां खरीद चुकी हैं.

करोड़ों की कमाई और एक ही पेशा

साल 1995 के बाद से डेनिस होप ने किसी और काम की तरफ मुड़कर नहीं देखा. चांद और ग्रहों की जमीन बेचना ही उनका एकमात्र पेशा बन गया. एक आंकड़े के मुताबिक, वह हर दिन औसतन 1,500 संपत्तियां बेचते हैं. इस अनोखे बिजनेस से उन्होंने अब तक करीब 12 मिलियन डॉलर (लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक) की कमाई की है. आज वह दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्होंने एक विचार के दम पर शून्य से साम्राज्य खड़ा किया.

क्या कोई देश इन संपत्तियों पर कर सकता है कब्जा?

जमीन बेचने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि इसकी सुरक्षा कैसे होगी? क्या कोई देश इन संपत्तियों पर कब्जा नहीं कर लेगा? इस डर को दूर करने के लिए डेनिस ने एक और कदम उठाया. उन्होंने अपने सभी ग्राहकों के साथ मिलकर एक लोकतांत्रिक देश बनाने का फैसला किया, जिसे 'गैलेक्टिक सरकार' का नाम दिया गया. साल 2004 में इस सरकार का अपना संविधान भी ऑनलाइन प्रकाशित किया गया, जिसे लाखों लोगों ने वोट देकर स्वीकार किया.

राजनयिक मान्यता की अजीब कोशिशें

डेनिस होप का दावा है कि उनकी इस 'गैलेक्टिक सरकार' का अपना संविधान है और यह एक संप्रभु राष्ट्र की तरह काम करती है. वह तो यहां तक कहते हैं कि दुनिया के लगभग 30 देशों के साथ उनके अनौपचारिक राजनयिक संबंध हैं. उनकी अगली कोशिश इस सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का सदस्य बनवाने की है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दावों को आधिकारिक तौर पर कभी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन डेनिस का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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