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Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने दो विधायकों को किया सस्पेंड, क्या इससे चली जाएगी दोनों की विधायकी? जानें नियम

Mamata Banerjee: हाल ही में ममता बनर्जी ने पार्टी से दो विधायकों को निकाल दिया है. आइए जानते हैं कि क्या उनकी विधायकी भी चली जाएगी या नहीं.

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  • व्हिप का उल्लंघन करने पर अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है।

Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से दो विधायकों को निकाल दिया है. इससे पश्चिम बंगाल में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. ये दोनों नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा हैं. इस कार्रवाई के बाद संदीपन साहा ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और यह दावा किया है कि उनके खिलाफ पारित प्रस्ताव में उन लोगों के हस्ताक्षर भी शामिल थे जो बैठक में मौजूद नहीं थे. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या इससे दोनों विधायकों की विधायकी चली जाएगी. 

क्या दोनों विधायक अपनी सीट गंवा देंगे? 

भारतीय संविधान और विधानसभा नियमों के मुताबिक किसी राजनीतिक दल से निकाले जाने पर कोई व्यक्ति अपने आप ही विधानसभा से बाहर नहीं हो‌ जाता. पार्टी नेतृत्व द्वारा निलंबित या फिर निष्कासित किए जाने के बाद भी विधायक सदन का सदस्य बना रहता है. वह सदस्य तब तक बना रहता है जब तक कि उसे विशिष्ट संवैधानिक प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित न कर दिया जाए.

पार्टी सदस्यता और विधायक के दर्जे में अंतर 

 किसी राजनीतिक दल से निकाले जाने और विधायी सदस्यता गंवाने में एक बड़ा अंतर होता है. अगर कोई पार्टी किसी विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए निकाल देती है तो वह विधायक विधानसभा में एक असंलग्न या फिर निर्दलीय सदस्य के रूप में बना रह सकता है. एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उसका दर्जा तुरंत खत्म नहीं होता.

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क्या है दल बदल विरोधी कानून? 

दल बदल विरोधी कानून भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है. इस कानून के तहत कोई विधायक मुख्य रूप से कुछ खास परिस्थितियों में अपनी सदस्यता गंवा सकता है. इनमें अपनी मर्जी से राजनीतिक दल छोड़ना, सदन के अंदर पार्टी के व्हिप के खिलाफ मतदान करना या फिर पार्टी के निर्देशों के बावजूद मतदान से दूर रहना शामिल है. 

क्योंकि इन विधायकों को पार्टी द्वारा निष्कासित किया गया था और उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया था इस वजह से इस चरण पर दल बदल विरोधी कानून सीधे तौर पर उन पर लागू नहीं होता. 

पार्टी का व्हिप अब भी मायने रखता है 

निष्कासन के बाद भी अगर विधायक विधानसभा के अंदर अपनी मूल पार्टी के आधिकारिक व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो वह मुसीबत में पड़ सकते हैं. अगर वे जरूरी कार्यवाही के दौरान पार्टी के निर्देशन के खिलाफ मतदान करते हैं तो दल बदल विरोधी कानून के तहत उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए शिकायत दर्ज की जा सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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