दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है. इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया, इसलिए इसे "दीपावली" कहा गया,यानी दीपों की पंक्ति.
दिवाली 2025
शुभ दिवाली पर्व 2025 - मुहूर्त
| तारीख | दिवाली फेस्टिवल | विधि, मुहूर्त |
|---|---|---|
| 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) | द्वादशी, धनतेरस | धनतेरस |
| 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) | चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी | नरक चतुर्दशी |
| 21 अक्टूबर 2025 (मंगलवार) | अमावस्या, दिवाली | दिवाली |
| 22 अक्टूबर 2025 (बुधवार) | प्रतिपदा, गोवर्धन पूजा | गोवर्धन पूजा |
| 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | द्वितीया, भाई दूज | भाई दूज |
FAQs
दिवाली कब मनाई जाती है और क्यों?
2025 में दिवाली कब मनेगी?
ज्योतिषीय के आधार पर दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा.
दिवाली पर कौन-कौन से देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और विष्णु जी की पूजा की जाती है. माँ लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं, जबकि गणेश जी बुद्धि और सफलता के प्रतीक हैं.
दिवाली पर धनतेरस और गोवर्धन पूजा का क्या महत्व है?
दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस आता है,इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा होती है, और शुभ प्रतीक के रूप में नया बर्तन या सोना खरीदा जाता है. दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है, जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण किया जाता है.
दिवाली से पहले घर की सफाई और सजावट क्यों जरूरी मानी जाती है?
मान्यता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ, सुसज्जित घर में ही प्रवेश करती हैं. इसलिए दीपावली से पहले लोग अपने घरों की सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट करते हैं ताकि सुख-समृद्धि बनी रहे.
क्या पटाखे जलाना धार्मिक रूप से आवश्यक है?
नहीं. धर्मग्रंथों में पटाखों का कोई उल्लेख नहीं है. असली दिवाली का अर्थ है,अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय. आजकल लोग इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं, लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है.
दिवाली पर कौन से शुभ काम करने चाहिए और क्या नहीं करने चाहिए?
करें: दीपदान, गरीबों को वस्त्र या मिठाई देना, लक्ष्मी-गणेश की पूजा, घर में प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा फैलाना. न करें: झगड़ा, अपशब्द, अपव्यय या किसी का अपमान. यह दिन विनम्रता, कृतज्ञता और नए आरंभ का प्रतीक है.











