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Four Wheels Concept: कार में चार ही क्यों होते हैं पहिए? कहां से आया फोर-व्हील का कॉन्सेप्ट

Four Wheels Concept : कार हो या फिर बस, बाइक और अन्य वाहन सभी धीरे-धीरे विकसित हुए हैं. खासकर चार पहियों वाली गाड़ियों का इतिहास बहुत दिलचस्प है.

Four Wheels Concept: दुनिया की लगभग हर कार में चार पहिए ही होते हैं, चाहे छोटी हैचबैक हो, बड़ी SUV हो या फिर लग्जरी सेडान, ज्यादातर वाहन चार पहियों पर ही टिके होते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कारों में तीन, पांच या छह पहियों की जगह चार पहिए ही क्यों लगाए जाते हैं? आखिर इस डिजाइन के पीछे क्या वजह है और फोर-व्हील का कॉन्सेप्ट कहां से आया.

बता दें, कार हो या फिर बस, बाइक और अन्य वाहन सभी धीरे-धीरे विकसित हुए हैं. खासकर चार पहियों वाली गाड़ियों का इतिहास बहुत दिलचस्प है, यह 1800 के दशक से लेकर आज के हाई-टेक ऑफ-रोड वाहनों तक शामिल है. ऐसे में कई लोग कार में चार पहिए के कॉन्सेप्ट को लेकर कई तरह के सवाल करते हैं तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि कार में चार ही पहिए क्यों होते हैं और फॉर व्हील का कॉन्सेप्ट कहां से आया. 
 
कार में चार ही पहिए क्यों होते हैं?

किसी भी वाहन को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के लिए उसका वजन सही तरीके से बंटना बेहद जरूरी होता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी चौकोर या आयताकार संरचना का भार उसके किनारों या कोनों पर समान रूप से बांटना सबसे जरूरी माना जाता है. कारों का आकार भी आमतौर पर आयताकार या चौकोर होता है. ऐसे में अगर उसके चारों कोनों पर सपोर्ट दिया जाए तो वाहन का पूरा वजन बराबर तरीके से बैलेंस हो जाता है. यही कारण है कि कार को चार पहियों का सहारा दिया जाता है. 

चार पहियों वाली गाड़ियों की शुरुआत कैसे हुई?
 
पहिए का आविष्कार लगभग 3500 ईसा पूर्व में हुआ, जिससे पहली गाड़ियां बनीं. 1769 में Nicolas Joseph Cugnot ने पहली self-propelled सड़क गाड़ी बनाई. इसके बाद 1801 में Richard Trevithick ने स्टीम इंजन वाली सड़क गाड़ी बनाई फिर 19वीं सदी में गैसोलीन इंजन आया और Jean Lenoir ने पहली गैसोलीन कार बनाई, 1885 में Karl Benz ने पहली व्यावहारिक कार बनाई, जिसे आधुनिक कार का आधार माना जाता है. इसी समय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की शुरुआत हुई, Henry Ford ने 1893 में अपना इंजन बनाया और 1908 में Model T लॉन्च की, उन्होंने असेंबली लाइन सिस्टम शुरू किया, जिससे कारें सस्ती और तेजी से बनने लगीं. 
 
चार पहियों की ड्राइविंग तकनीक का इस्तेमाल कब हुआ?
 
चार पहियों की ड्राइविंग तकनीक सबसे पहले भारी मशीनों में इस्तेमाल हुई. 1893 में ब्रिटिश इंजीनियर Bramah Joseph Diplock ने पहला 4WD सिस्टम पेटेंट किया, जो भाप से चलने वाली मशीन के लिए था. इसके बाद 1900 में Ferdinand Porsche ने इलेक्ट्रिक मोटर वाला चार पहियों वाला वाहन बनाया. यह तकनीकी रूप से 4WD जैसा था, लेकिन बैटरी बहुत भारी थी, इसलिए यह सफल नहीं हुआ. 1902 में Dutch स्पाइकर भाइयों ने Spyker 60HP नाम की कार बनाई, जो पूरी तरह मैकेनिकल 4WD थी. इसमें चारों पहियों पर ब्रेक और 6-सिलेंडर इंजन था. इसके बाद यूरोप और अमेरिका में कई कंपनियों ने 4WD पर काम शुरू किया, लेकिन यह ज्यादातर सेना और भारी कामों में ही इस्तेमाल होता था. 

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 फोर-व्हील कॉन्सेप्ट की शुरुआत कैसे हुई?

वाहनों के शुरुआती विकास के दौर में भी चार पहियों का इस्तेमाल देखने को मिलता है. सबसे पहले रथों में चार पहिए लगाए जाते थे. बाद में जब मोटर वाहन विकसित हुए तो उसी मूल संरचना को आगे बढ़ाया गया. कारों का आकार आयताकार होने और वजन को चारों तरफ बैलेंस रखने की जरूरत ने भी चार पहियों वाले डिजाइन को मजबूत बनाया. यह व्यवस्था सबसे बेहतर बैलेंस, बेहतर ट्रैक्शन, ग्रिप और सुरक्षित ड्राइविंग देती है. यही कारण है कि आज भी दुनिया की ज्यादातर कारें चार पहियों के साथ ही बनाई जाती हैं. 

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