Number Plate Cloning: नंबर प्लेट की क्लोनिंग की तो जाएंगे जेल, जानें इस मामले में क्या है सजा?
Number Plate Cloning: ट्रैफिक पुलिस की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आरोपियों ने असली गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर कॉपी या बदलकर अपने वाहनों पर लगा लिए और बेफिक्र होकर नियम तोड़ते रहे.

Number Plate Cloning: हैदराबाद में इन दिनों नंबर क्लोनिंग का एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, जिसमें वाहन मालिकों को उन ट्रैफिक नियम उल्लंघनों के चालान मिल रहे हैं जो उन्होंने किए ही नहीं. ट्रैफिक पुलिस की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आरोपियों ने असली गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर कॉपी या बदलकर अपने वाहनों पर लगा लिए और बेफिक्र होकर नियम तोड़ते रहे. इसका खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ रहा है. उन्हें बार-बार चालान भरने के नोटिस मिलने लगे हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि नंबर प्लेट क्लोनिंग क्या है और देश में इसको लेकर क्या कानूनी प्रावधान है.
कैसे काम करता है नंबर प्लेट की क्लोनिंग का खेल?
इस तरह के मामलों में आरोपी किसी वैलिड वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर कॉपी कर लेते हैं या उसमें मामूली बदलाव कर देते हैं. इसके बाद जब वह ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, तो सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरे और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम इस नंबर के आधार पर चालान जनरेट कर देते हैं. लेकिन यह चालान असली वाहन मालिक के पास पहुंच जाते हैं, जबकि असली आरोपी बच निकलता है.
जांच में सामने आए बड़े मामले
नंबर प्लेट क्लोनिंग के एक मामले में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर निवासी को हैदराबाद की जुबली हिल्स इलाके से बार-बार चालान मिलने लगे. जबकि वह वहां कभी गया ही नहीं था. जांच में पता चला कि एक डिलीवरी एजेंट ने अपनी स्कूटी की असली नंबर प्लेट हटाकर उस पर नेल्लौर निवासी की गाड़ी का नंबर प्लेट लगा लिया था. दूसरे मामले में कुकटपल्ली की एक महिला को अलग-अलग जगह से चालान मिलने लगे. पुलिस जांच में सामने आया कि एक युवक ने अपनी बाइक के नंबर में सिर्फ एक अक्षर बदलकर उस महिला के नंबर जैसा बना दिया, ताकि चालान से बच सकें.
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टेक्नोलॉजी से पकड़े जा रहे हैं आरोपी
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, अब शहर में लगे हाईटेक सीसीटीवी कैमरे और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम ऐसे मामलों को पकड़ने में मदद कर रहे हैं. कई बार एक ही नंबर प्लेट अलग-अलग जगह पर एक साथ देखने पर सिस्टम अलर्ट करता है, जिससे क्लोनिंग का खुलासा हो जाता है. रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 के पहले 10 महीनों में ही हैदराबाद में 36,000 से ज्यादा गलत चालान जारी किए गए हैं. इसके अलावा साइबराबाद और राचकोंडा क्षेत्र में भी हजारों शिकायत दर्ज की गई है, जो इस समस्या के बढ़ते दायरे को दिखा रही है.
नंबर प्लेट से छेड़छाड़ पर क्या है सजा?
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध माना जाता है. नंबर प्लेट बदलना, छुपाना या उसे पर टेप-पेंट लगाना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर सकती है. आरोपी को जेल की सजा हो सकती है और वाहन को जब्त किया जा सकता है. वहीं बार-बार उल्लंघन पर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल किया जा सकता है.























