एक्सप्लोरर

Explained: जून 2026 में 3.6 लाख EV गाड़ियां बिकीं! जबकि पूरे देश में सिर्फ 27 हजार चार्जिंग स्टेशन, क्या बढ़ेगा 'चार्जिंग संकट'?

EV Charging Stations: 2030 तक 13 लाख चार्जर चाहिए यानी बहुत लंबा रास्ता तय करना है. जब तक हर गली, हाईवे और हर गांव में चार्जिंग की सुविधा नहीं होगी, तब तक रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर बना रहेगा.

जून 2026 का महीना भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक रहा. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, पूरे देश में कुल 25,57,234 वाहनों की रिटेल बिक्री हुई, जो पिछले साल जून के मुकाबले 21.83 फीसदी ज्यादा है. यह जून महीने का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, लेकिन असली हैरान करने वाली बात EV सेगमेंट में है. टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल की कुल EV रिटेल बिक्री 3,06,220 यूनिट तक पहुंच गई. यह किसी भी महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है और EV की कुल पैठ 12.5 फीसदी तक जा पहुंची हैं. लेकिन सवाल यही है कि इतनी सारी EV गाड़ियां कहां चार्ज होंगी...

जून में रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े क्या कहते हैं?

FADA के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल (कार और SUV) सेगमेंट में EV कारों की रिटेल बिक्री रिकॉर्ड 31,823 यूनिट रही. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह कि पहली बार CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कुल हिस्सेदारी 40.35 फीसदी तक पहुंच गई. यानी जून में बिकने वाली हर पांच में से दो कार या तो CNG थी, हाइब्रिड थी या फिर पूरी तरह इलेक्ट्रिक.

CNG की हिस्सेदारी 24.33 फीसदी, हाइब्रिड की 8.27 फीसदी और EV की 7.75 फीसदी रही. पिछले साल जून में यही आंकड़ा 33.3 फीसदी था. पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी पहली बार 60 फीसदी से नीचे आ गई.

EV टू-व्हीलर की हिस्सेदारी पहली बार 10.60 फीसदी तक पहुंची. पिछले साल जून में यह 7.34 फीसदी थी. थ्री-व्हीलर सेगमेंट तो पहले से ही EV की तरफ झुका हुआ था, लेकिन अब EV की हिस्सेदारी 64.08 फीसदी तक जा पहुंची. कमर्शियल व्हीकल में भी EV की पैठ रिकॉर्ड 3.5 फीसदी तक पहुंच गई.

FADA के प्रेसिडेंट सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि शहर हो या गांव, हर जगह डिमांड बढ़ रही है. ग्रामीण बाजार शहरी बाजार से भी तेजी से बढ़ रहा है. जून में ग्रामीण बिक्री 35.1 फीसदी बढ़ी, जबकि शहरी बिक्री 24.7 फीसदी.

चार्जिंग स्टेशनों का गणित: आंकड़े, राज्य और हकीकत

सरकार ने राज्यसभा में 1 मार्च 2026 तक के आंकड़े पेश किए देशभर में 27,737 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं. लेकिन इनमें से 22,753 ही ऑपरेशनल हैं. यानी करीब 5,000 चार्जिंग स्टेशन या तो खराब पड़े हैं या चालू नहीं हो पाए हैं.

इसके अलावा FAME-II स्कीम के तहत 9,332 चार्जिंग स्टेशन मंजरू किए गए थे. 1 मार्च 2026 तक इनमें से सिर्फ 6,645 ऑपरेशनल थे. यानी FAME-II के तहत भी करीब 2,700 स्टेशन अभी भी कागजों में या बंद पड़े हैं.

राज्यवार आंकड़े भी दिलचस्प हैं. FAME-II के तहत सबसे ज्यादा 957 चार्जर तमिलनाडु में लगे. इसके बाद उत्तर प्रदेश (937) और महाराष्ट्र (670) हैं. लेकिन ऑपरेशनल होने की बात करें तो महाराष्ट्र ने 670 में से 615 चालू किए, जबकि उत्तर प्रदेश ने 937 में से सिर्फ 456.

JMK रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक देशभर में 29,151 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन थे. इनमें कर्नाटक अकेले 6,096 स्टेशनों के साथ 20.91 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. महाराष्ट्र 4,166 स्टेशनों (14.29 फीसदी) के साथ दूसरे नंबर पर है, तमिलनाडु 1,780 और तेलंगाना 1,062 स्टेशनों के साथ है. यानी दक्षिण के तीन राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना मिलकर देश के 30 फीसदी से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर कब्जा जमाए हुए हैं.

दरअसल, बात सिर्फ संख्या की नहीं है. फास्ट चार्जर की कमी एक बड़ी समस्या है. देश में 50kW+ के फास्ट चार्जर करीब 20 फीसदी से भी कम हैं. मतलब ज्यादातर चार्जर धीमे (स्लो) हैं, जिनमें कार को पूरा चार्ज होने में घंटों लग जाते हैं. एक फास्ट चार्जर पर 235 EV गाड़ियां आती हैं. दुनिया के बाकी EV बाजारों में यह अनुपात 6:1 से 20:1 के बीच होता है, यानी वहां एक चार्जर पर 6 से 20 गाड़ियां, जबकि भारत में एक चार्जर पर 235 गाड़ियां.

नीति आयोग के 30 फीसदी EV पैठ के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 2030 तक करीब 13 लाख चार्जिंग स्टेशन चाहिए. अभी 29,000-30,000 हैं यानी 2030 तक 40 गुना ज्यादा चार्जर बनाने होंगे. इस रफ्तार से तो ऐसा होता नजर नहीं आ रहा.

सिर्फ संख्या ही नहीं, चार्जिंग की और भी हैं असली मुश्किलें  

पहली मुश्किल: चार्जर बने तो बने, पर चलते क्यों नहीं?

यह कोई नई बात नहीं है. दिल्ली, गोवा और कर्नाटक समेत हर जगह यही हाल है. गोवा में एक तिहाई EV चार्जिंग स्टेशन नॉन-फंक्शनल या डिकमीशन हो चुके हैं. कर्नाटक के तुमकुरु में BESCOM ने चार्जिंग स्टेशन लगवाए, मगर बिजली की सप्लाई न होने की वजह से वे बेकार पड़े हैं. फरीदाबाद में करीब 25,000 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं, लेकिन एक भी सरकारी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन नहीं है. MCD के तहत आवंटित आधे से ज्यादा EV चार्जिंग स्टेशन अभी तक ऑपरेशनल नहीं हो पाए हैं.

दूसरी मुश्किल: घर पर चार्जिंग का झंझट

करीब 45 फीसदी भारतीय घरों में EV चार्जिंग के लिए बिजली के अपग्रेड की जरूरत है. अलायंस फॉर एन एनर्जी एफिशियंट इकोनॉमी (AEEE) और कजम की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिहायशी चार्जिंग इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है. यानी पुराने वायरिंग, पार्किंग की समस्या और बिजली के लोड को संभालने की क्षमता ये सब रोड़े हैं.

तीसरी मुश्किल: बिजली का ग्रिड संभालेगा कैसे?

फास्ट चार्जर (350kW) एक बार में 50-70 घरों के बराबर बिजली खींच लेते हैं. पुराने ट्रांसफार्मर इस लोड को संभाल नहीं पाते. नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन ने पहले ही चेतावनी दी है कि अनियंत्रित EV चार्जिंग से ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है और इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई पर असर पड़ सकता है. छोटे शहरों में वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, खराब अर्थिंग और अनौपचारिक कनेक्शन EV चार्जिंग के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं.

हालांकि, एक राहत की बातभी है कि देशभर की सभी EVs की सालाना बिजली की मांग 20.07 टेरावॉट-घंटा है, जो भारत की सालाना बिजली उत्पादन का करीब 1.1 फीसदी ही है. यानी कुल बिजली की कमी तो नहीं है, मगर स्थानीय स्तर पर लोड मैनेजमेंट की चुनौती बड़ी है.

चौथी मुश्किल: शहरी पूर्वाग्रह और हाईवे का सूनापन

करीब 77 फीसदी चार्जर शहरों (बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई) में केंद्रित हैं. हाईवे और टियर-2 शहर वंचित रह गए हैं. ई-ट्रक और ई-बसों को हाईवे पर सबसे ज्यादा जरूरत होती है, मगर वहां चार्जर नहीं हैं. यानी EV अभी शहरों की गाड़ी बनी हुई है, लंबी दूरी की सफर के लिए नहीं.

सरकार और उद्योग क्या कर रहे हैं?

PM E-DRIVE स्कीम सरकार का सबसे बड़ा हथियार है, जिसका कुल 10,900 करोड़ रुपए का बजट है. इसमें से 2,000 करोड़ रुपए सिर्फ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है. इस स्कीम के तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसें भी तैनात की जाएंगी. हाल ही में 503.86 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है, जिससे 4,874 नए EV चार्जर लगाए जाएंगे.

ये चार्जर राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में लगेंगे. इनमें से अकेले कर्नाटक को 1,243 चार्जर मिलेंगे. सरकारी तेल कंपनियां HPCL, IOCL और BPCL इन्हें इंस्टॉल करेंगी.

केंद्र सरकार एक 'यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC)' ऐप भी बना रही है, जो EV यूजर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी चार्जिंग नेटवर्क्स को ढूंढने, एक्सेस करने और पेमेंट करने की सुविधा देगा. इसे EV के लिए 'UPI' जैसा बताया जा रहा है.

FAME-II स्कीम के तहत EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 912.50 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जिनमें से 655.43 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं.

प्राइवेट सेक्टर भी पीछे नहीं है. टाटा पावर ने 5,500 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन 700 से ज्यादा शहरों और कस्बों में लगाए हैं. बोल्ट.अर्थ ने 1,00,000 से ज्यादा चार्जर तैनात किए हैं. इंडोफास्ट एनर्जी ने FY26 के अंत तक 1,600 बैटरी स्वैप स्टेशन 23 शहरों में लगाए और 90,000 से ज्यादा वाहनों को ऑनबोर्ड किया. एनर्जी इन मोशन ने JNPT पोर्ट पर भारी EV के लिए देश का सबसे बड़ा बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग हब शुरू किया.

बैटरी स्वैपिंग: क्या यह कोई रास्ता है?

चार्जिंग के अलावा एक और रास्ता है- बैटरी स्वैपिंग. खासकर टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए. TDB-DST ने InfinityX Innovations को ऑटोमेटेड, IoT-इनेबल्ड बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के लिए सपोर्ट किया है, जो 40 सेकंड से भी कम समय में पूरी बैटरी बदल सकते हैं. यह खासतौर पर कमर्शियल फ्लीट्स और लास्ट-माइल डिलीवरी सेगमेंट के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है.

इस मामले का हल क्या है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या का हल सिर्फ स्टेशनों की संख्या बढ़ाने में नहीं है. चार चीजों पर काम करना होगा:

  • ग्रिड को मजबूत करना: पुराने ट्रांसफार्मर और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को अपग्रेड करना होगा. स्मार्ट चार्जिंग सॉल्यूशंस और टाइम-ऑफ-यूज टैरिफ (यानी रात को सस्ती बिजली) जैसे उपायों पर काम हो रहा है.
  • शहरी झुकाव खत्म करना: हाईवे और टियर-2, टियर-3 शहरों में चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने होंगे. सोलर-हाइब्रिड स्टेशन पैनल और बैटरी के साथ ग्रिड पर निर्भरता 40 फीसदी तक कम कर सकते हैं. रिमोट हाईवे के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं.
  • स्टैंडर्डाइजेशन: CCS2 और भारत DC-001 जैसे कनेक्टर स्टैंडर्ड हर जगह एक जैसे हों, ताकि हर चार्जर हर गाड़ी पर काम करे. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने कनेक्टर्स, कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और बैटरी स्वैपिंग सिस्टम से जुड़े स्टैंडर्ड्स जारी किए हैं.
  • निवेश बढ़ाना: एक चार्जिंग स्टेशन (50-120kW) 20-45 लाख रुपए का आता है. इन्वेस्टर्स को डर है कि उन्हें रिटर्न नहीं मिलेगा. पर्मिट के लिए 3-6 महीने लग जाते हैं. यहां सरकार को सब्सिडी और जमीन देकर मदद करनी होगी.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

FCI ने एथेनॉल कंपनियों को 40% सस्ते में बेचा चावल, संसद में RTI से खुलासा
FCI ने एथेनॉल कंपनियों को 40% सस्ते में बेचा चावल, संसद में RTI से खुलासा
India- China: भारत ने चीन को पछाड़ा, इस मामले में बना दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर देश
भारत ने चीन को पछाड़ा, इस मामले में बना दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर देश
FDI: 11 सालों में बदला देश का नक्शा, 143% बढ़ा विदेशी निवेश, आया बंपर पैसा
FDI: 11 सालों में बदला देश का नक्शा, 143% बढ़ा विदेशी निवेश, आया बंपर पैसा
Telegram CEO Networth: कितने अमीर हैं Telegram CEO पावेल, उनके 100 बच्चों को जायदाद में क्या मिलेगा?
कितने अमीर हैं Telegram CEO पावेल, उनके 100 बच्चों को जायदाद में क्या मिलेगा?
Advertisement

वीडियोज

Lock Upp 2: Shreya Kalra का बड़ा खुलासा, बचपन की दर्दनाक घटना सुनकर भावुक हुए सभी
Samay Raina का Munawar Faruqui पर Aamir Khan वाला Joke हुआ Viral, India’s Got Latent में मचा हंगामा
Ramayana Trailer Update: 30 July को आएगा ट्रेलर, फैंस में बढ़ी जबरदस्त Excitement
Batwara 1947 Trailer Review: Sunny Deol छा गए, लेकिन क्या ट्रेलर बना उम्मीदों जितना दमदार?
New Maruti Brezza 2026 Price Revealed | ₹7.40 Lakh से शुरू | #maruti #brezza #autolive
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
किसान आंदोलन के बीच शिवराज ने CM मोहन यादव को लिखी चिट्ठी, क्या कहा?
किसान आंदोलन के बीच शिवराज ने CM मोहन यादव को लिखी चिट्ठी, क्या कहा?
NEET आंदोलन: रूस में रहने वाले युवक पर भी FIR, गजब है बिहार पुलिस!
NEET आंदोलन: रूस में रहने वाले युवक पर भी FIR, गजब है बिहार पुलिस!
सिद्धारमैया ने मांगा प्रह्लाद जोशी का इस्तीफा, बोले - 'वह भी...'
सिद्धारमैया ने मांगा प्रह्लाद जोशी का इस्तीफा, बोले - 'वह भी...'
राहुल गांधी ने अमित शाह को घेरा, सौरव दास बोले, 'ये सीरियस...'
राहुल गांधी ने अमित शाह को घेरा, सौरव दास बोले, 'ये सीरियस...'
श्रीलंका सीरीज से पहले ईशान किशन बने कप्तान, वैभव सूर्यवंशी उपकप्तान
श्रीलंका सीरीज से पहले ईशान किशन बने कप्तान, वैभव सूर्यवंशी उपकप्तान
Xप्लेन: राहुल गांधी के 'दो बोल' से बवाल! जानें सदन के अंदर और बाहर का हाल?
राहुल गांधी के 'दो बोल' से बवाल! जानें सदन के अंदर और बाहर का हाल?
न आलिया न राहा, फिर रणबीर के फोन के वॉलपेपर पर है किसकी तस्वीर? जानकर नम हो जाएंगी आखें
न आलिया न राहा, फिर रणबीर के फोन के वॉलपेपर पर है किसकी तस्वीर?
‘मौत भी मंजूर, लेकिन...’, बांग्लादेश लौटने पर शेख हसीना का बड़ा बयान
‘मौत भी मंजूर, लेकिन...’, बांग्लादेश लौटने पर शेख हसीना का बड़ा बयान
Embed widget