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Strait Of Hormuz: जंग खत्म होने के बाद भी क्यों बंद रहेगा होर्मुज, जानें कितना मुश्किल है यहां पर किसी और देश का कब्जा?

Strait Of Hormuz: मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कब तक खुल सकता है होर्मुज और कोई दूसरा देश इस पर कब्ज क्यों नहीं कर सकता.

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  • जलमार्ग सुरक्षित होने में छह महीने तक लग सकते हैं।
  • ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगें बड़ी रुकावट बनेंगी।
  • संकरे जलमार्ग के कारण जहाजों को दिशा बदलना मुश्किल।
  • ईरान के रणनीतिक फायदे से बाहरी हस्तक्षेप सीमित।

Strait Of Hormuz: भले ही मिडल ईस्ट में चल रही यह जंग खत्म हो जाए लेकिन इसके बावजूद भी ग्लोबल एनर्जी मार्केट को इतनी जल्दी राहत नहीं मिलने वाली है. हाल ही में अमेरिका की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट से यह पता चला है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने में महीनों लग सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी टकराव के बाद कम से कम 6 महीना तक यह जलमार्ग सुरक्षित नहीं रहेगा. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और साथ ही यह भी कि कोई दूसरा देश इस रास्ते पर क्यों कब्जा नहीं कर सकता.

क्या है सबसे बड़ी रुकावट? 

लंबे समय तक रुकावट की एक बड़ी वजह नौसैनिक बारूदी माइंस का बिछाया जाना हो सकता है. किसी भी टकराव के दौरान ईरान जहाजों के आने जाने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में ये बारूदी माइंस को बिछा सकता है. इन्हें हटाना कोई आसान काम नहीं है. 

इस काम के लिए कुछ खास तरह के जहाज, काफी सावधानी से स्कैनिंग करने और काफी समय लगाकर इन्हें निष्क्रिय करने की जरूरत होती है. जब तक हर एक बारूदी माइन को हटाकर इस रास्ते को पूरी तरह से सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता तब तक कमर्शियल जहाज और बीमा कंपनियां यहां अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू करने को तैयार नहीं होती.

एक जानलेवा रास्ता 

इस स्ट्रेट की बनावट ही इसे सबसे संवेदनशील बना देती है. अपने सबसे संकरे हिस्से में यह जलमार्ग सिर्फ 21 से 33 किलोमीटर चौड़ा है. लेकिन बड़े तेल टैंकरों के इस्तेमाल के लिए वह सिर्फ कुछ मील चौड़ा है. इससे एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जिसे मिलिट्री  एक्सपर्ट्स जानलेवा गलियारा कहते हैं. यहां जहाजों के पास अपनी दिशा बदलने या फिर दांव-पेंच आजमाने के लिए काफी कम जगह होती है.

ईरान को तटों से मिलने वाला रणनीतिक फायदा 

इस स्ट्रेट के किनारे ईरान का जो तट है उसके पीछे ऊबड़-खाबड़ पहाड़ और हमले के लिए छिपी हुई कईं जगह मौजूद हैं. यहां से मिसाइलें, ड्रोन और तेज रफ्तार से हमला करने वाली नावें काफी तेजी से और बिना किसी चेतावनी के तैनात की जा सकती हैं. इसी प्राकृतिक फायदे की वजह से ईरान इस संकरे रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी नजर रख सकता है और उन पर हमला भी कर सकता है. 

क्यों है बाहरी दखल सीमित? 

होर्मुज कोई ऐसी जगह नहीं है जहां कोई भी आकर मनमानी कर सके. इसका एक बड़ा हिस्सा ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आता है. किसी बाहरी ताकत के द्वारा इस पर कब्जा करने की कोई भी कोशिश अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन होगी. इतना ही नहीं बल्कि ईरान के पास हजारों सस्ती लेकिन घातक एंटी शिप मिसाइलें, ड्रोन और मूक पनडुब्बियां हैं. भारी भरकम  नौसैनिक जहाजों के लिए इस छोटे जलक्षेत्र में बचाव करना एक असंभव काम बताया जाता है.

इसी के साथ ईरान इसे एक सैन्य हथियार से ज्यादा आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है. वह चुनिंदा रूप से मित्र देशों के जहाजों को ही अनुमति देकर पश्चिमी देशों पर दबाव बनाता है. इन मित्र देशों में चीन और भारत शामिल हैं.

यह भी पढ़ें: तेल-गैस से लेकर खाद और तारकोल तक... जानें मिडिल ईस्ट के हालात से किन चीजों की हुई कमी?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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