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Jupiter Transit 2026: देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि और पुनर्वसु के चौथे चरण में गोचर, काम से मोक्ष की ओर चेतना का महापरिवर्तन

Jupiter Transit 2026: गुरु का कर्क राशि व पुनर्वसु के चौथे चरण में गोचर चेतना को काम से मोक्ष, भोग से योग और बाहरी आकर्षण से आत्मबोध की ओर ले जाएगा. चंद्रमा के प्रभाव से आध्यात्मिक परिवर्तन का समय है.

Jupiter Transit 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर (राशि परिवर्तन) को मानव जीवन और चेतना में बदलाव का सबसे बड़ा कारक माना गया है. इसी कड़ी में ज्ञान, धर्म और विवेक के प्रदाता देवगुरु बृहस्पति ने मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर लिया है.

दिलचस्प बात यह है कि बृहस्पति देव पहले भी अपने ही स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर कर रहे थे, लेकिन तब वे मिथुन राशि में थे. अब वे पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश कर चुके हैं, जो कर्क राशि के अंतर्गत आता है. अपने ही नक्षत्र के इस अंतिम चरण में गुरु का व्यवहार पिछले तीन चरणों से पूरी तरह भिन्न होने जा रहा है, जिससे इसके मिलने वाले परिणाम भी व्यापक रूप से बदल जाएंगे.

देश के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य नरेश कुमार शर्मा के अनुसार, गुरु का यह गोचर सामान्य राशि परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना का 'काम से मोक्ष' की ओर बढ़ने का एक गूढ़ संदेश है.

मिथुन राशि (पिछले तीन चरण): मर्यादा और जिज्ञासा का संतुलन

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य नरेश कुमार शर्मा बताते हैं कि जब देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के अंतर्गत संचरण कर रहे थे, तब वे मिथुन राशि के स्वामी बुध तथा पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी स्वयं बृहस्पति के संयुक्त प्रभाव में कार्य कर रहे थे.

काम त्रिकोण की ऊर्जा: मिथुन राशि राशि चक्र की 'काम त्रिकोण' की प्रथम राशि है. यह जिज्ञासा, संवाद, ज्ञान-विनिमय, आकर्षण तथा सृष्टि के विस्तार की प्रेरणा देती है. यह वह अवस्था है जहाँ मानव चेतना बाह्य संसार की विविधताओं को जानने और अनुभव करने की ओर प्रवृत्त होती है.

संयम का प्रभाव: गुरु के अपने ही नक्षत्र में होने के कारण इस कामप्रधान ऊर्जा में मर्यादा, सदाचार, धर्मबुद्धि और संयम का समावेश बना रहा. यही वजह थी कि इच्छाओं की अभिव्यक्ति अनियंत्रित न होकर धर्मसम्मत एवं संतुलित रही.

कर्क राशि व चतुर्थ चरण: गुरु का व्यवहार क्यों और कैसे बदला?

अब बृहस्पति कर्क राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे ऊर्जा का पूरा केंद्र ही बदल गया है. इस चरण में गुरु का व्यवहार पिछले तीन चरणों से निम्नलिखित कारणों से भिन्न होगा:

1. बुध के बौद्धिक प्रभाव से निकलकर चंद्रमा के भावनात्मक प्रभाव में आना

मिथुन राशि का स्वामी बुध (बुद्धि) है, जबकि कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा है. चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता, मातृत्व तथा आंतरिक परिवर्तन का कारक है. अब गुरु पर तार्किक बुद्धि के बजाय आत्मिक और भावनात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहेगा.

2. उच्चत्व और आध्यात्मिक चेतना का जागरण

कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के होते हैं. जीवकारक गुरु जब चन्द्रमा की राशि और पुनर्वसु के चौथे चरण में स्थित होते हैं, तब व्यक्ति का मन केवल भौतिक इच्छाओं की पूर्ति तक सीमित नहीं रहता. व्यक्ति उन इच्छाओं के वास्तविक उद्देश्य को समझने का गहराई से प्रयास करता है.

गोचर का गूढ़ संदेश: 'काम से मोक्ष' की महायात्रा

"इस गोचर का सबसे बड़ा संदेश यह है कि अब 'काम से मोक्ष' की यात्रा आरंभ हो रही है. जो ऊर्जा पहले बाह्य सृष्टि, सांसारिक संबंधों और भौतिक अनुभवों में प्रवाहित हो रही थी, वही अब आत्मचिंतन, आध्यात्मिक ज्ञान, करुणा, सेवा और आत्मबोध की दिशा में अग्रसर होगी."  ज्योतिषाचार्य नरेश कुमार शर्मा

  • भोग से योग: समाज में भौतिक सुखों की अंधी दौड़ के बजाय लोग मानसिक शांति और योग-ध्यान की तरफ आकर्षित होंगे.
  • आकर्षण से आत्मानुभूति: बाहरी आकर्षणों (Relationships & Materialism) से ध्यान हटकर "मैं कौन हूँ" और आत्म-साक्षात्कार की भावना प्रबल होगी.
  • परम सत्य की खोज: यह गोचर वैश्विक और व्यक्तिगत स्तर पर मानव चेतना को संसार के भ्रम से निकालकर परम सत्य की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परिवर्तन सूचित करता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हर्षिका मिश्रा । धर्म और ज्योतिष पत्रकार

हर्षिका मिश्रा ABP Live में धर्म और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. उन्हें ज्योतिष के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है. पिछले एक वर्ष से वे धर्म और ज्योतिष की डिजिटल कवरेज पर काम कर रही हैं. उनके लेखन के प्रमुख विषय ग्रह गोचर, राशिफल, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं हैं.

उन्होंने नई दिल्ली स्थित AIMC से टेलीविजन और रेडियो प्रोडक्शन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उनकी पढ़ाई में स्क्रिप्ट लेखन और वीडियो प्रोडक्शन शामिल रहे हैं. वे लेख और वीडियो स्क्रिप्ट के जरिए धर्म व ज्योतिष से जुड़े सवालों को सरल भाषा में समझाती हैं.

वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु और शकुन शास्त्र उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. वे नई पीढ़ी के पाठकों के लिए करियर, पढ़ाई और रिश्तों से जुड़े प्रश्नों पर भी लिखती हैं. उनका ध्यान ज्योतिषीय शब्दों का अर्थ और किसी व्याख्या का आधार स्पष्ट करने पर रहता है.

उनका मानना है कि ज्योतिष से जुड़ी जानकारी डर पैदा करने के बजाय सोचने और अपनी परिस्थितियों को समझने में मदद करनी चाहिए. वे ज्योतिषीय आकलनों को संभावित संकेतों के रूप में देखती हैं और व्यक्तिगत प्रयास व जिम्मेदारी को महत्व देती हैं.

श्रीमद्भगवद्गीता का कर्म सिद्धांत उनकी सोच को प्रभावित करता है. पत्रकारिता और ज्योतिष के अलावा उन्हें संगीत, साहित्य और यात्राओं में रुचि है.

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