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सरकार के लिए आसान नहीं सितंबर, क्या फिर बनेगी जुलाई के जंतर-मंतर आंदोलन जैसी स्थिति?

September 2026 Prediction: भारत की कुंडली में 18 से 24 सितंबर के बीच युवा विरोध और जनदबाव बढ़ने के संकेत हैं. जानें क्या फिर बन सकती है जंतर-मंतर जैसी स्थिति.

सितंबर 2026 में सरकार को एक बार फिर सड़कों से उठने वाले बड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है. भारत की कुंडली में 18 से 24 सितंबर के बीच दिल्ली या किसी बड़े शहर में युवा और सामाजिक संगठनों की लामबंदी के संकेत मिल रहे हैं.

यह विरोध जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. इनमें 20 से 23 सितंबर का समय अधिक संवेदनशील दिखाई दे रहा है.

हालांकि केंद्र सरकार गिरने या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद पर सीधे संकट का संकेत नहीं है. कुंडली बता रही है कि सरकार अपनी राजनीतिक स्थिति बचाए रखेगी, लेकिन पुलिस, प्रशासन, परीक्षा व्यवस्था, आरक्षण अथवा महंगाई से जुड़े किसी मुद्दे पर उसे जवाब देना पड़ सकता है. राहुल गांधी और विपक्ष को भी इसी दौरान युवा तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सरकार को घेरने का अवसर मिल सकता है.

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जुलाई के आंदोलन जैसी स्थिति क्यों बन सकती है?

जुलाई में जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन पहले परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक से जुड़ा था. धीरे-धीरे बेरोजगारी, युवाओं के भविष्य और सरकारी जवाबदेही का सवाल भी इसमें शामिल हो गया. सोशल मीडिया से शुरू हुआ आक्रोश सड़क तक पहुंचा. विपक्षी नेताओं के समर्थन के बाद इसने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया.

सितंबर में ठीक वही घटनाएं दोहराई जाएंगी, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता. लेकिन भारत की कुंडली में फिर वैसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं. अंतर केवल इतना हो सकता है कि इस बार विरोध का कारण अकेले परीक्षा या भर्ती न हो.

पुलिस कार्रवाई, दलित अधिकार, महिला सुरक्षा, मतदाता सूची, आरक्षण, जातिगत जनगणना या महंगाई में से कोई मुद्दा चिंगारी बन सकता है. इसके साथ युवा संगठनों और विपक्षी नेताओं के जुड़ने पर विरोध बड़ा हो सकता है.

4 सितंबर को CJP के कार्यकर्ताओं का कार्रवाई की मांग लेकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचना इसी बेचैनी की शुरुआती झलक है. सांसद चंद्रशेखर आजाद और पप्पू यादव भी वहां पहुंचे. कांग्रेस, RJD और शिवसेना UBT के नेताओं ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया. CJP प्रदर्शन की पूरी खबर पढ़ने के लिए इस खबर को क्लिक करें-

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यह घटना किसी बड़े आंदोलन का प्रमाण तो नहीं कही जा सकती है. लेकिन इससे इतना जरूर पता चलता है कि जुलाई में बना युवा और सामाजिक संगठनों का नेटवर्क पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है. वह नए मुद्दों पर दोबारा सड़क पर उतर सकता है.

मंगल-राहु दे रहे विरोध बढ़ने का संकेत

15 अगस्त 1947 की भारत की स्वतंत्रता कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि की है. इस समय मंगल की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है.

मंगल पुलिस, आक्रोश, साहस, चोट और सड़क पर होने वाले संघर्ष का कारक है. राहु सोशल मीडिया, वायरल वीडियो, अचानक उभरने वाले संगठन और व्यवस्था के प्रति अविश्वास को दिखाता है. दोनों ग्रहों की अवधि में छोटी घटना भी तेजी से बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है.

भारत की कुंडली में मंगल दूसरे भाव में बैठा है. मेदिनी ज्योतिष में दूसरा भाव अर्थव्यवस्था के साथ नेताओं की वाणी और राष्ट्रीय संवाद को भी दिखाता है. मंगल यहां राजनीतिक भाषा में तीखापन बढ़ाता है.

सितंबर में किसी मंत्री, विपक्षी नेता, पुलिस अधिकारी या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का बयान स्थिति बिगाड़ सकता है. किसी वीडियो का एक हिस्सा वायरल होने के बाद पूरी बहस का रुख बदल सकता है. इसलिए इस महीने नुकसान घटना से ज्यादा उस पर दी गई राजनीतिक प्रतिक्रिया से हो सकता है.

सितंबर में तीन स्तरों पर सक्रिय है बुध

सितंबर की राजनीति में बुध की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. विंशोत्तरी दशा में मंगल-राहु के भीतर बुध का प्रभाव महीने के अधिकांश हिस्से में बना रहेगा. योगिनी दशा में भी बुध के स्वामित्व वाली भद्रिका अवधि चल रही है. 7 सितंबर को गोचर का बुध अपनी उच्च राशि कन्या में प्रवेश करेगा.

बुध विद्यार्थी, परीक्षा, दस्तावेज, मीडिया, तकनीक और सरकारी आंकड़ों का कारक है. यही कारण है कि इस समय देश के कई गर्म मुद्दे कागज और डेटा से जुड़े हैं.

भर्ती में खाली पद कितने हैं? परीक्षा में गड़बड़ी कहां हुई? मतदाता सूची से नाम क्यों हटे? जातिगत जनगणना में लोगों की जाति किस आधार पर दर्ज होगी? पुलिस के पास कार्रवाई न करने का क्या आधार था? सितंबर में इन प्रश्नों के जवाब केवल भाषण से नहीं दिए जा सकेंगे.

7 से 16 सितंबर के बीच युवा और विपक्षी संगठन दस्तावेजों तथा आंकड़ों के साथ सरकार को घेर सकते हैं. सरकार भी भर्ती, परीक्षा सुधार या जांच से जुड़ी घोषणा कर सकती है. राहत तभी मिलेगी जब घोषणा के साथ स्पष्ट समयसीमा भी दी जाए.

युवा फिर बन सकते हैं आंदोलन का चेहरा

भारत के 2026 के वर्षफल में मुंथा पंचम भाव में है. पंचम भाव विद्यार्थी, युवा, शिक्षा और नई राजनीतिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है. यह स्थिति बताती है कि 2026-27 में युवाओं का मूड सरकार की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा.

जुलाई के आंदोलन के बाद भी परीक्षा, भर्ती और रोजगार से जुड़ी मूल समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं. इसलिए किसी नए विवाद में पहले से नाराज अभ्यर्थी और छात्र भी शामिल हो सकते हैं.

वर्षफल में मुंथा का स्वामी गुरु बारहवें भाव में है. इससे संकेत मिलता है कि युवा असंतोष को शांत करने के लिए सरकार को आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाना पड़ सकता है. केवल अपील या नई समिति बनाना पर्याप्त नहीं होगा.

यदि भर्ती कैलेंडर, परीक्षा सुधार और खाली पदों पर ठोस घोषणा होती है तो विरोध कमजोर पड़ सकता है. यदि फैसले टलते रहे तो दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान या दूसरे राज्यों में भी प्रदर्शन दिखाई दे सकते हैं.

सरकार मजबूत, लेकिन प्रशासन कमजोर कड़ी

भारत की कुंडली के षड्बल में सूर्य और मंगल मजबूत हैं. सूर्य सरकार तथा शीर्ष नेतृत्व का कारक है. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक स्थिति पर सितंबर में सीधा संकट नहीं दिखाई देता.

दशमांश कुंडली में सूर्य दसवें भाव में है. यह सरकार को कठिन स्थिति में भी नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता देता है. लेकिन भारत की कुंडली के भावबल में दसवां भाव सबसे कमजोर है. दसवां भाव प्रशासन, शासन और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का होता है.

इसका अर्थ है कि सरकार राजनीतिक रूप से सुरक्षित रह सकती है, लेकिन किसी पुलिस अधिकारी, विभाग या सरकारी संस्था की चूक उसे रक्षात्मक बना सकती है. आंदोलन के बाद जांच, गिरफ्तारी, FIR की धाराओं या प्रक्रिया में बदलाव की मांग उठ सकती है.

समय पर निष्पक्ष कार्रवाई हुई तो पीएम मोदी सरकार स्थिति संभाल सकती है. यदि अधिकारियों के बचाव में देरी हुई तो मामला सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की जवाबदेही तक पहुंच सकता है.

राहुल गांधी को कहां मिल सकता है अवसर?

2026 के वर्षफल में राहु सातवें भाव में है. मेदिनी ज्योतिष में सातवां भाव विपक्ष, गठबंधन और सरकार के सामने खड़े खुले विरोध को दिखाता है.

राहुल गांधी यदि युवा, दलित, महिला सुरक्षा, भर्ती और पुलिस जवाबदेही को एक साझा राजनीतिक मुद्दे में बदलते हैं तो सितंबर में उनकी सक्रियता बढ़ सकती है. जुलाई की तरह वे प्रदर्शनकारियों से मिलकर या सोशल मीडिया के जरिए विपक्षी अभियान को दिशा दे सकते हैं.

लेकिन राहु विपक्ष के भीतर भ्रम भी पैदा करता है. कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी और अन्य दल किसी घटना पर साथ आ सकते हैं, लेकिन लंबे अभियान में उनके अलग राजनीतिक हित सामने आ सकते हैं. इसलिए राहुल गांधी को अवसर जरूर मिलेगा, पर उसका पूरा लाभ विपक्षी एकता पर निर्भर करेगा.

आरक्षण और जातिगत जनगणना भी बन सकते हैं चिंगारी

भारत के वर्षफल में वक्री शनि आठवें भाव में है. यह पुराने सामाजिक विवाद, छिपे रिकॉर्ड और व्यवस्था में बड़े बदलाव के प्रश्न दोबारा उठाता है.

जातिगत जनगणना के तरीके को लेकर सरकारी स्तर पर मतभेद सामने आए हैं. दूसरी तरफ महाराष्ट्र में मराठा और OBC आरक्षण को लेकर तनाव बना हुआ है. एक समुदाय को राहत मिलने पर दूसरे वर्ग में अपनी हिस्सेदारी कम होने का डर बढ़ सकता है.

18 सितंबर के बाद आरक्षण से जुड़ा कोई फैसला या तीखा बयान प्रदर्शन का कारण बन सकता है. सरकार सितंबर में अंतिम निर्णय देने के बजाय जांच, सत्यापन या समिति के जरिए समय लेने का प्रयास कर सकती है.

महंगाई से आंदोलन को मिल सकता है आम जनता का साथ

अकेले छात्र या सामाजिक संगठन का विरोध हमेशा जन आंदोलन नहीं बनता. उसे व्यापक समर्थन तब मिलता है जब आम परिवार भी आर्थिक परेशानी महसूस कर रहा हो.

खाद्य पदार्थ, LPG, ईंधन और परिवहन का खर्च बढ़ा तो युवा आंदोलन को परिवारों का समर्थन मिल सकता है. GDP की मजबूत वृद्धि सरकार को अपनी उपलब्धियां बताने का अवसर देगी. लेकिन आम जनता विकास दर से पहले राशन का बिल, नौकरी और महीने के अंत की बचत देखेगी.

भारत की भावचलित कुंडली में सूर्य और शनि चौथे भाव में हैं. चौथा भाव जनता और घरेलू संतोष का है. सूर्य सत्ता और शनि आम लोगों का कारक है. यह स्थिति बता रही है कि आर्थिक दबाव बढ़ने पर जनता और सरकार के बीच दूरी बढ़ सकती है.

शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण सरकार महिला मतदाताओं के लिए आर्थिक सहायता या सुविधा बढ़ा सकती है. लेकिन महंगाई नियंत्रण में नहीं आई तो ऐसी घोषणा का राजनीतिक असर सीमित रहेगा.

18 से 24 सितंबर पर क्यों रहेंगी नजरें?

17 सितंबर को सूर्य कन्या में प्रवेश करेगा. इससे सरकार और प्रशासन अधिक सक्रिय होंगे. अगले दिन 18 सितंबर को मंगल कर्क राशि में पहुंच जाएगा. कर्क मंगल की नीच राशि है.

भारत की जन्मकुंडली में सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि कर्क में हैं. मंगल का यहां आना सत्ता, जनता, मीडिया, पुलिस और जनभावना को एक साथ सक्रिय करेगा.

18 से 24 सितंबर के बीच धरना, मार्च, गिरफ्तारी या पुलिस के साथ तनाव की संभावना सामान्य से अधिक है. 20 से 23 सितंबर का समय सबसे संवेदनशील दिखाई देता है. आंदोलन की शुरुआत एक शहर या संगठन से हो सकती है, लेकिन सोशल मीडिया के कारण उसका असर दूसरे राज्यों तक पहुंच सकता है.

सितंबर का अंतिम राजनीतिक संकेत

भारत की कुंडली बताती है कि सितंबर में सरकार को रोजगार, पुलिस कार्रवाई, आरक्षण और महंगाई पर जवाब देना पड़ सकता है. राहुल गांधी को इन मुद्दों के जरिए विपक्ष को सक्रिय करने का मौका मिलेगा. फिर भी विपक्ष की अपनी एकता उसकी सबसे बड़ी चुनौती रहेगी.

सितंबर का सबसे स्पष्ट संकेत सत्ता परिवर्तन नहीं, सत्ता पर बढ़ता जनदबाव है. सरकार ने संवाद, निष्पक्ष जांच और समय पर राहत का रास्ता अपनाया तो प्रदर्शन सीमित रह सकता है. यदि किसी संवेदनशील मामले को टाला गया या विरोध पर कठोर कार्रवाई हुई तो 18 से 24 सितंबर के बीच जुलाई के जंतर-मंतर आंदोलन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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