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5:45 बजे PM मोदी से मिलेंगे Xi Jinping, सीमा पर बनेगी बात या चीन रखेगा शर्त? कुंडली का संकेत

Modi Xi Meeting: सात साल बाद भारत आए Xi Jinping आज PM मोदी से मिलेंगे. सीमा, व्यापार और चीन की संभावित शर्तों पर दोनों देशों की कुंडली क्या संकेत दे रही है?

PM Modi Xi Jinping Meeting: दिल्ली में दोपहर ढल रही है. भारत मंडपम के भीतर एक के बाद एक बैठक हो रही है. मगर सबकी नजर शाम 5 बजकर 45 मिनट पर है. इसी समय PM नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठेंगे.

मेज पर सीमा, व्यापार और निवेश की बातें होंगी. पीछे दोनों देशों के झंडे होंगे. लेकिन उस कमरे में गलवान की याद भी मौजूद रहेगी. वह घटना, जिसने भारत और चीन के रिश्तों से भरोसा लगभग मिटा दिया था.

शी सात साल बाद भारत आए हैं. इसलिए सवाल उनके आने का नहीं है. असली सवाल यह है कि वह PM मोदी के सामने क्या रखेंगे.

सीमा पर राहत का प्रस्ताव या रिश्ते सुधारने के बदले कोई नई शर्त? आकाश के संकेत दिलचस्प हैं. बातचीत का दरवाजा खुलता दिखाई दे रहा है, लेकिन उसके ठीक पीछे एक कठिन सौदा भी खड़ा है.

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सात साल में बदल चुकी है पूरी तस्वीर

शी जिनपिंग पिछली बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे. महाबलीपुरम में PM मोदी के साथ उनकी मुलाकात हुई थी. समुद्र किनारे दोनों नेताओं की तस्वीरों को देखकर लगा था कि भारत और चीन पुराने विवाद पीछे छोड़ सकते हैं.

फिर जून 2020 की एक रात आई. गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिक भिड़ गए. जवानों की जान गई. सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ने लगी. भारत ने चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया. चीनी निवेश की जांच कड़ी हुई. सीधी उड़ानें बंद हो गईं.

पहाड़ वही रहे, लेकिन उनके बीच अविश्वास की एक नई दीवार खड़ी हो गई. अब दोनों देश उसी दीवार में रास्ता तलाश रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट मुताबिक PM मोदी और शी जिनपिंग की बैठक शाम 5:45 बजे निर्धारित है.

मुलाकात से पहले चीन ने खोला एक रास्ता

शी के दिल्ली पहुंचने से ठीक पहले China Southern Airlines ने Guangzhou-New Delhi की सीधी उड़ान फिर शुरू करने की घोषणा की. करीब छह साल से बंद यह सेवा 21 सितंबर से बहाल होगी.

खबर छोटी लग सकती है, लेकिन कूटनीति में ऐसे कदम बेवजह नहीं उठाए जाते. उड़ान शुरू होने से छात्रों, कारोबारियों और यात्रियों को राहत मिलेगी. दोनों देशों के बीच आवाजाही बढ़ेगी. माहौल पहले से सामान्य दिखेगा.

मगर उड़ान का रास्ता खुलना और सीमा की गांठ खुलना दो अलग बातें हैं. चीन अक्सर पहले एक छोटा कदम बढ़ाता है. फिर बड़े मुद्दे पर अपनी कीमत रखता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि सीमा पर नरमी दिखाने के बदले वह भारत से क्या मांग सकता है.

चीन की नजर कहां हो सकती है?

भारत में चीनी कंपनियों और निवेश के लिए नियम पहले से सख्त हैं. टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऐप, इलेक्ट्रिक वाहन और संवेदनशील तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न है.

चीन चाहेगा कि भारत इनमें कुछ रास्ते खोले. वह चीनी कंपनियों के लिए आसान नियम, तेज मंजूरी और भारतीय बाजार में अधिक जगह मांग सकता है.

उसकी दूसरी चिंता अमेरिका है. भारत और अमेरिका के बीच रक्षा तथा तकनीक का सहयोग बढ़ रहा है. चीन चाहेगा कि यह साझेदारी उसके खिलाफ खुले मोर्चे में न बदले.

इसके बदले बीजिंग सीमा पर सैन्य तनाव कम करने, कमांडर स्तर की बैठकें बढ़ाने, वीजा आसान करने और यात्रियों की आवाजाही सामान्य करने का प्रस्ताव दे सकता है.

क्या PM मोदी यह सौदा स्वीकार करेंगे? यहीं से कुंडली की कहानी शुरू होती है.

भारत की वर्षकुंडली में सीधा रास्ता नहीं

भारत की मौजूदा वर्षकुंडली 15 अगस्त 2026 से शुरू हुई है. इसका लग्न सिंह है. वर्षकुंडली में लग्नेश सूर्य भारत की स्थिति दिखाता है. विदेश से बातचीत के लिए सातवें भाव और उसके स्वामी शनि को देखा जाता है. सूर्य बारहवें भाव में है, जबकि शनि आठवें भाव में बैठा है.

दोनों ही भाव पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों, दबाव, पुराने विवाद और गोपनीय शर्तों से जुड़े हैं.

इसका पहला संकेत साफ है. बैठक केवल उस एजेंडे तक सीमित नहीं रहेगी जो बाहर बताया जाएगा. कुछ कठिन बातें बंद कमरे में होंगी.

सूर्य और शनि के बीच ताजिक संबंध तो बन रहा है, लेकिन ग्रह एक-दूसरे के करीब आने के बजाय अलग होने की स्थिति में हैं. इसे इशराफ कहा जाता है.

आसान भाषा में कहें तो बात पहले से चल रही है, लेकिन मंजिल अभी हाथ नहीं आई.

भारत और चीन के सैन्य अधिकारी पहले भी कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. तनाव कुछ जगह घटा है. फिर भी सीमा का अंतिम हल नहीं निकला. आज की बैठक उसी अधूरी कहानी का अगला हिस्सा हो सकती है.

नेताओं से शुरू हुई बात अधिकारी आगे बढ़ाएंगे

भारत की वर्षकुंडली में बुध की भूमिका सबसे दिलचस्प है. बुध बातचीत, दस्तावेज, व्यापार, तकनीक और अधिकारियों का ग्रह है. वह सूर्य तथा शनि के बीच संपर्क की कड़ी बनने की स्थिति में है. ताजिक ज्योतिष में इसे नक्त योग जैसी मध्यस्थ भूमिका माना जा सकता है.

इसका सीधा अर्थ समझिए. PM मोदी और शी राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं. लेकिन असली काम दोनों देशों के सैन्य अधिकारी, विशेष प्रतिनिधि, राजनयिक और व्यापार विशेषज्ञ करेंगे.

सीमा पर गश्त कैसे होगी. सैनिकों के आमने-सामने आने से कैसे बचा जाएगा. वीजा और उड़ानों की व्यवस्था क्या होगी. व्यापार की रुकावटें कैसे हटेंगी.

आज इन सवालों के अंतिम जवाब शायद न मिलें. मगर इन्हें हल करने के लिए अधिकारियों को नया काम मिल सकता है.

आज ही बड़ी डील क्यों मुश्किल है?

ताजिक वर्षफल में किसी काम के आसानी से पूरा होने के लिए लग्नेश और कार्येश के बीच मजबूत इत्थशाल देखा जाता है. चंद्रमा भी उनका साथ दे तो कम्बूल योग बनता है. यह कार्य सिद्ध होने का मजबूत संकेत माना जाता है.

भारत की वर्षकुंडली में ऐसा साफ और पूरा कम्बूल नहीं बन रहा. इसका मतलब बैठक बेकार नहीं होगी. बातचीत रुकने वाली भी नहीं है. मगर आज ही अंतिम सीमा समझौते पर मुहर लगने का संकेत कमजोर है.

यह मुलाकात दरवाजा खोल सकती है. रास्ता तय कर सकती है. मंजिल तक पहुंचना अभी बाकी रहेगा.

राहु बता रहा है, साझा बयान पूरा सच नहीं होगा

भारत की वर्षकुंडली में इस समय राहु की मुद्दा दशा चल रही है. यह अवधि 9 अक्टूबर तक रहेगी. राहु सातवें भाव में है.

सातवां भाव दूसरे देशों, समझौतों और विरोधियों से जुड़ा है. राहु यहां विदेशी हलचल बढ़ाता है. अचानक बड़ी बैठक करा सकता है. रिश्ते सुधारने की चर्चा भी तेज कर सकता है.

लेकिन राहु की अपनी आदत है. वह तस्वीर को पूरी तरह साफ नहीं रहने देता. बैठक के बाद दोनों नेता शांति, सहयोग और स्थिर संबंधों की बात कर सकते हैं. मगर असली सौदेबाजी साझा बयान में न दिखाई दे, इसकी संभावना बनी हुई है.

चीन क्या चाहता है. भारत ने कौन-सी शर्त रखी. किस प्रस्ताव पर आगे विचार होगा. इनमें से कई बातें बाद में सामने आ सकती हैं.

चीन की वर्षकुंडली में लाभ की तलाश

इस बैठक पर चीन की 2 अक्टूबर 2025 से 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली वर्षकुंडली लागू होगी. उसके बाद शुरू होने वाली कुंडली को अभी देखना गलत होगा.

चीन के इस वर्षफल में सिंह लग्न है. मुन्था दशम भाव में है. दशम भाव सरकार, सत्ता और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा दिखाता है.

यानी शी की भारत यात्रा केवल सीमा विवाद संभालने के लिए नहीं है. चीन दुनिया को यह भी दिखाना चाहता है कि एशिया की दो बड़ी शक्तियां उसके नेतृत्व में बात कर सकती हैं.

25 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चीन पर गुरु की मुद्दा दशा है. वर्षकुंडली में गुरु लाभ के ग्यारहवें भाव में बैठा है.

यह चीन की मंशा खोलता है. बीजिंग इस यात्रा से कोई ठोस फायदा चाहता है. व्यापार, निवेश, तकनीक या भारत के रणनीतिक रुख में से कुछ ऐसा, जिसे वह अपने लिए सफलता बता सके.

लेकिन यहीं कहानी पलटती है. चीन की जन्मकुंडली में लाभ का ग्यारहवां भाव कमजोर है. गुरु उम्मीद बढ़ा रहा है, मगर कमजोर लाभ भाव बता रहा है कि चीन को अपनी सभी मांगों पर सफलता नहीं मिलेगी. वह मांग ज्यादा सकता है. पा कम सकता है.

चीन भी अंतिम समझौते से दूर

चीन की वर्षकुंडली में लग्नेश सूर्य और विदेश-वार्ता का कार्येश शनि आमने-सामने हैं. दोनों के बीच संबंध है, मगर भारत की तरह यहां भी साफ इत्थशाल नहीं बनता. ग्रहों की स्थिति इशराफ की ओर जाती है. यानी संपर्क बना हुआ है, पर दोनों पक्ष अभी अपनी-अपनी दिशा में खड़े हैं.

चीन के वर्षफल में भी पूर्ण कम्बूल का मजबूत समर्थन नहीं मिलता. इसका अर्थ है कि शी जिनपिंग बैठक को सफल दिखाना चाहेंगे. कोई छोटी घोषणा सामने आ सकती है. बातचीत जारी रखने की बात हो सकती है. मगर चीन भी आज अपनी पूरी रणनीतिक सूची पूरी नहीं करा पाएगा.

सीमा पर दोनों देश क्यों अड़े रहेंगे? भूमि और सीमा को समझने के लिए चतुर्थांश कुंडली यानी D4 देखी जाती है.

भारत की D4 कुंडली में गुरु कर्क राशि में उच्च का है. शनि मकर राशि में अपनी जगह पर मजबूत है. यह अपनी भूमि, सीमा और लंबे समय के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता दिखाता है.

चीन की D4 में मंगल मकर में उच्च का और शनि कुर कुंभ में मजबूत है. इसलिए सीमा पर चीन का रुख आसानी से नरम नहीं होगा. वह लंबे समय तक दबाव बनाए रखने और जमीन पर अपनी स्थिति मजबूत रखने की कोशिश करेगा.

मगर चीन की इसी कुंडली में बुध कमजोर है. बुध बातचीत और लिखित समझौते का ग्रह है. इसलिए चीन जो कहे और सीमा पर जो करे, दोनों को अलग-अलग देखना होगा.

कुंडलियां किसी बड़े भूभाग विवाद के तत्काल अंत का संकेत नहीं देतीं. हां, सैनिकों की दूरी, गश्त के नियम और टकराव रोकने की व्यवस्था पर आगे बढ़ा जा सकता है.

PM मोदी के पास भी मजबूत पत्ते हैं

भारत की कुंडली में शुक्र और मंगल सबसे अधिक शक्तिशाली ग्रहों में हैं. शुक्र व्यापार, कूटनीति और समझौता दिखाता है. मंगल सेना, सुरक्षा और सीमा का कारक है.

दोनों का मजबूत होना भारत की स्थिति स्पष्ट करता है. PM मोदी व्यापार का रास्ता खोल सकते हैं. लेकिन सुरक्षा को उससे अलग नहीं करेंगे.

चीन निवेश में राहत चाहेगा तो भारत सीमा पर जमीन से जुड़ा भरोसा मांगेगा. चीन बाजार की बात करेगा तो भारत बराबर market access का प्रश्न उठा सकता है.

भारत की कुंडली में गुरु अपेक्षाकृत कमजोर है. गुरु व्यापक भरोसे और दीर्घकालिक समझौते का कारक है. इसलिए छोटी सहमति संभव है. बड़ी दोस्ती का एलान अभी जल्दबाजी होगी.

बैठक का नक्षत्र भारत को क्या दे रहा है?

शाम 5:45 बजे चंद्रमा कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में रहेगा. द्वितीया तिथि, शुक्ल योग और बालव करण का प्रभाव होगा.

हस्त का अर्थ है हाथ. यह हाथ मिलाता भी है और अपनी पकड़ मजबूत भी करता है. आज दोनों नेता हाथ मिलाएंगे, मगर दोनों चाहेंगे कि बातचीत की कमान उनके हाथ में रहे.

भारत का जन्म नक्षत्र पुष्य है. पुष्य से हस्त की गणना करने पर साधना तारा बनता है. साधना तारा किसी कठिन लक्ष्य की ओर एक कदम आगे बढ़ने का संकेत देता है.

चीन का जन्म नक्षत्र श्रवण है. वहां से हस्त जन्म तारा बनता है. इससे चीन अपने सम्मान, प्रतिष्ठा और पुराने दावों को लेकर अधिक सतर्क रहेगा.

भारत समाधान की तरफ कदम बढ़ाना चाहेगा. चीन यह देखेगा कि उस कदम से वह कमजोर न दिखाई दे.

आज की गोचर जमीन पर भारत थोड़ा आगे

बैठक के समय चंद्रमा कन्या राशि में होगा. भारत की सर्वाष्टकवर्ग तालिका में कन्या राशि को 30 बिंदु मिले हैं. चीन की कुंडली में इसी राशि को 22 बिंदु प्राप्त हैं.

कन्या हर बात का हिसाब रखती है. दस्तावेज पढ़ती है. छोटी शर्तों पर नजर रखती है. भावनाओं से अधिक व्यवहार देखती है.

यह स्थिति PM मोदी को प्रस्ताव की बारीकियों पर पकड़ बनाने का अवसर देती है. चीन वार्ता की तैयारी में मजबूत है. मगर आज भारत उसके हर प्रस्ताव को जांचने और अपनी शर्त रखने की बेहतर स्थिति में दिखाई देता है.

तस्वीर आज आएगी, असली जवाब बाद में

आज की बैठक से तीन तरह के परिणाम निकल सकते हैं. सबसे मजबूत संभावना छोटी और व्यावहारिक घोषणाओं की है. सीधी उड़ान, वीजा, व्यापारिक सप्लाई या सैन्य बातचीत पर कोई कदम सामने आ सकता है.

दूसरी संभावना अधिकारियों को सीमा और व्यापार के लिए नया रोडमैप बनाने का निर्देश मिलने की है. भारत की वर्षकुंडली में बुध की भूमिका इसी तरफ इशारा करती है.

सबसे कमजोर संभावना अंतिम सीमा समाधान या भारत-चीन के पूर्ण strategic reset की है. दोनों देशों के ताजिक योग अभी उस मंजिल तक नहीं पहुंचते.

शाम 5:45 बजे PM मोदी और शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे. कैमरों के सामने मुस्कान दिखाई देगी. शब्द बहुत सोचकर चुने जाएंगे.

मगर मुलाकात की सफलता तस्वीर तय नहीं करेगी. असली जवाब सीमा की खामोशी में मिलेगा. चीन के अगले कदम में मिलेगा. और उस दिन मिलेगा, जब बातचीत में कही गई बात जमीन पर दिखाई देगी.

ग्रह दरवाजा खुलने का संकेत दे रहे हैं. लेकिन उसके पार जाने से पहले दोनों देश अपनी-अपनी शर्तें मेज पर रखेंगे. रास्ता आज खुल सकता है. मंजिल अभी दूर है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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