Marigold Farming:गेंदा की खेती कैसे शुरू करें किसान, जानें 1 बीघे में कितना होता है प्रॉफिट?
Marigold Farming: अगर आप भी ढूंढ रहे हैं कोई ऐसी नकदी फसल जिसमें लागत, मेहनत हो न्यूनतम और मुनाफा हो छप्परफाड़ तो आइए आपको बताते हैं ऐसी ही एक फसल के बारे में.

Marigold Farming: भारत में बीते कई सालों से पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, धान और गन्ने की तुलना में बागवानी और फूलों की खेती किसानों के लिए एक अत्यधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. ऐसे में फूलों की दुनिया में गेंदा एक ऐसी सदाबहार फसल है, जिसकी मांग बाजार में साल के बारह महीने बनी रहती है. चाहे शादियों का सीजन हो, दीवाली-दशहरा जैसे बड़े त्योहार हों, राजनीतिक रैलियां हों या रोजमर्रा के धार्मिक अनुष्ठान, गेंदे के फूलों के बिना हर आयोजन अधूरा माना जाता है.
बाजार में इसकी लगातार बनी रहने वाली मांग और बेहद कम समय में तैयार होने की खूबी के कारण ही इसे किसानों के लिए नकद नारायण या पीला सोना भी कहा जाता है. अगर आप भी कम जमीन, सीमित सिंचाई संसाधनों और न्यूनतम लागत के साथ भारी मुनाफा देने वाले बिजनेस की तलाश में हैं, तो गेंदे की कमर्शियल खेती आपके लिए सबसे बढ़िया ऑप्शन है. क्योंकि मात्र 3 महीने के भीतर यह फसल किसानों को इंवेस्ट की गई राशि से कई गुना अधिक मुनाफा देना शुरू कर देती है.
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गेंदा की खेती कैसे शुरू करें?
गेंदा की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको सही समय और सही सीजन का चुनाव करना होता है. गेंदे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती साल में तीन बार खरीफ (जून-जुलाई), रबी (सितंबर-अक्टूबर) और जायद (फरवरी-मार्च) के मौसम में आसानी से की जा सकती है. खेती की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा करना होता है और उसमें पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद मिलाकर पाटा चलाना होता है, जिससे खेत समतल हो जाता है. इसके बाद आपको उन्नत किस्मों के बीजों का चुनाव करना होता है. वहीं, अधिक मुनाफे के लिए आप अफ्रीकन गेंदा (जैसे पूसा नारंगी, पूसा बसंती) या फ्रेंच गेंदा और हाइब्रिड कलकत्ती लड्डू किस्मों को चुन सकते हैं.
इसके बाद बीज की सीधी बुआई करने के बजाय हमेशा पहले नर्सरी तैयार करनी चाहिए. जैसे एक एकड़ या बीघे के अनुपात में ऊंचे बेड बनाकर बीजों को बो दें और हल्की सिंचाई करें. फिर लगभग 25 से 30 दिनों में जब नर्सरी के पौधे 4 से 5 पत्ती वाले और करीब 10-15 सेंटीमीटर लंबे हो जाएं, तब वे मुख्य खेत में रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. यहां इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पौधों की रोपाई हमेशा शाम के समय (धूप ढलने के बाद) करनी चाहिए जिससे पौधे मुरझाएं नहीं.
इन चीजों का जरूर रखें ध्यान
साथ ही इसका भी ध्यान दें कि खेत में कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी 45×45 सेंटीमीटर या 60×45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए जिससे फूलों के विकास के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. वहीं, रोपाई के तुरंत बाद खेत में हल्की सिंचाई जरूरी करनी चाहिए. इसके साथ ही फसल की अच्छी ग्रोथ के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खर- पतवार नियंत्रण भी करते रहना चाहिए. फिर जब पौधे रोपाई के बाद करीब 40-45 दिन बीत जाएं, तब उनके ऊपरी मुख्य सिरे को 2-3 सेंटीमीटर तोड़ देना चाहिए, जिसे कृषि विज्ञान में पिंचिंग या शीर्ष कर्तन कहा जाता है. ऐसा करने से पौधे में बगल से अधिक शाखाएं निकलती हैं और जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, फूल उतने ही अधिक मात्रा में आएंगे.
एक बीघे में लागत और उत्पादन
लागत - 1 बीघा खेत में बीज,नर्सरी की तैयारी,खेत की जुताई,गोबर व रासायनिक खाद (डीएपी या पोटाश),कीटनाशक,सिंचाई और तुड़ाई की मजदूरी मिलाकर कुल 8000 से 12000 रुपये तक का खर्च आता है.
उत्पादन- वहीं, अगर बात करें उत्पादन कि तो वैज्ञानिक और मॉडर्न तरीके से देखरेख करने पर 1 बीघे से लगभग 15 से 20 क्विंटल (1500 से 2000 किलोग्राम) तक हाई क्वालिटी वाले ताजे फूलों का उत्पादन होता है.
एक बीघे में कितना होता है प्रॉफिट?
गेंदा फूल का बाजार भाव पूरी तरह से डिमांड और सीजन पर निर्भर करता है. आम दिनों में या ऑफ-सीजन में इसका थोक भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम आसानी से मिल जाता है. वहीं, त्योहारों (दीवाली, दशहरा) और शादियों के सीजन के दौरान यही भाव बढ़कर 80 से लेकर 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है. अगर एक सुरक्षित और न्यूनतम औसत भाव 40 रुपये प्रति किलोग्राम भी मानकर चल जाए, तो 1 बीघे से प्राप्त 15 क्विंटल (1500 किलो) फूलों को बेचने पर कुल आमदनी 1500x40 = 60000 होती है. इस कुल आमदनी में से अगर अधिकतम लागत 10000 रुपये को घटा भी दें, तो किसानों को मात्र 90 दिनों के भीतर 1 बीघे से 50000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. वहीं, अगर आपकी फसल बिल्कुल त्योहारों के सटीक समय पर बाजार में पहुंचती है, तो यही मुनाफा 80000 से लेकर 100000 प्रति बीघा तक भी जा सकता है.
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Source: IOCL

























