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छोटे गार्डन में बड़ी पैदावार, घर पर कैसे उगाएं ऑर्गेनिक लहसुन; जानें

अगर आपके घर में छोटा-सा किचन गार्डन बालकनी या छत है और आप वहां ताजी लहसुन उगाना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए काम की हो सकती है जानें कैसे..

लहसुन की खासियत यह है कि इसे बहुत कम जगह में भी उगाया जा सकता है मिट्टी हल्की हो, पानी ज्यादा देर खड़ा न रहे और पौधों को इतनी धूप मिल जाए कि वो आसानी से बढ़ सकें बस फिर पैदावार शानदार मिलती है किचन गार्डन में लहसुन लगाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना पड़ता है ताकि पौधे अच्छे से तैयार हों और फसल बढ़िया आए.

 बीज कैसे चुनें?

लहसुन लगाने के लिए हमेशा बड़ी और स्वस्थ कलियां ही चुनें जितनी मोटी कली होगी, उतनी ही अच्छी उसकी गांठ बनेगी आप चाहें तो मार्केट में मिलने वाले NSC वाले पैकेट ले सकते हैं, लेकिन अगर घर पर रखा हुआ लहसुन अच्छा है तो उसकी कलियां भी आराम से इस्तेमाल की जा सकती हैं.

मिट्टी कैसे तैयार करें?

लहसुन के लिए हल्की, भुरभुरी और ज्यादा गीली न रहने वाली मिट्टी सबसे सही रहती है गार्डन की मिट्टी में थोड़ा गोबर खाद या कम्पोस्ट मिला दें ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण मिले अगर आप गमले में उगा रहे हैं, तो 12–15 इंच का गमला बिल्कुल ठीक रहता है.

 बुवाई कैसे करनी है?

लहसुन की कलियों को छिलके समेत ही लगाएं और नुकीला हिस्सा हमेशा ऊपर की ओर रखें कली को लगभग 1–1.5 इंच मिट्टी में दबा दें और पौधों के बीच 4–5 सेंटीमीटर की दूरी रखें, ताकि उन्हें फैलने की जगह मिल सके और गांठें अच्छी बनें.

पानी और धूप की जरूरत

लहसुन को रोजाना पानी देने की ज़रूरत नहीं होती हर 2–3 दिन में हल्की सिंचाई काफी रहती है बस ध्यान रखें कि मिट्टी हल्की-सी नम रहे पर पानी जमा न हो रोज 4 5 घंटे धूप मिल जाए तो पौधे बहुत अच्छे से बढ़ते हैं.

कैसे करें देखभाल? 

लहसुन के पौधों के आसपास घास-फूस न रहने दें वरना उनकी बढ़वार रुक सकती है हर 15 20 दिन में हल्की गुड़ाई करते रहें ताकि मिट्टी नरम बनी रहे और जड़ों को हवा मिल सके हर 30–40 दिन में थोड़ी-सी कम्पोस्ट डाल देने से पौधे बहुत अच्छे से बढ़ते हैं कीटों से बचाने के लिए किचन गार्डन में नीम का घोल सबसे अच्छा रहता है 10–15 दिन में एक बार छिड़क दें.

 कब मिलेगी फसल?

लहसुन पूरी तरह तैयार होने में लगभग 4–5 महीने लेता है जब इसके पत्ते सूखने और झुकने लगें तो समझ लें कि आपकी फसल खुदाई के लिए बिल्कुल तैयार है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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