Property News: घर खरीदने से पहले समझ लें बिल्डर्स का ये खेल, नहीं तो डूब जाएगी सालों की गाढ़ी कमाई
Property Investment Guide: इन दिनों शहरों और महानगरों में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. कई लोग इसे सिर्फ महंगाई मानते हैं, लेकिन इसके पीछे असली कारण कुछ ओर ही होता है. जानिए.

- मार्केट डिमांड, गतिविधि और इमोशनल खरीदारी से बचें, सोच समझकर निवेश करें।
Property Investment Guide: इन दिनों शहरों, महानगरों में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी प्रॉपर्टी की कीमतें अचानक क्यों बढ़ती है? और कैसे बढ़ती है? तो आप को समझना होगा खरीदार और विक्रेता के बीच का तालमेल. कभी- कभी प्रॉपर्टी की कीमतें इमोशनल टच, मार्केटिंग तकनीक और मार्केटिंग ट्रेंड की वजह से बिक जाती है.
एक चीज़ और जो खरीदार को हमेशा से प्रॉपर्टी की ओर लुभाती है. वो आस-पास प्राइम लोकेशन का होना. हालांकि प्राइम लोकेशन के बावजूद हर घरों की कीमत महंगी नहीं होती. लेकिन व्यापारी यह सब घरों को अच्छे-अच्छे दामों में बेचने के लिए करते है. ओवर प्राइज़ को समझना जरूरी है, कैसे एक बायर्स की सालों की मेहनत की कमाई एक गलती और गलत इनवेस्टमेंट के चलते खराब हो सकती है
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दूसरें इलाकों से तुलना करना
जब भी बायर्स प्रॉपर्टी खरीदें तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि किसी भी इलाके में एक समान दिखने वाली दोनों प्रॉपर्टीयों में क्या खास है, क्या अलग है इसको अच्छे से जांच परख लें.गौरतलब है कि खरीदार हमेशा इस बात का ध्यान रखें जब भी वह प्रॉपर्टी खरीदने जाएं तो एक समान दिखने वाली प्रॉपर्टी के दामों का फर्क भी अच्छे से जान लें.
प्रोप्रटी की अलग -अलग कीमत होने की यह भी बड़ी वजह होती है कि बिल्डिंग की अच्छी कंडीशन, अच्छा व्यू और कभी -कभी खुद बिल्डिंग की वजह से. जिससे खरीदार को लगता है इसलिए प्रॉपर्टी की कीमत ज्यादा है. पिछली ट्रांजेक्शन भी खरीददार को समझने में मदद करती है कि इलाकें में दाम ज्यादा क्यों है.
खरीदार को इस बात की जानकारी होना जरूरी है, जब वह घर या अपार्टमांट खरीदे तो वह इस बात का ध्यान रखें कि उस जगह या आस-पास जमीन की कीमत कितना प्रति वर्ग फुट है और इस बात का पता चलता है कि दूसरे इलाके के दाम अलग -अलग क्यों है. प्रॉपर्टी की कुल कीमत और प्रति वर्ग फुट को गुढ़ा करने से प्रॉपर्टी की सही कीमत का पता चलता है. हालांकि खरीददार को लगता है कि बिल्डिंग कंडिशन, फ्लोर लेवल, पार्किंग से ही जमीन की कीमत तय होती है.
मार्किट डिमांड और मार्किट गतिविधि जानें
मार्किट में चल रही गतिविधि ही खरीददार को जानकारी दे देती है कि,जब दो एक समान दिखने वाली प्रॉपर्टी मार्किट में बनी रहती है. प्रॉपर्टी की सही कीमत का उस समय पता चलता है जब व्यापारी उस प्रॉपर्टी को कम कीमत में बेच देता और फिर बायर्स का पता चलता है कि इस तरह और कितनी प्रॉपर्टी ज्यादा कीमत की है. जगह की लोकेशन और मार्किट डिमांड से ही पता चलता है कि खरीदार को भविष्य में प्रॉपर्टी की क्या सही कीमत मिलने वाली है और यह भी पता चलता है कि प्रॉपर्टी के दाम अधिक या सही है.
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इमोशनल खरीदारी से रहे दूर
कभी-कभी प्रॉपर्टी खरीदना लोगों के लिए उस समय इमोशनल बन जाता है. जब व्यापारी अलग -अलग ट्रिक का इस्तेमाल करते है. जैसे आखिरी यूनिट ही बची है, जल्द ही रेट बढ़ने वाले है. हालाांकि, खरीददार को यह सब चीज़ नज़रअंदाज़ करते हुए सोच समझकर ही प्रॉपर्टी खरीदना चाहिए. डाटा इकट्ठा करना, बेच खरीद को ध्यान में रखना बहुत जरूरी होता है. अगर यह सब चीज़ ध्यान में रहे तो खरीददार कभी भी धोखा नहीं खा सकता है























