Insurance Claim: क्या शादी के बाद सरनेम बदलने से रुक सकता बीमा क्लेम! कंज्यूमर फोरम ने किया क्लियर
Insurance Claim: आज के समय में जरूरी दस्तावेजों में नाम और उसकी स्पेलिंग का एक जैसा होना बेहद जरूरी हो गया है. छोटी सी गलती भी बैंकिंग, बीमा क्लेम और सरकारी कामों में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है.

- फोरम ने ब्याज और जुर्माने सहित भुगतान का आदेश दिया।
Insurance Claim: आजकल आप के किसी भी जरूरी दस्तावेजों में नाम का सही होना, उसकी स्पैलिंग बिल्कुल दूसरों दस्तावेजों में हू ब हू होना बेहद ही जरूरी हो गया. जब किसी के दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर की वजह से लोगों को जगह- जगह चक्कर काटने पड़ते है. क्या शादी के बाद सरनेम बदलना बीमा क्लेम में बाधा डाल सकता है?
साल 2012 में महिला ने कराई पॉलिसी
दिल्ली के यमुना विहार से बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है.यहां प्रीति विंडलेश नाम की एक महिला ने साल 2012 में 'आईएनजी वैश्य लाइफ इंश्योरेंस' से एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी. दिसंबर 2023 में जब इस पॉलिसी की मैच्योरिटी का समय पूरा हुआ, तो कंपनी ने उनके नाम पर करीब 5,12,069 रुपये का एक चेक जारी किया.
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खाते में नाम का मेल नहीं-बैंक
मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब महिला ने पॉलिसी क्लेम के लिए इस चेक को अपने बैंक में जमा किया. जिसके बदले में बैंक ने ग्राहक को बीमा के पैसे देने से इनकार कर दिया. बैंक ने जिसकी वजह बैंक खाते में नाम का मेल नहीं होना बताई. ऐसे में जब महिला ने इस चेक को अपने बैंक में जमा किया, तो बैंक ने बैंक खाते में नाम का मेल नहीं होना और तकनीकी नियमों की वजह बताकर बीमा की रकम देने से साफ इनकार कर दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक, यह चेक महिला के पुराने नाम 'प्रीति' पर जारी किया गया था, जबकि शादी के बाद उन्होंने अपने सभी कानूनी दस्तावेजों और बैंक खाते में नाम अपडेट करवाकर 'प्रीति विंडलेश' कर लिया था.
कंज्यूमर फोरम ने कंपनी को लगाई फटकार
महिला ने कंपनी की इस बड़ी लापरवाही से परेशान होकर उत्तर-पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग Consumer Forum से मदद की गुहार लगाई. फोरम ने बीमा कंपनी की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई. इसे 'सेवा में कमी' का दोषी मानते हुए कहा कि सिर्फ तकनीकी कारणों और शादी के बाद नाम या सरनेम बदलने की वजह से किसी उपभोक्ता के वैध और कानूनी दावे को रोका नहीं जा सकता.
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इतना ही नहीं लाखों की मैच्योरिटी राशि रोकने वाली इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए ब्याज और भारी जुर्माने समेत भुगतान का आदेश दिया है. गौरतलब है कि, बीमाकर्ता एक बीमाधारक की मौत या कोई दुर्घटना होने पर उसे कोई मंजूर राशि देने का वादा करता है. इस वादे के बदले में बीमाधारी को एक तय रकम किसी तय समय पर किसी तय समय तक देते रहने के लिये सहमत होता है.
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