आपके क्रेडिट कार्ड की कितनी होगी लिमिट, कैसे तय करते हैं बैंक?
क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करने में सबसे पहले ग्राहक की महीने की आय और रोजगार की कंडीशन को देखा जाता है. बैंक यह समझने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति हर महीने कितना कमाता है.

आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक प्लास्टिक का कार्ड भर नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरत अहम हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल, बुकिंग, बिल पेमेंट या अचानक आने वाले खर्च हर जगह क्रेडिट कार्ड काम आता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि किसी के क्रेडिट कार्ड की लिमिट लाखों रुपये तक कैसे पहुंच जाती है, जबकि किसी को केवल कुछ हजार तक लिमिट ही मिलती है. दरअसल क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करने से पहले बैंक ग्राहक की पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल का आकलन करता है. इसमें आय, नौकरी की स्थिरता, क्रेडिट स्कोर, खर्च करने की आदतें और मौजूदा लोन जैसी कई बातों को देखा जाता है. इन सभी पहलुओं के आधार पर बैंक यह तय करता है कि किसी ग्राहक को कितनी क्रेडिट लिमिट दी जाए.
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इनकम और नौकरी की स्थिरता होती है सबसे जरूरी
क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करने में सबसे पहले ग्राहक की महीने की आय और रोजगार की कंडीशन को देखा जाता है. बैंक यह समझने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति हर महीने कितना कमाता है और उसकी नौकरी या बिजनेस कितना स्थिर है. जितनी ज्यादा सैलरी है या बिजनेस इनकम होती है बैंक को उतना ही कम खतरा महसूस होता है और उसी हिसाब से ज्यादा क्रेडिट लिमिट दी जा सकती है. इसके उलट कम आय होने पर बैंक लिमिट कम रखते हैं, क्योंकि उन्हें पेमेंट में ज्यादा खतरा लगता है.
क्रेडिट स्कोर भी निभाता है बड़ी भूमिका
क्रेडिट स्कोर किसी भी व्यक्ति की वित्तीय विश्वसनीयता का संकेत माना जाता है. यह स्कोर इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पहले लिए लोन या क्रेडिट कार्ड के बिल का समय पेमेंट किया हैं या नहीं. अगर किसी ग्राहक का क्रेडिट स्कोर अच्छा है, खासकर 750 या फिर उससे ज्यादा है तो बैंक उसे भरोसेमंद मानते हैं और ज्यादा क्रेडिट लिमिट देने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं खराब स्कोर होने पर बैंक लिमिट कम रखते हैं. इसके अलावा बैंक यह भी जानते हैं कि ग्राहक पर पहले से कितना कर्ज है और उसकी आय का कितना हिस्सा ईएमआई चुकाने में जा रहा है. अगर किसी व्यक्ति की आय का बड़ा हिस्सा पहले से चल रहे लोन की किस्तों में खर्च हो रहा है तो बैंक एक्स्ट्रा खतरा लेने से बचते हैं और ज्यादा लिमिट देने में सतर्क रहते हैं.
खर्च करने की आदतों का भी होता है आकलन
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक ग्राहकों के खर्च करने के तरीके को भी समझने की कोशिश करते हैं. अगर कोई ग्राहक अपने कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करता है और समय पर पेमेंट करता है तो उसे बेहतर क्रेडिट लिमिट मिलने की संभावना बढ़ जाती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट का केवल 30 से 40 प्रतिशत तक ही उपयोग करना बेहतर माना जाता है. इससे यह संकेत मिलता है कि ग्राहक अपने खर्च को कंट्रोल करके चल रहा है.
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Source: IOCL


























