पति किन-किन आधारों पर ले सकता है पत्नी से तलाक, क्या है कानून?
आज के समाज में, पुरुष और महिला दोनों को समान कानूनी अधिकार दिए गए हैं. तलाक और भरण-पोषण के मामले में कानून लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है.

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने सोमवार (19 जनवरी) को सोशल मीडिया पर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने अपनी पत्नी अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए तलाक लेने की बात कही. ऐसे में सवाल उठने लगे कि पति के पास तलाक लेने के कौन-कौन से आधार होते हैं? इस मामले में क्या कहता है भारत का कानून?
क्या हैं पति के आधार?
शादी जीवन का एक जरूरी हिस्सा होता है. यह सिर्फ दो लोगों का मेल नहीं, बल्कि उनके परिवारों और समाज के लिए भी एक जिम्मेदारी बन जाता है. अक्सर हम यह मानते हैं कि तलाक का अधिकार और ज्यादा फायदा सिर्फ पत्नी को मिलता है, लेकिन भारतीय कानून में पति के भी तलाक और गुजारा भत्ता जैसे अधिकार समान रूप से सुरक्षित हैं. आज के समाज में पुरुष और महिला दोनों को समान कानूनी अधिकार दिए गए हैं. तलाक और भरण-पोषण के मामले में कानून लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत पति और पत्नी दोनों तलाक और गुजारा भत्ता का दावा कर सकते हैं. वहीं, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत आम तौर पर सिर्फ पत्नी ही भरण-पोषण का दावा कर सकती है.
पति किन-किन आधारों पर पत्नी से ले सकता है तलाक
भारत में पति तलाक के लिए कई आधारों पर अदालत में याचिका दायर कर सकता है. ये आधार हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 13(1) और संबंधित कानूनों में वर्णित हैं.
1. क्रूरता (Cruelty) - अगर पत्नी पति के साथ शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से क्रूर व्यवहार करती है, तो यह तलाक का एक वैध कारण बन सकता है. इसमें शारीरिक मारपीट, अपमान, आर्थिक तंगी डालना या मानसिक उत्पीड़न शामिल हो सकता है. कोर्ट सिर्फ महिला के पक्ष में नहीं जाती, अगर पति साबित कर सके कि उसके लिए वैवाहिक जीवन असहनीय हो गया है, तो तलाक मिल सकता है.
2. व्यभिचार (Adultery) - पहले यह पुरुषों के लिए ही अपराध माना जाता था, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के बाद व्यभिचार तलाक का आधार बन गया है. अगर पत्नी शादी संबंध में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है, तो पति तलाक के लिए याचिका दायर कर सकता है.
3. परित्याग (Desertion) - अगर पत्नी बिना किसी वैध कारण के पति को छोड़ देती है और लगातार दो साल तक नहीं लौटती, तो यह तलाक का आधार बन सकता है.
4. धर्म परिवर्तन (Conversion) - अगर पत्नी शादी के बाद अपने धर्म को बदल लेती है और उसके कारण वैवाहिक जीवन असंभव हो जाता है, तो पति तलाक ले सकता है.
5. मानसिक विकार (Mental Disorder) - पत्नी किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हो और सामान्य जीवन या जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ हो, तो यह तलाक का आधार बन सकता है. सिजोफ्रेनिया या मानसिक विकास में कमी जैसे मामलों में कोर्ट व्यक्तिगत रूप से फैसला करता है.
6. संक्रामक रोग (Venereal Disease) - पत्नी का कोई संक्रामक यौन रोग (जैसे HIV, सिफलिस) होने पर पति तलाक के लिए आवेदन कर सकता है.
7. संन्यास या सांसारिक जीवन का त्याग (Renunciation) - अगर पत्नी किसी धार्मिक संस्था में शामिल होकर सांसारिक जीवन त्याग देती है, तो यह भी तलाक का आधार बन सकता है.
8. मृत्यु की धारणा (Presumption of Death) - अगर पत्नी सात साल तक गायब हो और उसका कोई पता न लगे, तो कानून उसे मृत मानता है और पति तलाक के लिए याचिका दाखिल कर सकता है.
तलाक की प्रक्रिया
1. विवादित तलाक (Contested Divorce) - अगर पत्नी तलाक के लिए सहमत नहीं है, तो पति को उपरोक्त आधारों में से किसी एक पर याचिका दायर करनी होगी. इस प्रक्रिया में कोर्ट को प्रमाण (Evidence) दिखाना पड़ता है. सबूत में ऑडियो, वीडियो, डॉक्यूमेंट्स या अन्य कानूनी डॉक्यूमेंट्स शामिल हो सकते हैं.
2. आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) - अगर दोनों पति-पत्नी सहमत हैं, तो तलाक के लिए आवेदन किया जा सकता है. इसके लिए शादी के एक साल बाद आवेदन करना होता है. कोर्ट 6 महीने से 18 महीने तक सुलह (conciliation) की कोशिश करती है.
गुजारा भत्ता और भरण-पोषण
तलाक के बाद पति भी भरण-पोषण का दावा कर सकता है अगर वह आर्थिक रूप से असमर्थ है. पत्नी को भरण-पोषण देने की जरूरत तभी होती है जब वह स्वयं आर्थिक रूप से सक्षम न हो. अदालत मामले की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेती है, जैसे आय, संपत्ति, लाइफस्टाइल आदि. हालांकि विवादित तलाक में 7–10 साल लग सकते हैं. आपसी सहमति से तलाक में 6–18 महीने लग सकते हैं.
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Source: IOCL
























