आज होता अखंड भारत तो कितनी होती आबादी, चीन की तुलना में कहां होता इंडिया?
Akhand Bharat Population: अगर आज अखंड भारत मौजूद होता, तो जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों में दुनिया का नक्शा बदला हुआ नजर आता. आइए जानें कि क्या तब यह देश चीन की तुलना में कहां होता.

कल्पना कीजिए, अगर भारत का बंटवारा कभी नहीं हुआ होता और उपमहाद्वीप आज भी एक साथ होता. तब न सिर्फ इतिहास की दिशा अलग होती, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भी शायद चीन नहीं, बल्कि अखंड भारत कहलाता. सवाल उठता है कि उस स्थिति में जनसंख्या कितनी होती, घनत्व कैसा रहता और वैश्विक मंच पर भारत की ताकत चीन के मुकाबले कहां खड़ी होती. आंकड़े इस कल्पना को और रोचक बना देते हैं. आइए जान लेते हैं.
अखंड भारत की परिकल्पना क्या कहती है?
अखंड भारत की अवधारणा उस भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की ओर इशारा करती है, जिसमें आज का भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव भी शामिल माने जाते हैं. इतिहास में यह पूरा इलाका लंबे समय तक आपस में जुड़ा रहा है, लेकिन 20वीं सदी में हुए राजनीतिक बदलावों ने इसे अलग-अलग देशों में बांट दिया.
अगर आज भी साथ होते ये सभी देश
अगर आज यह पूरा क्षेत्र एक देश होता, तो इसकी कुल आबादी करीब 1.9 से 2.1 अरब यानी लगभग 190 से 210 करोड़ के बीच मानी जाती. मौजूदा भारत की जनसंख्या करीब 143 करोड़ है. इसमें पाकिस्तान की लगभग 24 से 25 करोड़ और बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ आबादी जोड़ते ही संख्या तेजी से बढ़ जाती है. इसके अलावा अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान और मालदीव की संयुक्त आबादी करीब 15 से 20 करोड़ के आसपास बैठती है.
जनसंख्या के मामले में चीन से कितना आगे?
आज चीन की आबादी करीब 1.42 अरब यानी 142 करोड़ मानी जाती है. अगर अखंड भारत की कल्पना को आंकड़ों में देखें, तो यह चीन से करीब 60 से 70 करोड़ ज्यादा आबादी वाला देश बनता. यानी जनसंख्या के लिहाज से अखंड भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश होता और चीन दूसरे स्थान पर खिसक जाता. इस तुलना से साफ है कि सिर्फ जनसंख्या के आधार पर ही वैश्विक संतुलन काफी अलग दिखाई देता.
क्षेत्रफल बढ़ता, घनत्व घटता
अखंड भारत का कुल क्षेत्रफल करीब 7.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर के आसपास होता, जो मौजूदा भारत के क्षेत्रफल से लगभग दोगुना है. इसका सीधा असर जनसंख्या घनत्व पर पड़ता दिखाई देता. आज भारत में औसतन 415 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर रहते हैं, लेकिन अखंड भारत की स्थिति में यह आंकड़ा घटकर करीब 260 से 270 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर तक आ जाती. यानी आबादी ज्यादा होने के बावजूद भी जमीन के हिसाब से दबाव कुछ कम होता.
आर्थिक और सामरिक असर
इतनी बड़ी आबादी का मतलब सिर्फ संख्या नहीं होता, बल्कि बाजार, श्रम शक्ति और उपभोक्ता आधार भी विशाल होता. अखंड भारत एक बहुत बड़ा घरेलू बाजार बनता, जिसका असर वैश्विक व्यापार पर साफ दिखता. इसके साथ ही युवा आबादी का अनुपात ज्यादा होने से इसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभांश मिलता. दूसरी ओर, चीन आज जिस एजिंग पॉपुलेशन यानी बूढ़ी होती आबादी की चुनौती से जूझ रहा है, उसके मुकाबले अखंड भारत एक उभरती युवा शक्ति के रूप में सामने आता.
क्या हर चीज आसान होती?
यह जरूरी नहीं कि इतनी बड़ी आबादी सिर्फ फायदे ही लेकर आती. प्रशासन, संसाधनों का बंटवारा, विकास में समानता और सामाजिक विविधता जैसी चुनौतियां भी कहीं ज्यादा जटिल होतीं, लेकिन इतना तय है कि जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर अखंड भारत की गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में होती नजर आती.
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Source: IOCL

























