शिवपाल सिंह यादव
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिवपाल सिंह यादव आज बड़ा नाम है. वे छह बार विधायक बनकर अपने क्षेत्र का प्रतिनधित्व कर चुके हैं और दो बार सपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. जमीनी राजनीति के माहिर माने जाने वाले शिवपाल यादव ने राजनीति के दांव पेंच बड़े भाई और पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से सीखे. बीच में साल 2016-17 में वे सपा से अलग होकर अपनी अलग पार्टी ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया)’ भी बना चुके हैं. फिलहाल साल 2022 में उसका विलय समाजवादी पार्टी में कर चुके हैं. इस वक्त जसवंत नगर से विधायक हैं. शिवपाल सिंह यादव का जन्म 6 अप्रैल 1955 को सैफई इटावा में हुआ. पिता का नाम सुघर सिंह और माता का नाम मूर्ति देवी है. वे दूसरे नम्बर के बेटे थे. शिवपाल सिंह यादव ने राजनीति अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव से ही सीखी. उनके नेतृत्व में ही उन्होंने जनता के मुद्दों पर संघर्ष किया. शिवपाल यादव की प्रारम्भिक शिक्षा सैफई में ही हुई उसके बाद जैन कॉलेज से स्नातक के बाद बी.पीएड भी किया है. साल 1996 से शिवपाल सीधी राजनीति में आ गए, जसवंतनगर से लगातार वे छह बार विधायक बने. इसके अलावा जब सपा की सरकार बनी तो वे पीडब्लूडी मंत्री-सहकारिता और गृह विभाग संभलते रहे. दो बार मंत्री बनने के साथ मायावती सरकार में वे नेता प्रतिपक्ष भी रहे. उनके सभी दलों से मधुर संबंध हैं. इसलिए ही यूपी की सियासत में उनकी पकड़ मजबूत है. शिवपाल सिंह यादव को पार्टी ने जब प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का भी परिचय दिया और पूरे यूपी में ग्राम पंचायत तक पार्टी का कैडर तैयार किया. आज भी वे किसी भी शहर-गांव में लगभग हर कार्यकर्ता को उसके नाम से जानते हैं. राजनीति में उतार चढ़ाव भी शिवपाल सिंह यादव ने खूब देखे. जब वर्ष 2016-17 में सपा में पारिवारिक और राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया. जिसके बाद शिवपाल यादव ने अलग होकर अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई. फिर साल 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में विलय भी हो गए और वे जसवंतनगर से चुनाव जीते. शिवपाल सिंह यादव की शादी 23-मई-1981 को हुई. इनकी पत्नी का नाम सरला यादव है. एक पुत्री डॉ. अनुभा यादव तथा एक पुत्र आदित्य यादव है जो वर्तमान में बदायूं से सांसद हैं. शिवपाल सिंह यादव इस समय अखिलेश यादव के पार्टी में दूसरे नंबर की भूमिका में हैं. वे लगातार प्रदेश में सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं के बीच आज भी उनकी मजबूत पकड़ है.
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