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Google Maps को पहले से कैसे पता चल जाता है ट्रैफिक? जानें टेक्नोलॉजी

Google Maps की सबसे बड़ी ताकत उसके करोड़ों यूजर्स हैं. दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन में Google Maps का इस्तेमाल करते हैं.

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  • यूजर रिपोर्ट, AI तकनीक भविष्य के ट्रैफिक की भविष्यवाणी करती है।

Google Maps: ट्रैवल के दौरान आज कल लोग ज्यादातर गूगल मैप्स का इस्तेमाल करते हैं. गूगल मैप्स यूजर्स को रास्ता खोजने से लेकर रेस्ट्रां सर्च और पैट्रोल पंप सर्च करके देता है. इसके अलावा गूगल मैप्स में यूजर्स को कई सारे फीचर्स मिल जाते हैं जैसे सबसे छोटा रास्ता कौन सा है, कहां ज्यादा ट्रैफिक है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गूगल मैप्स को कैसे पता चलता है कि इस रोड पर कितना ट्रैफिक है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की टेक्नोलॉजी.

यहां से मिलता है डेटा

आपको बता दें कि Google Maps की सबसे बड़ी ताकत उसके करोड़ों यूजर्स हैं. दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन में Google Maps का इस्तेमाल करते हैं. जब कोई यूजर लोकेशन सर्विस ऑन रखकर ट्रैवल करता है तो उसका फोन चुपचाप तरीके से उसकी स्पीड और लोकेशन से जुड़ी डिटेल्स Google तक पहुंचाता है.



Google Maps को पहले से कैसे पता चल जाता है ट्रैफिक? जानें टेक्नोलॉजीबता दें कि Google किसी एक व्यक्ति की जानकारी नहीं देखता बल्कि एक ही सड़क पर मौजूद हजारों डिवाइस से मिले डेटा को चेक करता है. इससे उसे पता चल जाता है कि किसी सड़क पर गाड़ी नॉर्मल स्पीड से चल रहे हैं या उनकी रफ्तार अचानक कम हो गई है.

पुराने रिकॉर्ड भी आते हैं काम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Maps सिर्फ उस समय मिल रहे डेटा पर निर्भर नहीं रहता है. दरअसल, गूगल मैप्स के पास कई सालों का ट्रैफिक रिकॉर्ड भी मौजूद होता है जो जरूरत पड़ने पर काफी काम आता है. रिकॉर्ड से ये पता चलता है कि सप्ताह के किस दिन, किस समय और किस इलाके में आमतौर पर कितना ट्रैफिक रहता है. जैसे ऑफिस टाइम, स्कूल की छुट्टी या त्योहारों के समय कौन सी रोड पर ज्यादा ट्रैफिक होता है इसका पता पुराने रिकॉर्ड से चल जाता है.

कम स्पीड से मिलती है जाम की जानकारी

दरअसल, गूगल मैप्स को गाड़ियों की स्पीड कम होने से पता लग जाता है कि किसी एक सड़क पर जाम लगा हुआ है. जैसे किसी सड़क पर गाड़ी आमतौर पर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. वहीं, अगर अचानक उसी सड़क पर ज्यादातर फोन 10 से 15 किमी प्रति घंटे की स्पीड दिखाने लगें तो Google Maps समझ जाता है कि वहां ट्रैफिक जाम लगा हुआ है.


Google Maps को पहले से कैसे पता चल जाता है ट्रैफिक? जानें टेक्नोलॉजी

इसीलिए जब किसी सड़क पर जाम लगता है तो गूगल मैप्स उसे लाल या नारंगी रंग से दिखाता है. कम जाम के लिए नारंगी रंग और ज्यादा जाम के लिए गूगल मैप्स लाल रंग का इस्तेमाल करता है. वहीं, अगर नॉर्मल ट्रैफिक है तो गूगल मैप्स उसे हरे रंग से दिखाता है. इसी तरह से यूजर्स को पता चल जाता है कि किस रोड़ पर कितना ट्रैफिक है.

यूजर्स की रिपोर्ट भी होती है मददगार

आज Google Maps में यूजर्स को कई सारे एडवांस फीचर्स मिलते हैं. इसी में एक फीचर है जिसकी मदद से यूजर्स सड़क पर होने वाली घटनाओं की जानकारी या रिपोर्ट भी कर सकते हैं. जैसे कि एक्सीडेंट, रोड बंद होना, किसी सड़क पर कोई काम चलना, पुलिस चेकिंग या दूसरी कोई समस्याएं की जानकारी आप गूगल मैप्स पर दे सकते हैं.

अब जब कई लोग एक जैसी जानकारी शेयर करते हैं तो Google उसे वेरिफाई करके दूसरे यूजर्स को भी दिखाता है. इससे लोगों को पहले से सतर्क रहने और दूसरा रास्ता खोजने में मदद मिल जाती है.

एआई की भी बड़ी भूमिका

बताते चलें कि गूगल मैप्स को बेहतर बनाने में अब एआई की भी बहुत बड़ी भूमिका है. दरअसल, Google Maps में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का भी इस्तेमाल किया जाता है. ये टेक्नोलॉजी पुराने और लाइव डेटा को चेक करके ये अंदाजा लगाती हैं कि अगले कुछ मिनटों या घंटों में ट्रैफिक कैसा हो सकता है.

अगर किसी सड़क पर रोजाना एक समय पर जाम लगता है तो AI उसी पैटर्न के आधार पर आने वाले समय की स्थिति का अंदाजा लगाकर यूजर्स को पहले ही उस रोड के बारे में अलर्ट कर देता है.

क्या Google आपकी निजी जानकारी देखता है

गूगल मैप्स का इस्तेमाल करने के बाद कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या इससे उनकी प्राइवेसी पर तो कोई खतरा नहीं है या फिर गूगल उनकी निजी जानकारी तो नहीं देख रहा है. दरअसल, कंपनी का कहना है कि ट्रैफिक का अंदाजा लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा को Anonymous रूप में प्रोसेस किया जाता है. इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं बल्कि सड़क की कुल ट्रैफिक स्थिति को समझना होता है.

यह भी पढ़ें: PC पर Google Maps दिखा रहा गलत लोकेशन, जानिए क्यों हो रही यह बड़ी गड़बड़ी?

स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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