यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर तैनात किए गए बाउंसर, बिना टोकन घोड़ा-खच्चर संचालकों पर होगी सख्ती
Yamunotri Yatra Bouncers Deployed:इन बाउंसरों की नियुक्ति का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बिना टोकन के चलने वाले डंडी-कंडी और घोड़ा-खच्चर संचालकों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है.

उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम की यात्रा इस बार एक अलग ही वजह से चर्चा में है. करीब 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर इस बार श्रद्धालुओं के साथ-साथ चार बाउंसर भी तैनात नजर आ रहे हैं. इन बाउंसरों की नियुक्ति का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बिना टोकन के चलने वाले डंडी-कंडी और घोड़ा-खच्चर संचालकों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है.
दरअसल, यात्रा सीजन के दौरान यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही कुली एजेंसी के तहत काम करने वाले घोड़ा-खच्चर संचालकों, डंडी-कंडी मजदूरों और अन्य श्रमिकों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है. बढ़ती भीड़ और काम की होड़ के चलते कई बार मजदूर रोटेशन सिस्टम को तोड़कर जबरन यात्रियों को ले जाने की कोशिश करते हैं, जिससे अव्यवस्था और विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है.
चार बाउंसरों को किया गया तैनात
इसी समस्या से निपटने के लिए जिला पंचायत की कुली एजेंसी ने चार बाउंसरों की नियुक्ति की है, जिन्हें पैदल मार्ग के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में तैनात किया गया है. ये बाउंसर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि केवल वैध पर्ची (टोकन) रखने वाले संचालक ही यात्रियों को लेकर आगे बढ़ें, जबकि बिना टोकन वालों को वापस भेजा जा रहा है.
नियुक्त बाउंसर आकाश राठौर के अनुसार, उनका काम केवल व्यवस्था बनाए रखना है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास वैध पर्ची है, उन्हें ही आगे जाने दिया जा रहा है और जो नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें रोका जा रहा है ताकि किसी प्रकार का विवाद या दंगा जैसी स्थिति उत्पन्न न हो.
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी सामने आ रहा है. स्थानीय निवासी संदीप राणा का कहना है कि यमुनोत्री जैसे धार्मिक और शांत क्षेत्र में पहले से ही पर्याप्त पुलिस बल और आईटीबीपी के जवान तैनात हैं. ऐसे में बाउंसरों की तैनाती अनावश्यक है और इससे श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल बन रहा है. उन्होंने जिला पंचायत प्रशासन से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.
वहीं, कुछ लोग इस पहल को सकारात्मक कदम भी मान रहे हैं. उनका कहना है कि यात्रा सीजन में बढ़ती भीड़ के कारण कई बार अव्यवस्था और झगड़े की स्थिति बन जाती है, ऐसे में सख्ती जरूरी हो जाती है. बाउंसरों की मौजूदगी से नियमों का पालन सुनिश्चित हो रहा है और व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है.
फिलहाल, यमुनोत्री धाम का यह नया दृश्य चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर प्रशासन इसे व्यवस्था बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग इसे पहाड़ की शांत फिजाओं में अनावश्यक सख्ती और भय का प्रतीक मान रहे हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL
























