'उन्हें पता है ये मस्जिद नहीं मंदिर है...', ज्ञानवापी मामले में समझौता बैठक पर हिन्दू पक्ष ने दी प्रतिक्रिया
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष की ओर से वादी लक्ष्मी देवी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष हमेशा से ही बाधा डाल रहा है. उन्हें पता है कि ज्ञानवापी एक मंदिर है, मस्जिद नहीं है.

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के सामने मिडिएशन का प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर आज बैठक होने वाली थी लेकिन, मुस्लिम पक्ष ने इससे किनारा कर लिया है. जिस पर हिन्दू पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. हिन्दू पक्ष का कहना है कि मस्जिद कमेटी जानबूझकर इसे मुद्दे पर भाग रही है.
ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष की ओर से याचिकाकर्ता वादी सोहन लाल आर्या ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता को लेकर जो कदम उठाया है वो रचनात्मक है जिसका हम स्वागत करते हैं. लेकिन, मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने कोर्ट की इस पहल की अवहेलना कर रहे हैं जो उचित नहीं है. सामाजिक समरसता और सद्भाव के लिए एक सराहनीय प्रयास था.
मुस्लिम पक्ष के रवैये पर उठाए सवाल
सोहन लाल ने कहा कि सर्वें के दौरान वहां पर त्रिशूल, गदा, कमल का फूल सब मिले थे, एक कमरा जो डेढ़ सौ साल बाद खोला गया उसमें मां श्रृंगार गौरी की प्रतिमा मिली थी. जो वजूखाना था, जिसमें से पानी हटाया गया था उसमें बाबा मिल गए थे. जो ज्ञानवापी मस्जिद के तीनों शिखर के नीचे मंदिर के शिखर ही पाए गए. शिवलिंग से 83 फ़ीट दूर नंदी विराजमान हैं.
'मोदी-योगी को सत्ता में रहने का हक...', राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर सपा विधायक
विश्व में ऐसी कोई मस्जिद हैं नीचे पूजा पाठ हो रहा है और ऊपर नमाज पढ़ी हैं. कोई ऐसा मस्जिद हैं जहां मस्जिद हो और वहां नंदी विराजमान हों. उन्होंने कहा कि जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत हार चुका है और अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जा रहा है. इसलिए मुस्लिम पक्ष भाग रहा है.
वहीं एक और हिंदू पक्ष की ओर से वादी लक्ष्मी देवी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष हमेशा से ही बाधा डाल रहा है. उन्हें पता है कि ज्ञानवापी एक मंदिर है, मस्जिद नहीं है. इसी वजह से वे मध्यस्था में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं हैं वो सोचते हैं जितना समय टाल सकते हैं टालते रहे.
'वो जानते हैं ये मस्जिद नहीं मंदिर है'
औरंगज़ेब ने जब इस मंदिर को तोड़ा था उससे पहले भी ये मंदिर ही था. उसके बाद ये लोग जबर्दस्ती मस्जिद का निर्माण किए और वहां नमाज़ पढ़ रहे हैं. आज जब हम कोर्ट के माध्यम से अपना हक ले रहे हैं तो ये लोग सोचते हैं कि जितना देर हो सके हो जाए. इसलिए ये नहीं आना चाहते. लेकिन, हम अपना पक्ष रखेंगे, हम कहेंगे कि मुस्लिम पक्ष अपना हक छोड़ दे और हिन्दुओं को मंदिर दे दे. जिसमें हम अपनी पूजा अर्चना करें और भव्य मंदिर का निर्माण करें.
ज्ञानवापी मामले में अंजुमन इंतजामिया ने किया इस फैसले से किनारा, अब आगे क्या होगा?
























