उत्तराखंड में इन शिक्षकों की अब खैर नहीं! एक्शन में धामी सरकार; तत्काल करेगी सस्पेंड
Uttarakhand News: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग ने अब शिक्षकों पर शिकंजा कस जा रहा है. राज्य में अब शिक्षकों की मनमानी नहीं चलेगी. कोई भी शिक्षक नशे में मिला या छात्राओं से छेड़छाड़ की तो सस्पेंड होगा.

उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने अब वो सख्त कदम उठा लिया है, जिसका इंतजार शायद काफी वक्त से था. शिक्षा विभाग ने अब टीचर्स की मनमानी पर शिकंजा कस दिया है. विभाग ने अब उन शिक्षकों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की है जो शिक्षक बिना बताए गायब रहते हैं और बायोमेट्रिक से बचते हैं. साथ ही कोई शिक्षक स्कूल नशे में आते हैं या छात्राओं से बदतमीजी करते हैं. उन्हें अब सिर्फ नोटिस थमाकर नहीं छोड़ा जाएगा. सीधे तत्काल सस्पेंड कर दिया जाएगा.
अब तक की व्यवस्था में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) किसी शिक्षक पर कार्रवाई के लिए ऊपर तक फाइल भेजते थे, जहां मामले अक्सर लंबे खिंच जाते थे और दोषी बचने के रास्ते ढूंढ लेते थे. अब यह बदल गया है. इन अधिकारियों को सीधे निलंबन की कार्रवाई करने का अधिकार दिया जा रहा है. विभाग ने इस संबंध में विस्तृत नियम बनाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं.
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किन मामलों में होगी तुरंत कार्रवाई
विभाग ने साफ कर दिया है कि किन परिस्थितियों में शिक्षक को फौरन सस्पेंड किया जाएगा. इनमें बिना छुट्टी स्वीकृत कराए स्कूल से गायब रहना, बायोमेट्रिक हाजिरी से बार-बार बचना, स्कूल के समय में शराब के नशे में पाया जाना और सबसे गंभीर छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार या छेड़छाड़ करना शामिल है.
इन मामलों में न जांच का लंबा इंतजार होगा, न कोई पहले चेतावनी वाली रियायत दी जाएगी. मंत्री रावत ने कहा कि जीरो टॉलरेंस, कोई समझौता नहीं होगा. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस पूरे मामले में अपनी मंशा बिल्कुल साफ कर दी है.
उन्होंने कहा कि विभाग में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के लिए अब कोई जगह नहीं है. जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर भी दिखेगी. जो अधिकारी और शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी.
मामलों पर शुरू हुई कार्रवाई
विभाग की यह सख्ती महज ऐलान नहीं है. इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है. डोईवाला में प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धनबीर सिंह को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. विभाग ने बिना देर किए उन्हें निलंबित कर दिया.
वहीं चकराता विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय डिरनाई में तैनात सहायक अध्यापक हरपाल सिंह को बिना किसी सूचना या अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के चलते सस्पेंड किया गया है.
बच्चों का भविष्य से नहीं होगा खिलवाड़
दरअसल यह कदम उस गहरी चिंता से उपजा है जो पहाड़ के सरकारी स्कूलों को लेकर लंबे समय से बनी हुई है. दूरदराज के गांवों में जहां बच्चों के पास सरकारी स्कूल के अलावा कोई विकल्प नहीं होता.
वहां शिक्षक का गैरहाजिर रहना या नशे में आना सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं. यह उन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. अब देखना यह होगा कि यह सख्ती सिर्फ कुछ मामलों तक सीमित रहती है या सच में पूरे तंत्र में बदलाव लाती है. फिलहाल संकेत उम्मीद जगाने वाले हैं.
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Source: IOCL


























