Uttarakhand News: सहकारी बैंकों में 1200 करोड़ रुपये का महाघोटाला, आयकर विभाग की रेड ने खोली पोल
Uttarakhand News in Hindi: उत्तराखंड के जिला सहकारी बैंकों में 1200 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई. बिना पैन लेन-देन और छिपाए गए ITR पर आयकर विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी में है.

उत्तराखंड में एक के बाद एक घोटालों की फेहरिस्त में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है. इस बार निशाने पर हैं प्रदेश के जिला सहकारी बैंक, जिनमें आयकर विभाग की 'क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन टीम' को जांच के दौरान 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों के सबूत मिले हैं. जो बैंक आम आदमी की बचत का भरोसेमंद ठिकाना माने जाते थे, उन्हीं की तिजोरियों में वर्षों से चल रहे इस खेल ने पूरे बैंकिंग तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
आयकर विभाग की टीम ने हरिद्वार (रुड़की मुख्यालय), उत्तरकाशी और काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) के जिला सहकारी बैंकों में एक साथ दबिश दी. रिकॉर्ड खंगाले गए, कंप्यूटर से डेटा निकाला गया और ढेरों दस्तावेज जब्त किए गए. तीनों जगह एक जैसा पैटर्न मिला. बड़े-बड़े लेन-देन, लेकिन कागजों पर कोई निशान नहीं. इनमें सबसे चौंकाने वाली तस्वीर हरिद्वार जिला सहकारी बैंक की निकली. जांच अधिकारी इसे अब तक का 'सबसे बड़ा गोलमाल' करार दे रहे हैं.
कैसे हुआ खेल?
जानकारी के अनुसार, मामले को समझना हो तो दो बातें ध्यान से देखनी होंगी. पहली बात- बैंकों ने 800 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकद और अन्य लेन-देन बिना पैन कार्ड दर्ज किए पूरे किए. नियम साफ कहता है कि एक तय सीमा से अधिक के हर लेन-देन में पैन अनिवार्य है, ताकि आयकर विभाग की नजर रहे. लेकिन यहां यह बाधा जानबूझकर हटा दी गई. जब पैन ही नहीं, तो टैक्स विभाग को कैसे पता चलता कि किसने कितना पैसा घुमाया. वहीं दूसरी बात- 400 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन को आयकर रिटर्न में दर्शाया ही नहीं गया. यानी एक तरफ बैंक स्तर पर रिकॉर्ड छिपाया गया, दूसरी तरफ खाताधारकों ने भी अपनी ITR में इसे दफन रखा.
विभाग का सीधा आरोप है कि यह बैंक प्रबंधन और रसूखदार खाताधारकों की साझा साजिश थी. ताकि काला धन बिना किसी रुकावट के घूमता रहे और टैक्स का एक रुपया भी सरकारी खजाने में न जाए.
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अब क्या होगी कार्रवाई?
आयकर विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में नरमी नहीं बरती जाएगी. बैंकों पर नियम उल्लंघन के लिए रोजाना 500 रुपये से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगेगा और ऊपर से 50,000 रुपये का एकमुश्त दंड अलग से है. जिन खाताधारकों ने करोड़ों के लेन-देन दबाए, उन्हें जल्द नोटिस मिलने वाले हैं. बकाया टैक्स पर ब्याज समेत पूरी वसूली होगी. जब्त डिजिटल डेटा की पड़ताल अभी चल रही है और माना जा रहा है कि जैसे-जैसे फाइलें खुलेंगी, नए-नए नाम भी सामने आएंगे.
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