UP News: यूपी सरकार ने दलहन की खेती के लिए लाई नई योजना, लगभग तीन गुणा ज्यादा बीज करेगी वितरण
Sarkari Yojana:उत्तर प्रदेश सरकार ने दलहन की आपूर्ति के लिए बनाई नयी योजना,न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी देने की बात भी कही है

Up News: उत्तर प्रदेश सरकार ने दलहन की खेती के लिए नई योजना तैयार की है.बताया जा रहा है कि आम आदमी की थाली से दाल गायब ना हो और प्रदेश सब लोगों को दाल उपलब्ध हो इसलिए इस योजना को लाया गया है.खपत की तुलना में पैदावार कम होने की वजह से इस योजना को लाया गया.इसके तहत किसानों को नयी प्रजातियों के प्रमाणित (सर्टिफाइड) एवं आधारीय (फाउंडेशन) बीज का वितरण किया जाएगा.
मिली जानकारी के मिताबिक पिछली बार बीज का वितरण 28,751 कुंतल हुआ था,जिसे इस बार बढ़ाकर 82,000 कुंतल किया जाएगा।ये बीज किसानों को अनुदानित दर पर दिए जाएंगे.साथ ही सरकार ने दलहनी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए अंत:फसली एवं जायद की फसलों में दलहनी (उर्द, मूंग) फसलों को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया है.और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी देने की बात भी कही गई है.आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल किया है.
सरकारी आंकड़ों पर नजर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 से 2020-21के दौरान दलहन का उत्पादन 23.94 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 25.34 लाख मीट्रिक टन हो गया। इस दौरान प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 9.5 कुंतल से बढ़कर 10.65 कुंतल हो गई।योगी सरकार(Yogi Adityanath) ने अपने दूसरे कार्यकाल में दलहन का उत्पादन बढ़ाकर 28.84 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है.आपको बता दें राज्य में अभी प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 12.41 कुंतल और उत्पादन 35.79 मीट्रिक टन करने का है।
अपर कृषि निदेषक तिलहन-दलहन
अपर कृषि निदेषक तिलहन-दलहन अखिलेश शर्मा के अनुसार दलहन की फसल को सुरक्षित करने की जरूरत है.उन्होंने किसानों की सुरक्षा के लिए वायर लगाने की योजना के लिए केन्द्र से सहयोग मांगने की भी बात की, जिससे इसकी पैदावार बढ़े।उन्होंने आगे कहा नई प्रजाति के बीजों के लिए भी अनुसंधान केन्द्र से मांग किया है.इसके अलावा किसानों को मिनी किट भी देने की बीत की गई.
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल का उत्पादक के साथ-साथ उपभोक्ता और आयातक भी है.ऐसे में पूरी दुनिया के दाल उत्पादक देशों (कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, टर्की,और म्यांमार) की नजर भारत में होने वाली पैदावार और छह महीने के भंडारण पर भी होती है.विशेषज्ञों की माने तो अगर भारत में पैदावार कम है तो यहां की भारी मांग के मद्देनजर अतंराष्ट्रीय बाजार में दाल का दाम बढ़ जाता है.
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