'पाकिस्तान में निकाली जाती तो...', वाराणसी से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शुरू की गौ रक्षा यात्रा
Shankaracharya Avimukteshwarananda News: काशी से अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ रक्षा यात्रा की शुरुआत कर दी है, जो 81 दिनों में यूपी की 403 विधानसभा तक पहुंचेगी. इस दौरान उन्होंने सरकारों पर सवाल उठाए.

वाराणसी से एक बार फिर ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की रक्षा को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया है. शुक्रवार (1 मई) से काशी से उनकी गौ रक्षा यात्रा की शुरुआत हो गई, जो पूरे उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी. इस यात्रा को लेकर उन्होंने कई तीखे बयान भी दिए, जिन पर अब चर्चा तेज हो गई है.
81 दिनों में 403 विधानसभा कवर करने का लक्ष्य
शंकराचार्य ने बताया कि यह यात्रा एक व्यापक जनजागरण अभियान के रूप में निकाली जा रही है. उनका लक्ष्य है कि 81 दिनों के भीतर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं तक पहुंचा जाए. उन्होंने कहा कि हर दिन 5 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद किया जाएगा, उन्हें गौ रक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा और जनसमर्थन जुटाया जाएगा.
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यात्रा की शुरुआत काशी से हुई है और अगला पड़ाव गोरखपुर होगा. वहीं से नियमित रूप से यात्रा आगे बढ़ेगी और अंत में गोरखपुर में ही इसका समापन किया जाएगा.
डिजिटल नहीं, जमीन पर यात्रा का फैसला
शंकराचार्य ने बताया कि इस यात्रा को लेकर पहले विचार किया गया था कि इसे डिजिटल माध्यम से भी चलाया जा सकता है. लेकिन जनता और समर्थकों के साथ चर्चा के बाद यह तय हुआ कि यात्रा प्रत्यक्ष रूप से ही की जाएगी.
उन्होंने कहा कि लोगों के बीच जाकर संवाद करना ज्यादा प्रभावी होता है और इससे जनभावनाओं को समझने का मौका मिलता है. इसी वजह से सर्वसम्मति से जमीन पर यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया.
सरकारों पर उठाए सवाल
अपने बयान में शंकराचार्य ने सरकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता लंबे समय से गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध चाहती है, लेकिन आज तक किसी सरकार ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया.
उन्होंने कहा, “जब जनता वोट देकर सरकार बनाती है तो फिर उसी जनता की आस्था के खिलाफ फैसले कैसे लिए जाते हैं?” उनका मानना है कि अगर जनता की आवाज को मजबूती से उठाया जाए तो कोई भी सरकार उसे अनदेखा नहीं कर सकती.
पाकिस्तान वाले बयान पर मचा विवाद
शंकराचार्य का सबसे ज्यादा चर्चा में आया बयान पाकिस्तान को लेकर रहा. उन्होंने कहा कि अगर ऐसी गौ रक्षा यात्रा पाकिस्तान में निकाली जाती तो शायद वहां इसे मान लिया गया होता, लेकिन भारत में अभी तक इस विषय पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बयान उन्होंने उदाहरण के तौर पर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह है कि भारत में ही गौ माता के मुद्दे पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही.
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि संसद में कई बार मुस्लिम सांसदों ने भी गौ रक्षा की बात उठाई है, लेकिन हिंदू समाज के प्रतिनिधि इस मुद्दे पर उतनी मुखरता नहीं दिखाते. उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे लोग भी इस विषय को उठा सकते हैं, तो जो खुद को गौ माता का भक्त कहते हैं, वे खुलकर आवाज क्यों नहीं उठाते.
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उन्होंने गौ माता को ‘मां’ का दर्जा देने की बात दोहराई. उन्होंने कहा कि जिस तरह हर व्यक्ति अपनी मां का सम्मान करता है, उसी तरह गौ माता का भी सम्मान होना चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी के रूप में देखें.
इस पूरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को जोड़ना और गौ रक्षा के मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देना है. शंकराचार्य का कहना है कि जब तक यह विषय आम जनता की प्राथमिकता नहीं बनेगा, तब तक सरकारों पर दबाव नहीं बनेगा.























