एक्सप्लोरर

गुजरात दंगे के वक्त मोदी-शाह के संकटमोचक बने थे जेटली, नरेंद्र से था 'खास' याराना

अरुण जेटली को बीजेपी और मोदी-शाह का संकटमोचक माना जाता था। जेटली ने शनिवार दोपहर दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली।

नई दिल्ली, भाषा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली के लिए राजनीतिक हलकों में अनौपचारिक तौर पर माना जाता था कि वह ‘पढ़े लिखे विद्वान मंत्री’ हैं। पिछले तीन दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह की काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में रहे, सरकार चाहे जिसकी भी रही हो। अति शिष्ट, विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार रहे जेटली भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुख्य संकटमोचक थे जिनकी चार दशक की शानदार राजनीतिक पारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते समय से पहले समाप्त हो गई।

सर्वसम्मति बनाने में महारत प्राप्त जेटली को कुछ लोग मोदी का ‘चाणक्य’ भी मानते थे जो 2002 से मोदी के लिए मुख्य तारणहार साबित होते रहे। मोदी तब मुख्यमंत्री थे और उनपर गुजरात दंगे के काले बादल मंडरा रहे थे। जेटली न सिर्फ मोदी, बल्कि अमित शाह के लिए भी उस वक्त में मददगार साबित हुए थे जब उन्हें गुजरात से बाहर कर दिया गया था। शाह को उस वक्त अक्सर जेटली के कैलाश कॉलोनी दफ्तर में देखा जाता था और दोनों हफ्ते में कई बार साथ भोजन करते देखे जाते थे।

मोदी को 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की औपचारिक घोषणा से पहले के कुछ महीनों में, जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने के लिए उन्होंने पर्दे के पीछे बहुत चौकस रह कर काम किया।

प्रशिक्षण से वकील रहे जेटली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे और जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अरुण शौरी और सुब्रमण्यम स्वामी की संभावनाओं को अनदेखा करते हुए उन्हें वित्त मंत्री के सभी महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपे। मोदी एक बार जेटली को “अनमोल हीरा” भी बता चुके हैं। यहां तक कि जेटली को रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था जब मनोहर पर्रिकर की सेहत बिगड़ी थी।

सत्ता संचालन के दांव पेंच से भली-भांति परिचित जेटली 1990 के दशक के अंतिम सालों के बाद से नयी दिल्ली में वह मोदी के भरोसेमंद बन चुके थे और बीते कुछ सालों में 2002 दंगों के बाद अदालती मुश्किलों को हल करने वाले कानूनी दिमाग से आगे बढ़ कर वह उनके मुख्य योद्धा, सूचना प्रदाता और उनका पक्ष रखने वाले बन चुके थे।

बहुआयामी अनुभव और अपनी कुशाग्रता के साथ जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल 2014 से 2019 तक उनके साथ थे। सरकार की उपलब्धियों को गिनाने या विवादित नीतियों के बचाव में उतरने की बात हो या कांग्रेस पर आक्रामक हमला बोलने या 2019 के चुनाव को स्थिरता या अव्यवस्था के बीच चुनने की परीक्षा बताना हो, जेटली समेत कुछ ही लोग इस संबंध में प्रभावी नजर आए।

जीएसटी को दिलाई संसद से मंजूरी देश और दुनिया के लिए उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों का वैश्विक संदर्भ समझाया, जटिल राफेल लड़ाकू विमान सौदे को आसान शब्दों में बताया, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे बड़े आर्थिक कानून को संसद की मंजूरी दिलवाई जो करीब दो दशकों से लटका हुआ था। जब न्यायपालिका में हस्तक्षेप को लेकर सरकार की आलोचना की जा रही थी तब वकील से नेता बने जेटली ने अपने रिकॉर्ड और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का बचाव किया। यही नहीं जेटली ही वही शख्स थे जिन्होंने ‘ट्रिपल तलाक’ पर सरकार की स्थिति समझाई थी। भाजपा सरकार के प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकार से लेकर अत्यंत महत्त्वपूर्ण, संवेदनशील वित्त मंत्रालय संभालने वाले जेटली ने अपनी भौतिकदावादी पसंदों जैसे महंगे पेन, घड़ियों और लक्जरी गाड़ियां रखने के शौक पूरा करते हुए कई भूमिकाएं निभाईं।

अगर पदक्रम के हिसाब से देखा जाए तो वह पहली मोदी सरकार में बेशक नंबर दो पर थे। कई नियुक्तियां उनके कहने पर हुईं। पार्टी के सभी प्रवक्ता सलाह के लिए उनके चक्कर लगाते। राजधानी के सियासी गलियारों की झलक पाने के सर्वोत्कृष्ट अंदरूनी सूत्र के लिहाज से वह मीडिया के चहेते थे।

मोदी-जेटली का साथ पुराना मोदी और जेटली का साथ बहुत पुराना है जब आरएसएस प्रचारक मोदी को दिल्ली में 1990 के दशक के अंतिम दौर में भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया था, वह 9 अशोक रोड के जेटली के आधिकारिक बंगले के उपभवन में ठहरे थे। उस वक्त जेटली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री थे। उन्हें उस कदम का भी हिस्सा माना जाता है जो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को हटा कर मोदी को उस पद पर बिठाने को लेकर उठाया गया।

आपातकाल में जेल गए थे जेटली विभाजन के बाद लाहौर से भारत आए एक सफल वकील के बेटे जेटली ने कानून की पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष उस वक्त बने जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित कर दिया था। विश्वविद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए उन्होंने 19 महीने जेल में बिताए।

आपातकाल हटने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की और 1980 में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल द्वारा इंडियन एक्सप्रेस की इमारत को गिराने के फैसले को चुनौती दी। इस दौरान वह रामनाथ गोयनका, अरुण शौरी और फली नरीमन के करीब से संपर्क में आए। उनके इस साथ पर विश्वनाथ प्रताप सिंह की नजर पड़ी जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद जेटली को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया। वह इस पद पर काबिज होने वाले सबसे युवा व्यक्ति हैं।

वह 2006 में राज्यसभा में विपक्ष के नेता बने और अपनी स्पष्टता, बेहतरीन याद्दाश्त और त्वरित विचारों के जरिए उन्होंने कई कांग्रेस सदस्यों का भी सम्मान हासिल किया।

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

यूपी के मुरादाबाद में सड़क हादसा, कंटेनर में पीछे से घुसी बाइक, NIA के डीएसपी की दर्दनाक मौत
यूपी के मुरादाबाद में सड़क हादसा, कंटेनर में पीछे से घुसी बाइक, NIA के डीएसपी की दर्दनाक मौत
फिरोजाबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लॉटरी का लालच देकर ठगी करने वाला शातिर ठग गिरफ्तार
फिरोजाबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लॉटरी का लालच देकर ठगी करने वाला शातिर ठग गिरफ्तार
यूपी को नशामुक्त बनाने के लिए योगी सरकार का 'महाभियान', चौपालों तक जगाई जा रही जागरूकता की अलख
यूपी को नशामुक्त बनाने के लिए योगी सरकार का 'महाभियान', चौपालों तक जगाई जा रही जागरूकता की अलख
यूपी में शिक्षा सुधार का नया अध्याय, योगी सरकार ने 33401 पदों पर की बंपर शिक्षक भर्ती
यूपी में शिक्षा सुधार का नया अध्याय, योगी सरकार ने 33401 पदों पर की बंपर शिक्षक भर्ती

वीडियोज

Bollywood news: Karisma Kapoor's 'Brown' trailer released, will wreak havoc in her 'mardaani' avatar
Vasudha: 😍Dev के तीखे सवालों के आगे बेबस हुई Vasudha, रोते ही पिघला Dev का गुस्सा #sbs
IMD ने 10 राज्यों में जारी किया येलो अलर्ट | Weather Alert | Breaking | Monsoon 2026
France news: पेरिस में हंगामा, कई इलाकों में तनावपूर्ण माहौल | France protest
Toyota Innova, The people’s favorite, from celebrities to families | #toyota #toyotainnova #autolive

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मिडिल ईस्ट वॉर में ईरान ने चीनी मिसाइल से मार गिराया US का F-15 लड़ाकू विमान! जानें रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
वॉर में ईरान ने चीनी मिसाइल से मार गिराया US का F-15 लड़ाकू विमान! रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
दिल्ली: महरौली बिल्डिंग हादसे का Live वीडियो आया सामने, पलभर में भरभराकर गिर गई 5 मंजिला इमारत
दिल्ली: महरौली बिल्डिंग हादसे का Live वीडियो आया सामने, पलभर में भरभराकर गिर गई 5 मंजिला इमारत
शिव की जय जयकार से गूंजा नरेंद्र मोदी स्टेडियम, कैलाश खेर ने बांधा समां; दिखा अद्भुत नजारा
शिव की जय जयकार से गूंजा नरेंद्र मोदी स्टेडियम, कैलाश खेर ने बांधा समां; दिखा अद्भुत नजारा
'मेरी दुनिया खत्म...', जब बॉबी देओल को लग गई थी नशे की लत, मुश्किल दौर में वाइफ ने भी छोड़ दिया था साथ?
'मेरी दुनिया खत्म...', जब बॉबी देओल को लग गई थी नशे की लत, मुश्किल दौर में वाइफ ने भी छोड़ दिया था साथ?
Exclusive: प्रेम के लिए लांघी सरहद, PoK से LoC पार कर बारामूला पहुंचा जीशान, प्रेमिका संग सेना ने हिरासत में लिया
प्रेम के लिए लांघी सरहद, PoK से LoC पार कर बारामूला पहुंचा जीशान, प्रेमिका संग सेना ने हिरासत में लिया
शांति वार्ता के बीच ईरान की अमेरिका को दो टूक, कहा- 'जब तक अधिकार सुरक्षित नहीं, तब तक...'
शांति वार्ता के बीच ईरान की अमेरिका को दो टूक, कहा- 'जब तक अधिकार सुरक्षित नहीं, तब तक...'
हर साल क्यों महंगे होते जा रहे हैं स्मार्टफोन? सामने आ गई बड़ी वजह, जानिए पूरी जानकारी
हर साल क्यों महंगे होते जा रहे हैं स्मार्टफोन? सामने आ गई बड़ी वजह, जानिए पूरी जानकारी
IPL 2026: GT vs RCB फाइनल से पहले फैंस के बीच बवाल, इंटरनेट पर जमकर गदर काट रहे मीम
IPL 2026: GT vs RCB फाइनल से पहले फैंस के बीच बवाल, इंटरनेट पर जमकर गदर काट रहे मीम
Embed widget