Explained: UP सरकार के निशाने पर जौहर और ग्लोकल समेत 25 हजार यूनवर्सिटी-मदरसे! 'कानूनी शासन' या 'राजनीतिक गणित'?
UP Muslim Universities and Madarsa Controversy: ये कार्रवाई सिर्फ कानूनी नहीं हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ये पूरी राजनीति का हिस्सा बन चुकी हैं. बीजेपी इसे 'कानून का शासन' बता रही है.

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर की चर्चा अब सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रही. यह एक राजनीतिक हथियार बन गया है. अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद से ही योगी सरकार के बुलडोजर की रफ्तार और तेज हो गई. अब यह बुलडोजर सिर्फ अवैध कब्जों तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी और मदरसों को भी निशाना बना रहा है. जौहर यूनिवर्सिटी के 38 अवैध भवन हों, ग्लोकल यूनिवर्सिटी की 121 एकड़ जमीन हो, AMU की 41 बीघा जमीन हो या इंटीग्रल यूनिवर्सिटी पर ATS का छापा. यह सब चीखकर एक ही बात कह रहे हैं- राजनीति चमकाने के लिए हमारा इस्तेमाल क्यों...
यूपी में कितनी यूनिवर्सिटी सरकार के निशाने पर हैं?
1. मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की इस यूनिवर्सिटी पर रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने 16 जुलाई 2026 को बड़ी कार्रवाई की. जांच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों में से 38 भवन अवैध हैं. RDA ने इन 38 भवनों पर बुलडोजर एक्शन का आदेश जारी कर दिया है.
RDA ने उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत यह आदेश पारित किया है. रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह कार्रवाई जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट के बाद शुरू की गई.
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार 'कानून के शासन' को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी समाज के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हितों के लिए बनाई गई थी. यूनिवर्सिटी को 15 दिन का समय दिया गया है कि वह स्वयं अवैध निर्माण हटाए, वरना प्रशासन बुलडोजर चलाएगा.
इससे पहले आयकर विभाग ने आजम खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का धारा 12AB के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया था. ट्रस्ट पर पिछले छह सालों के वित्तीय लेन-देन की जांच चल रही है.
2. ग्लोकल यूनिवर्सिटी, सहारनपुर
सहारनपुर के मिर्जापुर थाना क्षेत्र में स्थित ग्लोकल यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जून 2024 में बड़ी कार्रवाई की. ED ने यूनिवर्सिटी की 121 एकड़ जमीन और बिल्डिंग को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया. इस संपत्ति की कीमत 4,440 करोड़ रुपये बताई गई है.
यह यूनिवर्सिटी अब्दुल वाहिद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर है, जिसे पूर्व BSP MLC मोहम्मद इकबाल (हाजी इकबाल) और उनके परिवार के सदस्य संचालित करते हैं. ED ने यह कार्रवाई अवैध खनन मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की. ED के मुताबिक, अवैध खनन से मिली 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि यूनिवर्सिटी की जमीन खरीदने और भवन निर्माण में खर्च कर दी.
हाजी इकबाल फरार हैं, जबकि उनके भाई और बेटे जेल में हैं.
3. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)
मई 2025 में अलीगढ़ नगर निगम ने AMU प्रशासन पर कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी की हॉर्स राइडिंग क्लब की 41 बीघा जमीन को मुक्त करा लिया. इस जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई.
अप्रैल 2026 में AMU के जियाउद्दीन हॉल से कारतूस, मैगजीन और नकली नोट बरामद किए गए. इसके बाद प्रशासन ने 113 संदिग्धों की सूची तैयार की और निगरानी तेज कर दी. नवंबर 2025 में UP के राज्य मंत्री रघुराज सिंह ने AMU को 'आतंकवादियों का अड्डा' बताते हुए वहां के छात्रों, स्टाफ और प्रोफेसरों की जांच की मांग की.
AMU के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. जून 2026 में UP सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने AMU के केनेडी हॉल में कार्यक्रम के दौरान 'हर हर महादेव' और 'जय श्री राम' के नारे लगाए, जिससे विवाद पैदा हुआ.
4. इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ
नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके के बाद UP ATS की टीम लखनऊ स्थित इंटीग्रल यूनिवर्सिटी पहुंची. ATS ने यूनिवर्सिटी के डॉ. परवेज अंसारी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की और उनके कैबिन को खंगाला गया. यूनिवर्सिटी के 65 छात्रों की डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई.
क्या यही हाल UP में मदरसों का भी है?
2022 में UP सरकार ने राज्यभर में मदरसों का पहला सर्वे किया. इस सर्वे में 8,449 मदरसे अवैध पाए गए. इनमें से ज्यादातर नेपाल सीमा से सटे जिलों श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और बलरामपुर में हैं.
इस सर्वे ने जबरदस्त राजनीतिक बहस छेड़ दी. मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इन मदरसों को मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की.
2023 में गठित SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में 8,448 अवैध मदरसों को तुरंत बंद करने की सिफारिश की, क्योंकि इनके फंडिंग स्रोतों का पता नहीं चल पाया.
2024 में 513 मदरसों की डी-अफिलिएशन
सितंबर 2024 में UP मदरसा शिक्षा बोर्ड ने 513 मदरसों को डी-अफिलिएट करने की सिफारिश की. इनमें से ज्यादातर ने बोर्ड के पोर्टल पर अपना विवरण अपलोड नहीं किया था. कुछ मदरसों ने खुद डी-अफिलिएशन मांगी थी.
2025 में बुलडोजर एक्शन का दौर
मई 2025 में UP सरकार ने अवैध मदरसों के खिलाफ बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की. इस जिलेवार कार्रवाई की गई:
| जिला | कार्रवाई |
| श्रावस्ती | 20 मदरसे ध्वस्त और 110 सील |
| सिद्धार्थनगर | 37 मदरसे ध्वस्त किए, जिसमें मदरसा अरबिया दारुल उलूम भी शामिल |
| बहराइच | 170 मदरसों पर बुलडोजर एक्शन लिया |
| महाराजगंज | 57 साल पुराना मदरसा गिराया, जो सरकारी जमीन पर बना था |
| गाजियाबाद (खोड़ा) | 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' के तहत 3 मदरसे सील |
| संभल | मदरसा, मस्जिद और 45 दुकानें ध्वस्त |
| कुल राज्यभर | 350 से ज्यादा मदरसों पर बुलडोजर एक्शन लिया गया |
इसके अलावा 225 मदरसों, 30 मस्जिदों, 25 मजारों और 6 ईदगाहों पर भी कार्रवाई हुई.
2026 में भी नहीं थमा कार्रवाई का दौर
- जनवरी 2026: 18 मदरसों की मान्यता सस्पेंड कर दी गई.
- जून 2026: गाजियाबाद के खोड़ा में 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' के तहत 3 मदरसे सील हुए. श्रावस्ती में 10 अवैध मदरसे बंद किए गए.
नेपाल बॉर्डर पर विदेशी फंडिंग बना सबसे बड़ा विवाद
सबसे बड़ा मामला नेपाल सीमा से सटे मदरसों का है. 2023 में UP सरकार ने UP-नेपाल बॉर्डर पर 542 मदरसों को सील या ध्वस्त किया. इनमें सिद्धार्थनगर, महराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच के मदरसे शामिल थे.
'प्राइवेट स्कूल' के नाम पर 500 से ज्यादा मदरसे फिर से खुल गए. एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ कि इन मदरसों को विदेशों से जकात और विदेशी फंडिंग मिल रही है. सिद्धार्थनगर के धनोरा बुजुर्ग गांव में मदरसा नूरुल इस्लाम खुलेआम चल रहा है.
आखिर यूपी में कितने मदरसे हैं?
| पैमाना | संख्या |
| कुल मदरसे (अनुमानित) | 25,000 |
| मान्यता प्राप्त | 16,500 |
| अमान्यता प्राप्त (2022 सर्वे) | 8,449 |
| सरकारी सहायता प्राप्त | 560 |
| कुल छात्र | करीब 30 लाख |
| डी-अफिलिएशन की सिफारिश (2024) | 513 |
| SIT की बंद करने की सिफारिश | 8,448 |
| बुलडोजर कार्रवाई (2025-26) | 350 से ज्यादा |
मुस्लिम यूनिवर्सिटी और मदरसों का कानूनी और संवैधानिक पहलू क्या है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को 'असंवैधानिक' घोषित कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ हफ्तों बाद इस फैसले पर रोक लगा दी. मदरसों की मान्यता और बोर्ड की संवैधानिकता को लेकर मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
अलीगढ़ में सभी मदरसा शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया गया है, वेतन डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा गया है. 2025-26 शैक्षणिक सत्र से सभी मदरसों में NCERT सिलेबस लागू किया गया है.
ये कार्रवाइयां सिर्फ कानूनी नहीं हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ये पूरी राजनीति का हिस्सा बन चुकी हैं. एक तरफ बीजेपी इसे 'कानून का शासन' और 'तुष्टिकरण के खिलाफ कार्रवाई' बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसे 'सांप्रदायिक एजेंडा' और 'राजनीतिक बदला' करार दे रहा है.



















