राजस्थान यूनिवर्सिटी की कैंटीन पर LPG की किल्लत से लगा ताला, हजारों छात्र परेशान
Rajasthan LPG Crisis: राजस्थान यूनिवर्सिटी में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट से कैंटीन बंद हो गई है. प्रशासन ने अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन छात्रों ने जल्द समाधान की मांग की है.

जयपुर की राजस्थान यूनिवर्सिटी में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में दिक्कत का सीधा असर देखने को मिला है. यूनिवर्सिटी की मुख्य कैंटीन पिछले 5 दिनों से बंद पड़ी है, जिससे हजारों छात्रों को रोजाना खाने-पीने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. कैंटीन संचालक ने गेट पर नोटिस लगाकर साफ कर दिया कि बढ़ती लागत के कारण अब संचालन संभव नहीं है.
कैंटीन संचालक के मुताबिक, पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर करीब 850 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब इसकी कीमत लगातार बढ़ती जा रही है. हालत यह है कि बाजार में गैस मिलना भी मुश्किल हो गया है.
ब्लैक में सिलेंडर 3000 रुपये तक में मिल रहा है. इसके साथ ही तेल और अन्य खाद्य सामग्री के दाम भी काफी बढ़ गए हैं. ऐसे में पुराने रेट पर खाना उपलब्ध कराना घाटे का सौदा बन गया.
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कॉन्ट्रैक्ट बना बड़ी समस्या
कैंटीन संचालक ने बताया कि यूनिवर्सिटी के साथ हुए समझौते के तहत खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने की अनुमति नहीं थी. यानी खर्च बढ़ने के बावजूद कीमत वही रखनी पड़ रही थी. इसी वजह से मजबूरी में कैंटीन बंद करनी पड़ी. 14 अप्रैल को नोटिस लगाकर इस फैसले की जानकारी दी गई.
कैंटीन बंद होने का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ा है. कई छात्रों का कहना है कि उन्हें क्लास के बीच में खाना तक नहीं मिल पा रहा है. बाहर जाकर खाना खाने में समय और पैसा दोनों ज्यादा लग रहा है. कुछ छात्र तो मजबूरी में भूखे ही रह जा रहे हैं. टीचर्स और कर्मचारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासन की अस्थायी व्यवस्था
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फिलहाल छात्राओं को गर्ल्स हॉस्टल की कैंटीन में जाने की अनुमति दी है, लेकिन छात्रों के लिए ऐसी कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है. उन्हें बाहर के होटलों या ढाबों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
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प्रशासन का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है. कैंटीन बंद होने के बाद अब नए टेंडर की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है. कोशिश है कि जल्द से जल्द कैंटीन को दोबारा शुरू कराया जाए ताकि छात्रों को राहत मिल सके.
गैस की बढ़ती कीमतों ने अब सीधे तौर पर शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है, और इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है.
Source: IOCL


























