'साधु-संतों को राजनीति से दूर...', भैराणा धाम विवाद पर बोले गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम
Rajasthan News: भैराणा धाम जमीन विवाद पर राजस्थान सरकार ने नरम रुख अपनाया है. गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने कहा कि सरकार संत समाज और आम जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले पर विचार करेगी.

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले में संत दादू दयाल की तपस्थली भैराणा धाम के आसपास की जमीन को इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए अधिग्रहित किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है. साधु-संतों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद अब राज्य सरकार ने भी इस मुद्दे पर नरम रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन बातचीत और विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया है.
राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने कहा कि सरकार साधु-संतों के साथ-साथ आम जनता की भावनाओं का भी सम्मान करती है. उन्होंने कहा कि संत समाज ने जो चिंताएं सामने रखी हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उचित फैसला लिया जाएगा.
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उन्होंने यह भी बताया कि इसी वजह से सरकार ने देर रात अधिकारियों की टीम को संतों से बातचीत के लिए भेजा था, ताकि विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके.
राजनीतिक बयानबाजी पर भी सरकार ने जताई नाराजगी
जवाहर सिंह बेडम ने इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. उन्होंने साधु-संतों से भी अपील की कि वे अपने आंदोलन और मांगों को राजनीति से दूर रखें.
सरकार ने कांग्रेस के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि जमीन अधिग्रहण बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. मंत्री ने कहा कि इस तरह के काम कांग्रेस सरकार के समय में होते थे, जबकि वर्तमान बीजेपी सरकार राज्य में उद्योग, विकास और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से काम कर रही है.
विरोध के बीच सरकार पर बढ़ा दबाव
भैराणा धाम को संत दादू दयाल की तपस्थली माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में जमीन अधिग्रहण की खबर सामने आने के बाद संत समाज में नाराजगी बढ़ गई. विरोध प्रदर्शन और बयानबाजी के बाद अब सरकार पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है.
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सरकार का कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान मर्यादित भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए. साथ ही सरकार ने दोहराया कि विकास भी जरूरी है और राज्य में विकास कार्य रुकने नहीं चाहिए.
Source: IOCL

























