एक्सप्लोरर

Explained: दिन में बिजली सस्ती और रात में 14 रुपए यूनिट तक महंगी क्यों? समझिए 'डक कर्व' और सोलर एनर्जी का दिलचस्प खेल

India Power Exchanges: आपके घर की बिजली का बिल भले ही तय दाम पर आता हो, लेकिन थोक बाजार में बिजली ऐसी चीज बन गई है जो दिन में सूरज के साथ बेइज्जत होती है और रात में अंधेरे के साथ बेशकीमती बन जाती है.

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर में दिनभर चलने वाले पंखे और एसी को चलाने वाली बिजली, थोक बाजार में दिन के वक्त कभी मुफ्त तो कभी नेगेटिव कीमत पर बिक रही होती है. लेकिन वही बिजली रात के अंधेरे में 10-12 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है? जी हां, भारत के बिजली एक्सचेंजों में अब यह रोज का खेल बन चुका है. ये स्टोरी सिर्फ बिजली मांग और आपूर्ति की नहीं, बल्कि पूरी तरह से सूरज की रोशनी और अंधेरे के बीच चलने वाली जंग की है...

सूरज की पहली किरण से शुरू होता खेल

सुबह के 6-7 बजते ही देशभर में घरों की छतों, खेतों और रेगिस्तानों पर लगे करोड़ों सोलर पैनल काम शुरू कर देते हैं. भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर एनर्जी प्रोड्यूसर है. हमारी कुल बिजली उत्पादन क्षमता में सोलर की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है. जैसे-जैसे धूप तेज होती है, हर घंटे के साथ करोड़ों यूनिट सस्ती सोलर बिजली ग्रिड में दौड़ने लगती है. दोपहर के 12 से 3 बजे के बीच तो सोलर प्लांट अपने चरम पर होते हैं. इतनी भारी मात्रा में बिजली बनती है कि एक्सचेंज में सप्लाई डिमांड पर भारी पड़ने लगती है.

बिजली बाजार का भी वही नियम है जो सब्जी मंडी का यानी जब माल बहुत ज्यादा हो जाए तो भाव गिर जाते हैं. यही वजह है कि तेज दोपहर में स्पॉट एक्सचेंज पर बिजली की कीमत लुढ़ककर 1-2 रुपये प्रति यूनिट और कई बार तो शून्य तक पहुंच जाती है. कुछ राज्यों में तो अब 'नेगेटिव प्राइसिंग' भी देखने को मिल रही है, यानी बिजली बेचने वाला खरीदने वाले को पैसे दे रहा है ताकि उसकी ग्रिड स्थिर रहे.

शाम ढलते ही क्यों बदल जाता है सारा खेल?

लेकिन जैसे ही शाम के 5 बजते हैं और सूरज ढलने लगता है, सोलर पैनल की स्पीड धीमी हो जाती है. 6 बजते-बजते तो सोलर जेनरेशन लगभग खत्म हो जाती है. ठीक इसी वक्त देश के हर घर में लाइट, पंखा, टीवी, एसी, कूलर चालू होते हैं. दफ्तरों से लौटे लोग बिजली का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं. एक तरफ सप्लाई का बहुत बड़ा जरिया अचानक बंद हो जाता है और दूसरी तरफ मांग तेजी से चरम पर पहुंच जाती है.

बिजली वितरण कंपनियों के सामने अचानक संकट खड़ा हो जाता है कि इस भारी मांग को पूरा कैसे करें? उन्हें तुरंत कोयले और गैस वाले थर्मल प्लांट चालू करने पड़ते हैं, जिनकी बिजली बनाने की लागत सोलर के मुकाबले 3-5 गुना ज्यादा होती है. नतीजा यह कि रात 7 से 11 बजे के बीच बिजली एक्सचेंजों पर कीमत 8, 10 और कभी-कभी 12-14 रुपये प्रति यूनिट तक छलांग लगा देती है.

ये है 'डक कर्व'- वो बत्तख की शक्ल जिसने पूरा सिस्टम हिला दिया

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और भारतीय रिसर्च संस्थान इस अजीबो-गरीब पैटर्न को 'डक कर्व' कहते हैं. अगर आप दिनभर की बिजली मांग का ग्राफ खींचें, तो वह बत्तख के आकार जैसा दिखता है. सुबह और शाम को ऊंची पीक और दोपहर में नीचे की तरफ गहरी खाई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि जैसे-जैसे देश में ज्यादा से ज्यादा सोलर पैनल लग रहे हैं, यह डक कर्व और भी गहरा होता जा रहा है.

दोपहर में बिजली की कीमतें गिरकर ज़ीरो होती हैं तो सोलर प्लांट वालों का रेट ऑफ रिटर्न घटता है. शाम को जब थर्मल प्लांट को अचानक पूरी क्षमता पर चलाना पड़ता है, तो उनका मेंटेनेंस और ईंधन का खर्च आसमान छूता है. दोनों ही स्थितियां निवेशकों और बिजली कंपनियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रही हैं.

स्टोरेज की कमी है असली समस्या

आप सोचेंगे कि दिन में जब इतनी सस्ती बिजली बन रही है, तो उसे बचाकर रात में क्यों नहीं इस्तेमाल कर लेते? यही सबसे बड़ी चुनौती है. भारत में अभी बैटरी स्टोरेज की क्षमता बहुत मामूली है. एक करेंट अफेयर्स मैग्जीन के एनालिसिस के मुताबिक, भारत की ग्रिड-स्केल बैटरी स्टोरेज क्षमता अभी शुरुआती दौर में है, जबकि जरूरत कई गुना ज्यादा की है। बड़ी-बड़ी बैटरियां लगाने में भारी निवेश चाहिए, जो अभी बिजली कंपनियों के लिए महंगा सौदा है. साथ ही, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाएं भी समय ले रही हैं. नतीजतन, दिन की बिजली रात के अंधेरे को रोशन नहीं कर पाती.

बिजनेस स्टैंडर्ड ने हाल ही में छापा कि स्पॉट पावर प्राइसेज में यह अस्थिरता अब साल के 12 महीने देखने को मिल रही है, जबकि पहले यह सिर्फ गर्मियों की बात हुआ करती थी. इसकी दो बड़ी वजहें हैं:

  • सोलर कैपेसिटी का बहुत तेजी से बढ़ना.
  • न्यूक्लियर और हाइड्रो जैसी स्थिर बेसलोड बिजली का उतना न बढ़ पाना.

जब आपका सबसे भरोसेमंद पावर सोर्स यानी सूरज ही शाम को गायब हो जाए, तो बाजार में उथल-पुथल तो होगी ही. सरकार अब इस समस्या से निपटने के लिए टाइम-ऑफ-डे टैरिफ (यानी दिन और रात के हिसाब से अलग-अलग बिजली दर) और बैटरी स्टोरेज पर सब्सिडी जैसी योजनाओं पर काम कर रही है.

तो क्या है इसका हल?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक हम दिन की सोलर बिजली को बड़े पैमाने पर स्टोर करने का इंतजाम नहीं करते, यह उथल-पुथल जारी रहेगी. कुछ स्टार्टअप अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे प्लांट डिजाइन कर रहे हैं जो दिन में अपना उत्पादन घटाकर और रात में बढ़ाएंगे. इंडोएन डॉट कॉम के मुताबिक, बिजली की कीमतों में यह जंगलीपन आने वाले 4-5 सालों तक और बढ़ सकता है, क्योंकि सोलर कैपेसिटी लगातार बढ़ रही है जबकि स्टोरेज की रफ्तार उससे मेल नहीं खा रही.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Gen-Z के लिए केंद्र सरकार से क्या मांग करेंगे तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी? रैली में कर दिया खुलासा
Gen-Z के लिए केंद्र सरकार से क्या मांग करेंगे तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी? रैली में कर दिया खुलासा
पेपर लीक पर PM मोदी ने जारी किया नया वीडियो मैसेज, बोले - 'छात्रों के भविष्य से खिलवाड़...'
पेपर लीक पर PM मोदी ने जारी किया नया वीडियो मैसेज, बोले - 'छात्रों के भविष्य से खिलवाड़...'
प्रोटेस्ट के बाद अब क्या करेगी कॉकरोच जनता पार्टी, अभिजीत दीपके का आया बयान, बोले - 'हम जल्दी ही...'
प्रोटेस्ट के बाद अब क्या करेगी कॉकरोच जनता पार्टी, अभिजीत दीपके का आया बयान, बोले - 'हम जल्दी ही...'
'सरकार का मकसद हर युवा को...', वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
'सरकार का मकसद हर युवा को...', वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: Gen Z की ताकत को सलाम, सोनाक्षी सिन्हा ने कान पकड़कर मांगी माफी (26.07.26)
Sairaab: Ishan-Nayanika का कुबूल-ए-इश्क़! अधूरा प्यार हुआ पूरा, मिले दो दिल #sbs
Dharmendra Pradhan के इस्तीफे पर Priyanka Chopra समेत Bollywood Celebs के रिएक्शन वायरल
Sansani|Strange Marriage Video:एक दूल्हा और 3 सगी बहनें! रील बनाने वाली बहनों ने कैमरामैन से रचाई शादी!
Salman Khan का नया पोस्ट बना चर्चा का विषय,
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'सरकार का मकसद हर युवा को...', वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
'सरकार का मकसद हर युवा को...', वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पप्पू यादव का तेजस्वी यादव पर निशाना, कहा- 'पहले जो नेता...'
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पप्पू यादव का तेजस्वी यादव पर निशाना, कहा- 'पहले जो नेता...'
Box office Collection: 2 करोड़ के बजट में 803% प्रॉफिट, ये है कन्नड़ की 2026 की मोस्ट प्रॉफिटेबल फिल्म
2 करोड़ के बजट में 803% प्रॉफिट, ये है कन्नड़ की 2026 की मोस्ट प्रॉफिटेबल फिल्म
इस दिन श्रीलंका दौरे के लिए होगा टीम इंडिया का एलान, इन नए खिलाड़ियों को मिल सकता है मौका
इस दिन श्रीलंका दौरे के लिए होगा टीम इंडिया का एलान, इन नए खिलाड़ियों को मिल सकता है मौका
सिद्धारमैया ने किया 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान, बोले - 'आज की राजनीति...'
सिद्धारमैया ने किया 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान, बोले - 'आज की राजनीति...'
शिक्षा मंत्री का चार्ज लेने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले - 'यह जिम्मेदारी...'
शिक्षा मंत्री का चार्ज लेने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले - 'यह जिम्मेदारी...'
Abhijeet Dipke Typhoid : अभिजीत दिपके को टाइफाइड, कब खतरनाक हो जाती है यह बीमारी?
अभिजीत दिपके को टाइफाइड, कब खतरनाक हो जाती है यह बीमारी?
PM Kisan Yojana: इन किसानों की अटकेगी अगली किस्त, जानें वजह
PM Kisan Yojana: इन किसानों की अटकेगी अगली किस्त, जानें वजह
Embed widget