'अयोध्यावालों के धंधे पूरी तरह से चौपट हो गए', दुकानदारों और रिक्शा चालकों के लिए संजय राउत ने जताया खेद
Maharashtra News: राउत ने दावा किया कि राम मंदिर की इस लूट का दायरा बहुत बड़ा है और पिछले 12-13 वर्षों में राम मंदिर परियोजना के नाम पर 14 हजार करोड़ रुपए जुटाए गए, जिसका हिसाब कोई नहीं देता.

शिवसेना (यूबीटी) नेता और ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर केंद्र सरकार और मंदिर प्रबंधन पर निशाना साधा है. पार्टी के मुखपत्र सामना में संजय राउत ने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के एक बयान का भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने चढ़ावा चोरी की घटना को कलंक बताया था. राउत ने कहा कि मिश्रा ने मामले पर केवल खेद जताया, लेकिन क्या केवल भावनाएं व्यक्त करने से बात बनेगी? बात तो तब बनेगी जब इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
राउत ने अपने लेख में दावा किया कि राम मंदिर की इस लूट का दायरा बहुत बड़ा है और पिछले 12-13 वर्षों में राम मंदिर परियोजना के नाम पर 14 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए, जिसका हिसाब कोई नहीं देता. मंदिर निर्माण के बाद जिनके हाथों में मंदिर की चाबियां थीं, उन्हीं के लोगों ने राम की दान पेटियों को लूट लिया. लूट का यह आंकड़ा कम से कम 500 करोड़ का है.'
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राम मंदिर की लूट से हिंदू समाज की छवि कलंकित
राउत ने लिखा कि अगर चोरी हुई है तो सबसे पहले राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और ट्रस्ट मंडल को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ मामले दर्ज होने चाहिए थे, लेकिन नृपेंद्र मिश्रा ने केवल खेद जताया. ‘कलंकित जैसा महसूस हो रहा है’ ऐसी व्यक्तिगत भावनाएं व्यक्त कर दीं. वास्तविकता ये है कि राम मंदिर की लूट के कारण पूरे हिंदू समाज की छवि कलंकित हुई है. वर्तमान में देश में ऐसा माहौल बन गया है, जैसे अयोध्या में अब ‘राम’ बचे ही नहीं हैं.
अयोध्या के छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा असर
राउत ने दावा किया कि इस मामले के कारण अयोध्या आने वाले भक्तों की संख्या में 75 प्रतिशत की गिरावट आई है. होटल व्यवसाय पर इसकी भारी मार पड़ी है. बमुश्किल 25 प्रतिशत कमरे ही भर पा रहे हैं. पहले माला-प्रसाद बेचने वाले रेहड़ी-पटरी वाले रोज चार-पांच हजार रुपये कमा लेते थे, अब हजार रुपये का भी गल्ला नहीं हो पाता. ई-रिक्शा चलानेवालों का धंधा भी चौपट हो गया है. रेस्टोरेंट की भीड़ कम हो गई है. मंदिर में हुई इस चोरी की मार अयोध्या के छोटे व्यापारियों पर भी पड़ी है. अयोध्या के आस-पास और सौ नए होटल खड़े हो रहे हैं.
क्या चोरों के बीच वहां श्रीराम भी वहां सुरक्षित हैं?
राउत ने मुखपत्र में दावा किया कि ‘चोरी’ के मामले का अयोध्या के धार्मिक पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. अगर राम मंदिर में ही चोरों की भरमार हो गई है तो क्या प्रभु श्रीराम भी वहां सुरक्षित हैं? चारों तरफ चोरों का राज आने से ‘राम’ फिर से दंडकारण्य तो नहीं चले गए? ऐसी शंका से देशभर के रामभक्त परेशान हैं. इसी वजह से अयोध्या की भीड़ छंट गई है.
राउत ने मुखपत्र में कहा कि नृपेंद्र मिश्रा ने अब खेद व्यक्त किया है, लेकिन अयोध्या के मुख्य चोरों को संरक्षण देकर श्रीमान मिश्रा राम को बार-बार कलंकित कर रहे हैं. राम मंदिर की पूरी कमान बीजेपी समर्थित हिंदुत्ववादी संस्थाओं के पास ही थी. मंदिर की चाबियां अपनी कमर में खोंसकर ही ये लोग अकड़ में घूम रहे थे.
शीर्ष नेतृत्व की तय हो जिम्मेदारी
राउत ने लिखा कि जिस तरह राम मंदिर बनने का श्रय लेने की होड़ मची थी, क्या अब चोरी की घटना से प्रधानमंत्री मोदी को कलंकित और अपमानित महसूस नहीं करना चाहिए? राउत ने अपने लेख में कहा कि इस मामले ने बीजेपी और संघ परिवार की साख पर ही बट्टा लगा दिया है. उन्हें मंदिर से जुड़े विवाद पर जवाब देना चाहिए. राउत ने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
नृपेंद्र मिश्रा का ‘खेद’ तमाशे का हिस्सा
राउत ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी ‘मन की बात’ खोलेंगे, श्रीराम से माफी मांगेगे, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. अब इस मामले पर नृपेंद्र मिश्रा ने खेद की फुसफुसी छोड़कर रामभक्तों का एक और अपमान किया है. उन्होंने मुखपत्र में दावा किया कि अब इस मामले की जांच, गिरफ्तारियां सब एक तमाशा हैं और नृपेंद्र मिश्रा का ‘खेद’ इसी तमाशे का हिस्सा है. कुल मिलाकर राउत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि जो भी दोषी है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
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