Sonam Wangchuk Hunger Strike: 'केंद्र सरकार सोनम वांगचुक का गला...', BJP को राज ठाकरे की सीधी चेतावनी
Raj Thackeray on Sonam Wangchuk: राज ठाकरे का कहना है कि किसी अच्छे मुद्दे को लेकर खड़े किए गए आंदोलन को कुचलना और आंदोलनकारी के शरीर को कष्ट देना सरकार के लिए आसान हो गया है.

सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज (गुरुवार, 16 जुलाई) को 19वां दिन है. नीट यूजी पेपर लीक के बाद कई बच्चों की आत्महत्या और लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होते देख सोनम वांगचुक ने सिस्टम पर सवाल उठाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए भूख हड़ताल पर बैठे. लगातार 19 दिन से भूखे रहते हुए सोनम वांगचुक की तबीयत बेहद खराब हो चुकी है. उनका ब्लड ग्लूकोज काफी कम हो गया है, वजन करीब 9 किलो घट चुका है और काफी मसल लॉस भी हो चुका है.
नेताओं समेत कई हस्तियां सोनम से आग्रह कर रही हैं कि अनशन तोड़ दें. इस बीच महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुत राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक की चिंता में नाम लंबा सोशल मीडिया पोस्ट किया.
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'सरकार ने आंदोलनों का गला घोंटने का फैसला लिया'- राज ठाकरे
राज ठाकरे ने लिखा कि सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है. उनकी तबीयत को लेकर आ रहीं खबरें और तस्वीरें निश्चित रूप से चिंता पैदा करने वाले हैं. यह कहते हुए बेहद दुख हो रहा है कि सरकार ने सोनम वांगचुक का और इस देश में आंदोलनों के लिए बची हुई एक जगह का भी गला घोंटने का फैसला कर लिया है.
राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा, "जो सरकार भगवान श्रीराम की तिजोरी लूटे जाने पर भी चुपचाप देख सकती है, उसे नागरिकों के आंदोलनों से भला क्या फर्क पड़ेगा? जिन संस्थाओं को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, उन्हें ही अपने नियंत्रण में ले लिया गया है. चुनावों को मनमाने तरीके से मैनेज किया जा रहा है और इसके लिए बेहिसाब पैसा खर्च किया जा रहा है. यह पैसा कहां से आ रहा है, यह सवाल देश का अधिकांश मीडिया नहीं पूछ रहा है. इसके बजाय यही मीडिया अपने अदृश्य बॉस के इशारे पर सत्ताधारी दल के नेताओं और विरोधियों को बदनाम करने में व्यस्त है."
सोनम वांगचुक यांच्या उपोषणाचा हा आजचा १९ वा दिवस. त्यांच्या तब्येतीच्या ज्या बातम्या ऐकू येत आहेत किंवा जी दृश्य खासकरून सोशल मीडियावर दिसत आहेत ती निश्चितच काळजीत टाकणारी आहेत. हे म्हणायला प्रचंड वाईट वाटतंय की सरकारने सोनम वांगचुक यांचा आणि पर्यायाने या देशातील आंदोलनाची म्हणून… pic.twitter.com/cOD5Z4KSaR
— Raj Thackeray (@RajThackeray) July 16, 2026
'फायदा होने तक ही बीजेपी के लिए प्रिय होता है व्यक्ति'
राज ठाकरे का कहना है कि किसी अच्छे मुद्दे को लेकर खड़े किए गए आंदोलन को कुचलना और आंदोलनकारी के शरीर को कष्ट देना सरकार के लिए आसान हो गया है. एक समय था जब बीजेपी को सोनम वांगचुक से काफी लगाव था. हालांकि, बीजेपी की एक खासियत है कि जब तक कोई व्यक्ति उनके लिए उपयोगी रहता है, तब तक वह उन्हें प्रिय होता है.
सरकार ने सोनम वांगचुक की खूब सराहना की थी
राज ठाकरे ने याद दिलाया कि साल 2018 में सोनम वांगचुक को री-इन्वेस्ट कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया था. उनसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा सहित कई विषयों पर चर्चा की गई और उनकी खूब सराहना भी की गई. उस समय भाजपा यह दिखाना चाहती थी कि वह गैर-पारंपरिक ऊर्जा को कितना महत्व देती है, इसलिए सोनम वांगचुक भी उपयोगी थे.
बाद में जब लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला, तो वांगचुक ने भी बीजेपी की सराहना की लेकिन आगे चलकर उन्हें समझ में आया कि सरकार की मंशा वैसी नहीं है, जैसी दिखाई जा रही है.
लद्दाख में सोनम वांगचुक ने क्यों किया था प्रदर्शन?
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, लद्दाख में दो लोकसभा सीटें हों और वहां के लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा की जाए, ये सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें हैं. इन मांगों को लेकर उन्होंने अनशन और आंदोलन भी किए, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया. उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. क्योंकि सरकार की मंशा अक्सर वैसी नहीं होती, जैसी वह दिखाने की कोशिश करती है.
आज सोनम वांगचुक की मांग सिर्फ इतनी है कि NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जांच हो, इसके लिए जिम्मेदार मंत्री को हटाया जाए और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए. राज ठाकरे ने सवाल किया कि इसमें गलत क्या है?
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