राज ठाकरे
महाराष्ट्र की राजनीति में जब भी आक्रामक तेवर और प्रभावी वक्तृत्व शैली की बात होती है, तो राज ठाकरे का नाम सबसे प्रमुखता से उभरता है. शिवसेना प्रमुख दिवंगत बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत में पले-बढ़े राज ठाकरे आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के जरिए राज्य की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं. हृदयनाथ मंगेशकर के भांजे और बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे का जन्म 14 जून 1968 को मुंबई में हुआ. उनका असली नाम स्वरराज ठाकरे है. बचपन से ही उन्हें अपने चाचा बाल ठाकरे का सानिध्य मिला, जिनसे उन्होंने न केवल राजनीति के गुर सीखे, बल्कि कार्टूनिंग की कला में भी महारत हासिल की. उनकी शैली और बोलने का अंदाज काफी हद तक बाल ठाकरे की याद दिलाता है. राज ठाकरे ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत शिवसेना के छात्र संगठन 'भारतीय विद्यार्थी सेना' से की थी. एक समय उन्हें बाल ठाकरे का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था. हालांकि, समय के साथ पार्टी के भीतर समीकरण बदले और उद्धव ठाकरे को कमान मिलने के बाद राज ठाकरे ने शिवसेना से दूरी बना ली. 9 मार्च 2006 को उन्होंने अपनी नई पार्टी 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' (MNS) की स्थापना कर एक नए अध्याय की शुरुआत की. मनसे की शुरुआत धमाकेदार रही. साल 2009 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 13 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. राज ठाकरे ने 'मराठी मानुष' और 'भूमिपुत्र' के मुद्दे को प्रखरता से उठाया. हालांकि, बाद के वर्षों में चुनावी सफलताएं कम रहीं, लेकिन उनकी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और उनका "लाव रे तो वीडियो" (चलाओ वो वीडियो) जैसा कैंपेन आज भी चर्चा में रहता है. आज राज ठाकरे न केवल एक नेता, बल्कि एक प्रभावशाली ओपिनियन मेकर के रूप में जाने जाते हैं. हाल के दिनों में उन्होंने हिंदुत्व के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है. महाराष्ट्र की राजनीति के इस 'फायरब्रांड' नेता का अगला कदम क्या होगा, इस पर हमेशा पूरे देश की निगाहें टिकी रहती हैं.

























