फर्जी बाबा अशोक खरात मामले में राज ठाकरे ने सरकार को घेरा, 'महाराष्ट्र की जनता को...'
Raj Thackeray On Ashok Kharat: एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के नेता आज तर्क को छोड़कर किसी अजीब ‘तीर्थ’ के नाम पर अशोक खरात जैसे लोगों के पीछे चल पड़ते हैं, यह बेहद भयावह है.

महाराष्ट्र के नासिक में खुद को 'गॉडमैन' बताने वाले अशोक खरात उर्फ 'कैप्टन' पुलिस की गिरफ्त में है. महिला से रेप के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है. इस पर एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अशोक खरात मामले में घिनौनी बातें पढ़कर सचमुच सिर चकरा गया. यह खरात महिलाओं का शोषण कर रहा था और बदले में किसी 'अलौकिक शक्ति' से लाभ होने की उम्मीद में लोग उस पर भरोसा कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यह अंधविश्वास और निर्लज्जता आखिर इस समाज में कहां से आई? उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार को भी घेरा.
महाराष्ट्र को किस दिशा में ले जाया जा रहा- राज ठाकरे
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा, ''कुछ ही दिन पहले, 19 मार्च 2026 को हमारी पार्टी के गुड़ी पड़वा मेले से हमने महाराष्ट्र की समृद्ध परंपरा और इस राज्य ने देश को दिए महान व्यक्तित्वों का प्रस्तुतीकरण किया था. उसमें संत ज्ञानेश्वर (Sant Dnyaneshwar), संत तुकारा से लेकर संत Gadge Baba और हमारे आजोबा प्रबोधनकार ठाकरे तक इन सभी ने मराठी समाज की चेतना को कैसे विकसित किया, यह दिखाया गया था. और उसी महाराष्ट्र में जब अशोक खरात जैसा नीच व्यक्ति, राजनेताओं के आशीर्वाद से उत्पात मचाता है, तब सच में सवाल उठता है कि महाराष्ट्र को आखिर किस दिशा में ले जाया जा रहा है?”
खरात जैसे लोगों के पीछे चल पड़ना भयावह- राज ठाकरे
उन्होंने आगे कहा, ''जिस महाराष्ट्र में शासक संतों का आशीर्वाद लेते थे, जहां बाल गंगाधर तिलक जैसे नेता ‘गीतारहस्य’ ग्रंथ लिखते थे, जहां यशवंतराव चव्हाण और तर्कतीर्थ लक्ष्मणशास्त्री जोशी जैसे विद्वानों के बीच संवाद होता था उसी महाराष्ट्र के नेता आज तर्क को छोड़कर किसी अजीब ‘तीर्थ’ के नाम पर अशोक खरात जैसे लोगों के पीछे चल पड़ते हैं, यह बेहद भयावह है.
राज्य के पतन का संकेत- राज ठाकरे
राज ठाकरे ने कहा, ''महाराष्ट्र में अंधश्रद्धा के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है और विवेक की परंपरा मजबूत रही है. इसी का परिणाम था कि दिसंबर 2013 में महाराष्ट्र विधानसभा में अंधश्रद्धा निर्मूलन विधेयक पारित हुआ. उस समय जिन विधायकों ने यह विधेयक पास किया था, उनमें से कई आज भी विधायक हैं और उनमें से कुछ इस मामले में संदेह के घेरे में हैं. यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण विरोधाभास है और राज्य के पतन का संकेत भी है.
महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह उलझ गई- राज ठाकरे
उन्होंने कहा कि पहले चुनाव टिकट पाने की दौड़, फिर जीतने के लिए किसी भी हद तक जाना, फिर मंत्री पद की चाह. अगर वह नहीं मिला तो सत्ता पक्ष को खुश करने की कोशिश, वफादारी साबित करने की होड़. मंत्री पद मिलने के बाद उसे बचाए रखने की चिंता और इसी बीच नए लोगों के सत्ता में आने का डर. इसी चक्र में महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह उलझ गई है. उन्होंने कहा, ''इन्हीं खोखली चिंताओं में उलझे नेता, जब कोई खरात जैसा व्यक्ति 'चमत्कार' का भरोसा देता है, तो उसके पीछे चल पड़ते हैं. अब तो कुछ अधिकारी भी मंत्रियों के हर तरह के सलाहकार बन गए हैं, जिन्हें किसी भी तरह सत्ता से जुड़े रहना है.''
समाज और मानसिकता पर बुरा असर- राज ठाकरे
एमएनएस प्रमुख ने सवाल उठाते हुए ये भी कहा कि इन सबका महाराष्ट्र के समाज और मानसिकता पर क्या असर पड़ रहा है? क्या इस पर अब विचार होगा? मीडिया इस मामले को लगातार उठा रहा है, यह अच्छी बात है लेकिन साथ ही, उन्हें जनता को यह भी दिखाना चाहिए कि हमारा वास्तविक सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत क्या है. गुड़ी पड़वा मेले में मैंने यही दिखाने की कोशिश की थी ताकि नई पीढ़ी इसे समझ सके. मैं अपने स्तर पर यह काम जारी रखूंगा.''
राज ठाकरे ने सीएम फडणवीस को भी घेरा
उन्होंने आगे कहा, ''महाराष्ट्र की जनता को भी सोचना होगा आप किन लोगों को अपना प्रतिनिधि चुन रहे हैं. आज भी गांव-गांव में कीर्तन होते हैं, ज्ञानेश्वरी का पाठ होता है, तर्क और विवेक की परंपरा जीवित है, लेकिन अगर आप ऐसे लोगों को नेता बनाएंगे, तो महाराष्ट्र का भविष्य सुरक्षित नहीं है. राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि यह मामला उन्होंने ही उजागर किया और इसकी जांच शुरू की. अगर इसका श्रेय लेना है, तो यह भी सवाल उठता है कि जब यह सब हो रहा था और आपके ही गठबंधन के लोगों के नाम सामने आ रहे थे, तब इसकी भनक क्यों नहीं लगी?''
राज ठाकरे ने ये भी कहा कि यह भी सुनने में आ रहा है कि किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को रोकने के लिए इस मामले का इस्तेमाल किया जा रहा है. यानी, अगर सामने वाला झुक गया, तो मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. मेरा मीडिया से अनुरोध है कि इस तरह की राजनीतिक चालों का हिस्सा न बनें. ऐसे ढोंगी बाबाओं को सामने लाएं, उनके कृत्यों का पर्दाफाश करें और तब तक इस मुद्दे को उठाते रहें, जब तक अशोक खरात को कड़ी सजा नहीं मिल जाती है.
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Source: IOCL




























