बारिश की कमी से बेहाल महाराष्ट्र, 74 फीसदी क्षेत्र सूखाग्रस्त घोषित
महाराष्ट्र में बारिश की कमी के चलते सरकार ने 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. राज्य के 74% इलाके में सूखे का असर है और किसानों की फसल पर संकट गहराया है.

महाराष्ट्र में बारिश की कमी से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसील क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया. सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, इस फैसले के दायरे में राज्य का करीब 74 फीसदी क्षेत्र आएगा. सूखे की वजह से किसानों के साथ-साथ मवेशियों और ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या भी बढ़ गई है.
सरकार का यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया सूखा प्रभावित इलाकों के दौरे के बाद आया है. धाराशिव और बीड जैसे जिलों में जुलाई के बाद से बारिश नहीं हुई है. इसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर पड़ा है. किसान फसल बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं कई इलाकों में मवेशियों के लिए चारे और पानी की समस्या भी सामने आ रही है.
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मराठवाड़ा में बारिश की कमी से ज्यादा परेशानी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 1 जून से 18 सितंबर के बीच सिर्फ 424.5 मिमी बारिश हुई. इस अवधि में सामान्य बारिश 613.1 मिमी होनी चाहिए थी. यानी यहां करीब 30.8 फीसदी बारिश कम हुई. धाराशिव और मराठवाड़ा के 5 अन्य जिले इसी डिवीजन में आते हैं.
पुणे और नासिक डिवीजन में भी करीब 30 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. अमरावती और नागपुर डिवीजन में बारिश करीब 27 फीसदी कम रही. हालांकि, कोंकण में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही और यहां बारिश की कमी 6.3 फीसदी रही.
महाराष्ट्र में सामान्य से 18.8 फीसदी कम बारिश
पूरे राज्य की बात करें तो 1 जून से 18 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 932.3 मिमी होती है. यानी राज्य में कुल 18.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई. कम से कम 6 जिलों में बारिश की कमी 40 से 50 फीसदी तक रही.
महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान किसान सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाते हैं. कम बारिश के कारण कई इलाकों में फसल खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं. इसके अलावा फसलों में कीट और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ा है.
किसानों ने किया प्रदर्शन, मुआवजे की मांग
16 सितंबर को राज्य के कई जिलों में किसानों ने प्रदर्शन कर सूखे से राहत और फसल नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की थी. इसके बाद सरकार ने अब सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा की है.
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि जल्द ही फसल नुकसान का सर्वे कराया जाएगा. इसके लिए पंचनामे और जमीन पर जाकर नुकसान के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इससे प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजे का रास्ता साफ होने की उम्मीद है.






















